चुनाव आयोग में चल रही है सुप्रीम कोर्ट में होने वाले बड़े इम्तिहान की तैयारी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को आचार संहिता उल्लंघन के मामलों में लगातार क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होनी है. सुप्रीम कोर्ट  के संभावित सवालों को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग में जवाब तैयार किए जा रहे हैं.

आयोग के लीगल पैनल के वकीलों के साथ निर्वाचन आयोग के आला अधिकारियों की मीटिंग  के दौर चल रहे हैं. लीगल पैनल ने गेस पेपर की तरह कोर्ट में पूछे जा सकने वाले कुछ सम्भावित सवालों और उनके जवाब की सूची आयोग के अधिकारियों दी है. लेकिन आयोग के आला अधिकारियों को डर भी है कि कहीं सुप्रीम कोर्ट ने कड़े सवाल पूछ लिए तो क्या होगा?

निर्वाचन  आयोग ने अब तक दोनों नेताओं को 9 मामलों में क्लीन चिट दी है. आपको बता दें कि दोनों नेताओं के खिलाफ़ अपने चुनावी भाषणों में सेना की सर्जिकल स्ट्राइक का राजनीतिक ज़िक्र और विरोधियों के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल जैसे गंभीर आरोप लगे थे. आयोग के सूत्रों के मुताबिक निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा ने मीटिंग के दौरान ऐसे रेवड़ियों की तरह बांटी जा रही क्लीन चिट पर आपत्ति भी जताई. लेकिन मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा और सबसे नए बने आयुक्त सुशील चंद्रा ने लवासा की आपत्तियों को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह को क्लीन चिट दी.

आयोग के सूत्र तो ये भी बताते हैं कि जिला निर्वाचन अधिकारी और पीएम या शाह की सभाओं वाले संबन्धित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की रिपोर्ट, भाषण की रिकॉर्डिग और अन्य सबूतों पर गौर करने पर भी क्लीन चिट देने पर आयोग के लिए जवाब देना मुश्किल तो होगा.

हालांकि निर्वाचन आयोग की नियमावली के मुताबिक तीनों आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र और शक्तियां बराबर हैं. किसी भी मुद्दे पर विचार में मतभेद होने पर बहुमत का फैसला ही मान्य होगा. फिर चाहे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ही अल्पमत में क्यों ना हों.

फिलहाल  मोदी-शाह क्लीन चिट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आयोग के आदेशों को रिकॉर्ड पर रखने को कहा है. इस आदेश के बाद आयोग को अंदेशा है कि अगली सुनवाई में कोर्ट आयोग में होने वाली मीटिंग की प्रक्रिया और फैसले के आधार को लेकर तीखे और सीधे सवाल करेगा.

इस मामले में  याचिकाकर्ता ने आयोग के फैसलों को और पारदर्शी बनाने के लिए गाइडलाइन का खुलासा करने की मांग की है.अब मुमकिन है कि निर्वाचन आयोग मोदी-शाह को क्लीन चिट के अपने फैसले और उसकी प्रक्रिया का ब्यौरा दे.निर्वाचन आयोग अब तक आधिकारिक तौर पर सुनवाई के दौरान तीनों आयुक्तों के विचारों का खुलासा नहीं करता है.सिर्फ बहुमत के विचारों का सार मीडिया में बताया जाता है.लेकिन अब हो सकता है कोर्ट की तरह ही अल्पमत विचार वाले आयुक्त के विचारों का भी मीडिया में खुलासा हो.

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