लोकसभा चुनाव 2019 : सियासत के अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर कैसे निकलेंगे !

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भोपाल। इस बार लोकसभा के चुनाव कई मायनों में खास होने जा रहे हैं. कुछ नेता टिकट मिलने के बाद अपने ही घर में घिर गए हैं तो कुछ को घेरने के लिए चक्रव्यूह रचा जा रहा है. लोकसभा चुनाव के रण में किस्मत आजमा रहे कई दिग्गजों की राह इस बार मुश्किल नजर आ रही है. उन्हें डर है कि समीकरण इंच भर भी बदले तो मिली मिलाई जीत की आस, हार में तब्दील हो सकती है. यही वजह है कि ऐसे नेता चुनावी समीकरण बैठाने में दिन रात एक किए हुए हैं.

दिग्विजय सिंह

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह राजगढ़ से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टफ टास्क देकर भोपाल से उम्मीदवार बना दिया। भोपाल सीट बीजेपी का गढ़ है लिहाजा दिग्विजय सिंह के लिए जीत यहां आसान नहीं है

ज्योतिरादित्य सिंधिया
चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने सिंधिया को यूपी में बड़ी ज़िम्मेदारी दे दी। यूपी की जिम्मेदारी मिलने की वजह से सिंधिया अपने संसदीय क्षेत्र गुना में ज्यादा वक्त नहीं दे पाए
कांग्रेस की पहली सूची में सिंधिया का नाम शामिल न होने से अटकलों का बाजार गर्म है।

अजय सिंह
विंध्य में कांग्रेस का बड़ा चेहरा होने के बावजूद अजय सिंह की सीट तय नहीं हो पा रही है। विधानसभा चुनाव में मिली हार ने अजय सिंह की राह मुश्किल कर रखी है। सतना या सीधी से टिकट की आस में अजय सिंह अभी आस लगाए ही बैठे हैं।

नरेंद्र सिंह तोमर
5 साल मोदी सरकार में मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर अभी तक ग्वालियर से सांसद थे। लेकिन इस बार ग्वालियर में हार के डर से उन्होंने सीट बदल ली है। वो इस बार ग्वालियर से मुरैना पलायन कर गए हैं। हालांकि अभी चर्चा है कि उनका टिकट बदलकर भोपाल सीट से खड़ा किया जा सकता है.

वीरेंद्र खटीक
वीरेंद्र खटीक दलित आदिवासी वर्ग का बीजेपी का बड़ा चेहरा हैं। पार्टी ने उन्हें दोबारा टीकमगढ़ से मैदान में उतारा है
वीरेंद्र खटीक का उनकी पार्टी के ही नेता विरोध कर रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान
विधानसभा चुनाव में बीजेपी का चेहरा रहे शिवराज का रंग लोकसभा चुनाव में फीका है। शिवराज चुनाव लड़ेंगे या नहीं इस पर भी संशय बना हुआ है। पार्टी ने न तो उन्हें पूरी तरह मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी दी है और न ही उन्हें बाहर रखा गया है। बीजेपी हो या कांग्रेस,इतना तो तय है कि दिग्गजों की राह इस बार उतनी आसान नहीं हैं जितना उनकी ओर से दावा किया जा रहा है। देखना ये होगा कि आखिर सियासत के अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर कैसे निकलेंगे।

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