साहित्यिक चोरी को बढ़ावा दे रहा है रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय

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जबलपुररानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर के छात्रसंघ नेता सोमदत्त यादव, शिवम सिंह, अभिनव तिवारी और रोहित सोनी के नेतृत्व में आज कुलपति के मध्यम से राज्यपाल को दिए ज्ञापन में विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी में नकल रोकने की अपील की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि विश्वविद्यालय पीएचडी की नकल पकड़ने वाली सॉफ्टवेयर से थीसिस जांच नही करा कर शोध कार्य मे साहित्यिक चोरी (PLAGIARISM) का बढ़ावा दे रहा है ।


छात्रसंघ नेता सोमदत्त यादव ने बताया कि यूजीसी (अकादमिक एकरूपता को प्रोत्साहन और उच्च शिक्षण संस्थानों में साहित्यिक चोरी की रोकथाम) नियमन, 2018 लागू होने के बाद पीएचडी के रिसर्च की सच्चाई को जांचने “उरकुण्ड” सॉफ्टवेयर लांच हुआ, लेकिन लांच के बाद सॉफ्टवेयर से थीसिस की जांच कराने की अनुमति रादुविवि द्वारा आज दिनांक तक नही दी गयी।

उन्होंने मीडिया से चर्चा के दौरान बताया कि शिक्षा के मंदिर में बैठे हुए तथाकथित विद्वानों ने मीडिया में बढ़-चढ़ कर बोला और नकल पकड़ने का दावा किया था, लेकिन 7 महीना बीतने के बाद भी अब तक एक भी पुरानी थीसिस जांचने के लिए कम्प्यूटर को चालू नहीं किया गया। वजह यूनिवर्सिटी प्रशासन जांच का आदेश जारी करना ही भूल गया। जबकि नियमानुसार 1 जुलाई 2012 के बाद से जितनी भी थीसिस विवि में जमा होगी उसकी जांच इस सॉफ्टवेयर से करना अनिवार्य है तभी डिग्री मान्य रहेगी। दावा किया गया था कि विश्वविद्यालय के एक-एक थीसिस को जांचा जाएगा। घोषणा तो कर दी, लेकिन जांच के नियम ही अब तक तय नहीं किए।

छात्र संघ के एक अन्य नेता अभिनव तिवारी ने बताया कि अभी विश्विद्यालयो में जो पीएचडी रखी है विश्वविद्यालय प्रशासन को अभी तक समझ में ही नहीं आ रहा है कि इसमें क्या किया जाए । शोध संबंधित फ़ाइलें प्रशासनिक गलियारों में घूम रही है, लेकिन उस पर मुहर कोई नहीं लगा रहा है। उरकुंड सॉफ्टवेयर में देशभर की रिसर्च थीसिस अपलोड है। पीएचडी थीसिस सीडी में अपलोड कर जमा होती है। सॉफ्टवेयर से सीडी को स्कैन किया जाता है। उन्होंने बताया कि उरकुण्ड सॉफ्टवेयर चंद मिनटों में ही यह बता देगा कि थीसिस में अन्य थीसिस से कितनी कॉपी हुई है। इसमें कई शिक्षा माफिया लगे हैं कि इस सॉफ्टवेयर को विश्वविद्यालयो में लांच होने देना ही नहीं चाहते ताकि उनका कट पेस्ट का धंधा चलता रहे ।

विश्वविद्यालय को दिए ज्ञापन में में छात्रसंंघ ने आरोप लगाया कि उरकुंड सॉफ्टवेयर को चलाने के लिए विश्विद्यालय में स्थाई कर्मी तक नहीं है। जबकि बेल्ट्रॉन कंपनी से कई विश्विद्यालयो में कंप्यूटर ऑपरेटर बहाल किए गए हैं उन्हें ही सॉफ्टवेयर के संचालन की जिम्मेवारी कम से कम दे दी जाए ताकि छात्रों का यूजीसी के अनरूप डिग्री नियमानुकूल मिल सके ।

विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने मांग की है कि जल्द से जल्द 1 जुलाई 2012 के बाद जीतने भी थीसिस विश्वविद्यालय में जमा हुई है उनका उरकुण्ड सॉफ्टवेयर में जांच करके “शोधगंगा” की वेबसाइट पर अपलोड कर सार्वजनिक किया जाए, जिससे शोध की गुणवक्ता में सुधार हो सके।

छात्रसंघ ने सौपी साहित्यिक चोरों की सूची

छात्रसंघ ने साहित्यिक चोरी करके पीएचडी हासिल करने वाले लोगों कि सूची विश्वविद्यालय प्रशासन को सौपी है, जिसमें शैलेष प्रसाद (पत्रकारिता विभाग), गजेंद्र सिंह भारद्वाज ( हिंदी विभाग), मोहम्मद आमिर खान (विधि विभाग), परवेज अहमद कुरैशी ( राजनीति विभाग) सहित 26 शोधार्थियों के नाम है।

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