सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा- राम मंदिर पर कोर्ट को 24 घंटे में फैसला सुना देना चाहिए

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लखनऊ । अयोध्या में राम मंदिर के निर्णय के बारे में 24 घंटे में हल निकाल देने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बाबत कोर्ट से भी 24 घंटे में फैसला सुनाने का अनुरोध कर रहे हैं। इस बाबत उन्होंने ट्वीट भी किया है। उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल पूरी रौ में थे।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करते हुए लिखा कि श्रीराम जन्मभूमि एक आस्था से जुड़ा विषय है और माननीय न्यायालय को भी जन आस्था का सम्मान करते हुए 24 घंटे के भीतर इस पर अपना फैसला सुना देना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने लिखा है कि, जहां तक जमीन के बंटवारे का प्रश्न है तो इलाहाबाद हाई कोर्ट पहले ही कह चुकी है कि जहां रामलला जी विराजमान हैं, वही श्रीराम जन्मभूमि है।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या विवाद हल कर आस्था का सम्मान होना चाहिए। जब हाईकोर्ट ने कह दिया कि वहां रामलला हैं तो फिर विवाद का सवाल ही नहीं है। इसमें 24 घंटे से अधिक का समय नहीं लगना चाहिए। लोहिया ने कहा था कि भारत की सांस्कृतिक सीमा को राजनीतिक सीमा के रूप में बदलने का श्रेय भगवान श्रीराम को ही जाता है। भगवान श्रीराम को लोहिया समझ सकते हैं लेकिन, उनके चेले नहीं।

उन्होंने कहा कि जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा है कि जहां रामलला विराजमान हैं, वहीं राम जन्मभूमि है तो विवाद वहीं समाप्त हो चुका है और बंटवारे का कहीं विवाद ही नहीं है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विवाद में केवल यह तय होना था कि यह राम जन्मभूमि है या नहीं है और जब यह तय हो गया है तो फिर इस विवाद के समाधान में 24 घंटे से 25वां घंटा नहीं लगना चाहिए।

इसके फौरन बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक और ट्वीट किया जिसमें लिखा था कि इसके बाद जमीन बंटवारे का विवाद ही खत्म हो जाता है। मुझे लगता है कि 24 घंटे के अंदर इस पर फैसला आ जाना चाहिए, 25वां घंटा लगना ही नहीं चाहिए। वैसे ये पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी सीएम योगी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि अगर कोर्ट उन्हें राम मंदिर विवाद सौंप दें तो वे 24 घंटे के अंदर इसका हल निकाल देंगे।

बिना नाम लिए सपा पर हमलावर योगी ने कहा कि जिनके पास संस्कार नहीं है और जो मुगलों की परंपरा का अनुसरण करते हैं, गद्दी से उतारने का कार्य करते हैं, वह किसी को आदर कैसे दे सकते हैं। उस दल के एक सदस्य बेहोश गए फिर भी हो-हल्ला बंद नहीं किए।

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