कमलनाथ सरकार के पहले बजट में दिखी ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ की छाप, जानें क्या कुछ रहा खास

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भोपाल। मध्यप्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश कर दिया है. 2 लाख करोड़ से ज्यादा के बजट में 32,106 करोड़ के राजकोषीय घाटे का अनुमान है.सरकार ने इस बजट में जल अधिकार अधिनियम और नदी पुर्नजीवन कार्यक्रम की बात भी कही है, खास बात ये है कि बजट में कोई नया कर नहीं लगाया गया है.इस बजट में सरकार ने इंदौर की कान्हा समेत 40 नदियों को पुनर्जीवित करने की योजना, जलेबी और नमकीन की ब्रांडिंग, महिलाओं के लिए ई-रिक्शा योजना, मनरेगा के लिए 2500 करोड़ रुपए, आवासहीनों को पट्टा, आदिवासियों के लिए हाट-बाज़ार में खास एटीएम, 100 यूनिट बिजली का बिल सौ रुपए जैसी कई बातों का ज़िक्र किया है. लेकिन एक ओर सरकार का खास ध्यान दिखता है, जैसे  हज कमेटी का अनुदान बढ़ाना, मंदिर की जमीनों को सरकारी निधि से विकसित करने का फैसला, 1000 गौ शालाओं के लिये 132 करोड़ रुपये, गोवंश पर पुरानी गौशाला में हर दिन 20 रुपये, पुजारियों के मानदेय में तीन गुना इजाफा, पुजारी कल्याण कोष मठ मंदिर सलाहकार समिति का निर्माण, रामवनगमन पथ के अंचलों के विकास के लिये प्रावधान जैसी बातें कहीं जिससे कांग्रेस के सॉफ़्ट हिन्दुत्व की छाप मध्य प्रदेश में कमल नाथ के पहले बजट में दिखाई दी, लेकिन सरकार को ऐसा नहीं लगता. वित्त मंत्री तरूण भनोट ने कहा ये हिन्दुत्व का नहीं है, यथार्थ का बजट है

इस बजट में सबका ध्यान किसानों के लिये आवंटन पर था, कृषि योजनाओं के लिये 22,736 करोड़ का बजट आवंटित किया गया. सरकार ने कहा कि पहले चरण में 20 लाख किसानों के 7000 करोड़ का कर्ज माफ किया, दूसरे चरण के लिये 8000 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है हांलाकि 50 लाख से ज्यादा किसानों की कर्जमाफी पर लगभग 48,000 करोड़ का खर्च आना है लेकिन खजांची कहते हैं, अभी तक कुल कर्जा जोड़ा नहीं गया. भनोट ने कहा हमने दूसरे चरण में 8000 करोड़ कर्जमाफी के लिये रखा है लेकिन जो लगेगा खर्च करेंगे. हालांकि जब उनसे पूछा गया कि कितना पैसा लगेगा तो उन्होंने कहा अभी तक आंकड़ा आया नहीं है, कोई 48000 करोड़ रुपये बताता है ये कहां से आया कोई बता दे.

वहीं  बीजेपी विधायक और पूर्व सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि ये दावा ठोंकते थे, कहते थे हमारी फ्लैगशिप योजना है. चाहे किसानों की कर्जमाफी हो या रोजगार देना उसका बजट में कोई प्रावधान नहीं था, बजट भाषण केवल कवि सम्मेलन और मुशायरे जैसा था. विपक्ष को बड़ा ऐतराज सत्र में पटल पर रखने से पहले मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर भी था, जिसकी वजह से बजट भाषण से पहले खूब टोकाटाकी हुई. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा जब 7 जून को विधानसभा सत्र की अधिसूचना जारी हो गई थी, तो सप्ताह भर पहले टैक्स लगाना, डीजल-पेट्रोल पर करारोपण करना, आपने स्टैंप ड्यूटी में संशोधन किया ये सारी बातें बजट भाषण में समाविष्ट होना चाहिये, अगर किया तो अधिसूचना पटल पर रखना था कुल मिलाकर विधायक और विधायिका के पूरे अधिकारों का उल्लंघन किया गया है, ये गलत परंपरा है.

इन  सबके बीच राज्य में निवेश लाने के लिये सरकार ने सदन में बताया कि 18-19 अक्टूबर को इंदौर में मेग्नीफिशिएन्ट एमपी का आयोजन होगा जिसके ज़रिये राज्य में निवेशकों का ध्यान खींचने की कोशिश की जाएगी.

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