Independence Day 2019 : 15 अगस्त को ISRO होगा 50 साल का, जानें इससे जुड़ी अहम जानकारी

Spread the love

नई दिल्ली। पूरा भारत (India) 15 अगस्त 2019 यानी गुरुवार को 73वां स्वतंत्रता दिवस 2019 (Independence Day 2019) को देश भक्ति के भाव से मनाएगा। इस आजादी के दिन के लिए देश के भगत सिंह (Bhagat Singh), चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) और राजगुरु (Rajguru) जैसे महान स्वतंत्रता सैनानियों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था। साथ ही महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) और पंडित जवाहर लाल नेहरू (Pandit Jawahar Lal Nehru) ने कूटनिती के माध्यम से अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी। वही दूसरी तरफ विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) ऐसे वैज्ञानिक थे, जिन्होंने भारत को चांद तक पहुंचने का सपना दिखाया था।

आजादी (Independence) को पूरे 72 साल हो चुके हैं और इस सफर में भारत ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इस 72 वर्षों में भारत ने अंतरिक्ष का सफर भी तय किया है। इसमें भारतीय स्पेस एजेंसी भारतीय अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) ने महत्वपूर्ण रोल अदा किया है। दरअसल, इसरो 15 अगस्त 2019 के दिन अपने 50 साल पूरे करने वाला है। अंतरिक्ष में अपनी जगह बनाने के मकसद से 15 अगस्त 1969 (15 August 1969) के दिन इसरो का स्थापना की गई थी।

इसरो का इतिहास (ISRO History)

भारत सन 1947 में अंग्रेजों से आजाद हुआ था। इसके बाद से ही भारतीय वैज्ञानिकों ने सुरक्षा के लिए रॉकेट टेक्नोलॉजी को इजात किया था और साथ ही कई तकनीकों का विकास किया था। यही वजह थी कि दुनिया में भारतीय वैज्ञानिक मश्हूर हुए थे। वहीं, भारत में बढ़ती जनसंख्या और टेलीकॉम के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए इसरो को स्थापित किया गया था।

भारतीय अंतरिक्ष संगठन यानी इसरो (ISRO) को सन 1969 में स्थापित किया गया था। इस संस्थान ने अंतरिक्ष में रिसर्च की गतिविधियों को नियंत्रण करने के लिए बनाया गया था। इसरो ने 70 के दशक में तेजी का विकास किया था, जिसमें आर्यभट, भास्‍कर और रोहिणी जैसे उपग्रह प्रोग्राम शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में सफलता हासिल करने के बाद इसरो ने 80 के दशक में इन्सेट और आईआरएस जैसी सैटेलाइट्स का अविश्कार किया था।

इसरो का विजन

1. इसरो का उद्देश्य है कि वह अलग-अलग राष्ट्रीय कार्यों के साथ अंतरिक्ष की तकनीक और उसके इस्तेमाल का पूरी तरह विकसित करेगा।

2. इसरो ने मौसम विज्ञान के लिए इन्सैट का निर्माण किया था और संसाधान मॉनीटर के लिए आईआरएस को बनाया था।

3. इन दोनों सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए इसरो ने पीएसएलवी और जीएसएलवी जैसे व्हीकल्स का उपयोग किया था।

इसरो के केंद्र

1. जोधपुर

2. उदयपुर

3. भोपाल

4. अहमदाबाद

5. बैंगलोर

6. हासन

7. अलुवा

8. तिरुवनंतपुरम

9. देहरादून

10. नई दिल्ली

11. बेंगलुरु

अगर उपग्रहों का हिसाब लगाया जाए, तो इसरो ने अपने 50 सालों में 60 टेक्नोलॉजी विकसित के साथ लॉन्च की हैं, 8 छात्र उपग्रह, 2 सफलता पूर्वक मिशन और साथ ही 23 विदेशों के 180 विदेशी उपग्रहों को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया है। बता दें कि हाल ही में इसरो ने चंद्रयान-2 को मिशन भी पूरा किया है। इससे पहले 2008 में इसरो ने चंद्रयान 1 मिशन को लॉन्च के साथ सफलतापूर्वक पूरा किया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *