एआरटीओ की कार्रवाही से ई-रिक्शा चालकों की रोजीरोटी पर संकट

संभल मुबारक अली की रिपोर्ट

  • एआरटीओ की कार्रवाही से ई-रिक्शा चालकों की रोजीरोटी पर संकट

एक ओर जहां सूबे की योगी सरकार गरीबों व मजदूरों की हितैषी होने का दावा करती है तो वहीं उन्ही के अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा गरीबों व मजदूरों पर ही एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। ताजा मामला संभल जिले का है जहां एआरटीओ ने बुधवार को अभियान चलाकर 16 ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ कार्रवाही की है जिससे ई-रिक्शा चालकों व उनके परिवार की दो वक्त की रोटी पर भी संकट खडा हो गया है।

बता दें कि जहां एक ओर पहले ही कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते गरीब मजदूरों के घर दो वक्त की रोटी का संकट रहा फिर भी गरीब मजदूरों ने जैसे तैसे अपना व अपने परिवार का भरण पोषण किया। लेकिन जब लॉकडाउन खुला तो गरीब व मजदूर वर्ग के लोगों को आस जगी कि अब वह मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरणपोषण आसानी से कर लेंगे लेकिन उस पर भी जब प्रशासनिक चाबू चलने लगा तो एक बार फिर यह परिवार भुखमरी के कगार पर आ खडे हुए हैं। दरअसल जिस तरह बुधवार को संभल एआरटीओ ने 16 ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ कार्रवाही की तो उसके इर्द गिर्द तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या संभल के प्रशासनिक अधिकारियों की नजर इन गरीबों पर ही पड़ती है या फिर यह परिवहन विभाग के अधिकारी उन लोगों के खिलाफ कार्रवाही करेंगे तमाम बडे वाहन नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं।