दबंग भूमाफिया डार्क गेम के जरिए सरकार को दे रहे हैं चकमा, सरोजनीनगर तहसील का मामला

समाचार भारती के लिए मुख्य संपादक मनीष गुप्ता की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

एक तरफ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार भू माफियाओं को लेकर सख्त नजर आ रही है ,तो वही सरकार के कहने पर लखनऊ विकास प्राधिकरण समय-समय पर अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई भी कर रहा है lलेकिन इसी सरकार में शहर के एक कोने में अवैध प्लाटिंग का कार्य तेजी से हो गया ,जी हां हम बात कर रहे हैं सरोजिनी नगर तहसील में पढ़ने वाले ग्राम सरोसा की, सारा खेल सरोसा गांव के खसरा नंबर 1522 पर हुआ है…. सुनेंगे तो हैरत में पड़ जाएंगे भू माफियाओं ने यहां पर ऐसा डार्क गेम खेला कि सरकार को चकमा दे गए, मजे की बात तो यह है कि जो जमीन सरकार ने दर्ज कर ली थी उसी जमीन को दबंग भू माफियाओं ने बड़े ही तिकड़म से बेच डाला…. दरअसल खसरा संख्या 1522 की नपाई आज से 8 साल पहले 19 सितंबर 2013 को तत्कालीन लेखपाल छोटेलाल ने की और जमीन को साफ-साफ हिस्से के हिसाब से बांटा गया यानी जो जमीन जिसकी थी उसको दी गई…. जिस जमीन को भू माफियाओं ने बेचा उसकी तीसरी रजिस्ट्री 2012 मार्च के महीने में की गई थी….. लेकिन मामला तब खुला… जब अजय कुमार धानुक ने जमीन खरीदी यानी 1522 नंबर खसरे का कुछ हिस्सा अजय धानुक ने अपने नाम कराया तो उन्हें यह नहीं मालूम था कि जिस की रजिस्ट्री वह करवा रहे हैं वह राज्य सरकार की भूमि का हिस्सा है और इसी जमीन यानी 1522 का ही एक हिस्सा उसर में दर्ज था वह भी राज्य सरकार की थी ,तब उन्हें मालूम पड़ा कि वह राज्य सरकार की जमीन खरीद रहे हैं….. यानी राज्य सरकार की जमीन को बकौल अजय धनु कुलबीर अग्रवाल और अवध राम को पार्टी बनाया और उनके खिलाफ लेखपाल से जांच की मांग की लेखपाल ने मौके पर सत्यापन किया और पाया की जमीन सरकार की है , तत्कालीन लेखपाल ने आरोपी राम अवध के खिलाफ थाने में एफआइआर कराई काफी जद्दोजहद के बाद सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 के सेक्शन दो और सेक्शन 3 के तहत लेखपाल ने 21 जनवरी सन 2017 को एफआई आर थाने में दर्ज कराई…..• समाचार भारती को मिले दस्तावेज यह बयां कर रहे हैं कि मामला भू माफियाओं से जुड़ा है लेकिन सरकार की आंख में धूल झोंक कर कैसे सरकारी जमीने तक बेची जा रही हैं यह वाक्य आखिरकार जनता के सामने है…. पीड़ित अजय कुमार थानु 2017 से लेकर अब तक सभी अधिकारियों यहां तक की सरकार की नजर में भी लिखा पढ़ी कर रहे हैं फिर भी भू माफियाओं ने कागजों के खेल में ना सिर्फ अजय धानुक को उलझाया बल्कि सरकार को ही चपत लगाई है गौरतलब है अजय धानुक ने मुख्य सचिव प्रमुख सचिव गृह कमिश्नर लखनऊ जिला अधिकारी लखनऊ अपर जिलाधिकारी लखनऊ से लेकर तमाम मीडिया चैनलों में अपनी फरियाद कागजातों के माध्यम से रखी है लेकिन दबंग भू माफियाओं की दबंगई के आगे सब कुछ जीरो बटा सन्नाटा है अब देखना यह है कि भू माफियाओं के खिलाफ शक्ति बरत रही योगी गवर्नमेंट और पुलिस प्रशासन का नेक्स्ट एक्शन इस प्रकरण में क्या होगा….. सवाल यह भी है कि अगर अजय धानुक गलत है तो वह कागजातों सहित इतनी लिखा पढ़ी कैसे कर रहे हैं और अगर बेचने वाले कुलवीर अग्रवाल और अवध राम पर इतने गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं तो शासन प्रशासन चुप क्यों है….. ब्यूरो रिपोर्ट समाचार भारती….