वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग द्वारा सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:-

लखनऊ से समूह संपादक मनीष गुप्ता की रिपोर्ट

खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान क्रय हेतु क्रय संस्थाओं को अग्रिम/ऋण उपलब्ध कराने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी

खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के अन्तर्गत 

धान खरीद 01 अक्टूबर, 2020 से प्रारम्भ होगी

उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम (एस0एफ0सी0) द्वारा धान क्रय हेतु कुल 3000 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के अन्तर्गत कैश क्रेडिट लिमिट/अल्पकालिक ऋण राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिया जाएगा

राज्य सरकार द्वारा इस ऋण की शासकीय गारण्टी स्वीकृत की जाएगी

धान क्रय की व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने, किसानों को 

समय से भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए क्रय संस्थाओं को धनराशि 

तत्काल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया

मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान क्रय हेतु क्रय संस्थाओं को अग्रिम/ऋण उपलब्ध कराने सम्बन्धी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 के अन्तर्गत धान खरीद 01 अक्टूबर, 2020 से प्रारम्भ होगी। धान क्रय की व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने, किसानों को समय से भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए क्रय संस्थाओं को धनराशि तत्काल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।

उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम (एस0एफ0सी0) द्वारा धान क्रय हेतु कुल 3000 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के अन्तर्गत कैश क्रेडिट लिमिट/अल्पकालिक ऋण उन राष्ट्रीयकृत बैंकों से लिया जाएगा, जिनकी ब्याज दर न्यूनतम हो। उक्त कार्यशील पूंजी के रूप में कैश क्रेडिट लिमिट/अल्पकालिक ऋण लिये जाने हेतु एस0एफ0सी0 को अधिकृत किया जाएगा। एस0एफ0सी0 द्वारा खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा को उनकी आवश्यकतानुसार अल्पकालिक ऋण/अग्रिम दिया जाएगा। सम्बन्धित ऋण लिए जाने तथा ऋण की वापसी की शर्तें आदि निर्धारित करते हुए उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम (एस0एफ0सी0) द्वारा ऋण की वापसी सुनिश्चित करायी जाएगी। 

राज्य सरकार द्वारा नामित अन्य क्रय संस्थाओं यथा-उ0प्र0 को-आपरेटिव फेडरेशन लि0 (पी0सी0एफ0) एवं उ0प्र0 को-आपरेटिव यूनियन लि0 (पी0सी0यू0) के द्वारा धान क्रय हेतु कार्यशील पूंजी की व्यवस्था अपने वित्तीय स्रोतों से की जाएगी। उस पर आने वाले भारित ब्याज की प्रतिपूर्ति भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त ब्याज प्रतिपूर्ति को समायोजित करते हुए राज्य सरकार द्वारा की जाएगी।

राष्ट्रीयकृत बैंकों से उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम (एस0एफ0सी0) द्वारा लिये जाने वाले ऋण की राज्य सरकार द्वारा शासकीय गारण्टी स्वीकृत की जाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य एवं आवश्यक वस्तु निगम को ऋण की अदायगी होने तक ब्याज का भुगतान किये जाने हेतु राज्य सरकार द्वारा धनराशि उपलब्ध करायी जाएगी।

भारतीय खाद्य निगम से प्राप्त ब्याज की धनराशि को उपरोक्त ऋण पर देय ब्याज में से समायोजित करते हुए ब्याज की शेष धनराशि निगम को उपलब्ध कराये जाने के प्रस्ताव पर वित्त विभाग की सहमति है। चूंकि विचाराधीन ऋण का प्रयोग उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड द्वारा वाणिज्यिक क्रिया-कलापों के लिये नहीं किया जाना है, अतः शासकीय गारण्टी पर गारण्टी शुल्क आरोपित नहीं किया जाएगा।

जिन बैंकों से उ0प्र0 राज्य खाद्य एवं आवश्यक वस्तु निगम लिमिटेड द्वारा ऋण लिया जाएगा, उनके पक्ष में निगम द्वारा एस्क्रो खाता खोला जाएगा तथा भारतीय खाद्य निगम को धान का विक्रय करने से प्राप्त धनराशि उक्त एस्क्रो खाते में जमा की जाएगी। एस्क्रो खाते में जमा धनराशि से ऋण की अदायगी समय से सुनिश्चित की जाएगी। भविष्य में उक्त निर्णय में किसी संशोधन/परिवर्धन हेतु मुख्यमंत्री जी अधिकृत होंगे।


नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर के निर्माण हेतु कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षरित किये जाने, बिड वैलिडिटी की अवधि में विस्तार किये जाने 

तथा एयरपोर्ट क्षेत्र में पड़ने वाली अवस्थापनाओं के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर के निर्माण हेतु कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षरित किये जाने हेतु और मलेशिया एवं भारत और स्विट्जरलैण्ड के मध्य अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानें प्रारम्भ होने (जो भी बाद में हों) से 45 दिनों के समय के साथ ही भारत में मैनडेटरी क्वारंटाइन की अवधि को सम्मिलित करते हुए अथवा दिनांक 15 अक्टूबर, 2020, जो भी पहले हो, तक समय विस्तार तथा बिड वैलिडिटी तथा सिक्योरिटी की अवधि जो दिनांक 24 अक्टूबर, 2020 तक थी उसे दिनांक 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाये जाने के प्रस्ताव पर अनुमोदन प्रदान किया गया।

मंत्रिपरिषद द्वारा नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर की स्थापना हेतु एयरपोर्ट क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाले लोक निर्माण विभाग एवं ऊर्जा विभाग की परिसम्पत्तियों/अन्य अवस्थापनाओं के विस्थापन/अवसंरचनाओं की स्थापना से सम्बन्धित कार्याें को उनके विभागीय बजट से वहन किये जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया गया।

ज्ञातव्य है कि मंत्रिपरिषद द्वारा 05 जून, 2018 की बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर का निर्माण पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर किया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा एयरपोर्ट के निर्माण हेतु भूमि उपलब्ध करायी गयी है। पी0पी0पी0 मोड पर एयरपोर्ट के विकास के लिए ग्लोबल बिडिंग प्रक्रिया के माध्यम से विकासकर्ता का चयन किया गया। मंत्रिपरिषद की दिनांक 09 दिसम्बर, 2019 की बैठक में नोएडा इण्टरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट जेवर के विकास हेतु प्रिफर्ड बिडर ‘ज्यूरिख एयरपोर्ट इण्टरनेशनल एजी’ को सेलेक्टेड बिडर के रूप में घोषित किये जाने तथा सेलेक्टेड बिडर को कण्डीशनल लेटर आॅफ अवार्ड निर्गत किये जाने हेतु अनुमोदन प्रदान किया गया है। चयनित विकासकर्ता को 16 दिसम्बर, 2019 को कण्डीशनल लेटर आॅफ अवार्ड निर्गत किया गया। चयनित विकासकर्ता को 18 मई, 2020 को तथा विकासकर्ता द्वारा गठित एस0पी0वी0 ‘यमुना इण्टरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड’ को 04 मई, 2020 को केन्द्रीय नागर विमानन मंत्रालय द्वारा सिक्योरिटी क्लियरेंस प्रदान की गयी। बिड डाॅक्यूमेंट (आर0एफ0क्यू0 कम आर0एफ0पी0) एवं कण्डीशनल लेटर आॅफ अवार्ड के अनुसार सिक्योरिटी क्लियरेंस की प्राप्ति के दिनांक से 45 दिन के अन्दर ही कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षरित किया जाना अनिवार्य है। सिक्योरिटी क्लियरेंस की दिनांक 18 मई, 2020 से 45 दिन की अवधि 02 जुलाई, 2020 को पूर्ण होती। 11 मार्च, 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोविड-19 को वैश्विक महामारी घोषित किया गया, जिसके कारण अन्तर्राष्ट्रीय उड़ान पर प्रतिबन्ध है। वर्तमान में कोविड-19 के प्रभाव के कारण अन्तर्राष्ट्रीय उड़ान बाधित होने की स्थिति में कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षरित करने के लिए समय विस्तारण हेतु मुख्य कार्यपालक अधिकारी यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण/सदस्य (सचिव) द्वारा अनुरोध किया गया। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट माॅनीटरिंग एण्ड इम्प्लीमेंटेशन कमेटी की 11 अगस्त, 2020 को सम्पन्न बैठक में कंसेशन एग्रीमेंट हस्ताक्षरित किये जाने हेतु समय विस्तार दिये जाने तथा बिड वैलिडिटी तथा सिक्योरिटी की अवधि जो 24 अक्टूबर, 2020 तक थी उसे 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाये जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। पी0एम0आई0सी0 की संस्तुतियों के परिप्रेक्ष्य में नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा पत्रांक 1418 दिनांक 14 अगस्त, 2020 के माध्यम से आदेश निर्गत किये गये। इस पर मंत्रिपरिषद द्वारा कार्याेत्तर अनुमोदन प्रदान किया गया।


केन्द्र सरकार द्वारा संचालित ‘स्वामित्व योजना’ के 

कार्यान्वयन के लिए ‘उ0प्र0 आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया 

विनियमावली, 2020’ के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने केन्द्र सरकार द्वारा संचालित ‘स्वामित्व योजना’ के कार्यान्वयन के लिए ‘उत्तर प्रदेश आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया विनियमावली, 2020’ के प्रख्यापन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

ज्ञातव्य है कि भारत सरकार द्वारा ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्र के विधिमान्यीकरण हेतु ग्रामीण आबादी क्षेत्र के संचित अभिलेख तैयार करने के लिए नवीनतम ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से सर्वेक्षण कर उनके स्वामित्व सम्बन्धी अभिलेख तैयार करने के लिए ‘स्वामित्व’ नामक योजना का शुभारम्भ राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर 24 अप्रैल, 2020 को किया गया है।

भारत सरकार द्वारा संचालित ‘स्वामित्व योजना’ में निम्नलिखित उद्देश्यों को प्राप्त करने का लक्ष्य हैः-

  1. ग्रामीण भारत के नागरिकों को ऋण और अन्य वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए अपनी संपत्ति को एक वित्तीय परिसंपत्ति के रुप में प्रयोग करने में सक्षम बनाते हुए उन्हें वित्तीय स्थिरता प्रदान करना। 
  2. ग्रामीण नियोजन के लिए सटीक भूमि अभिलेखों का निर्माण करना। 
  3. संपत्ति कर का निर्धारण, जो उन राज्यों में सीधे ग्राम पंचायतों को प्राप्त होगा जहाँ ये विकसित हैं या, राज्य कोषागार को प्राप्त होगा। 
  4. सर्वेक्षण की अवसंरचना और जी0आई0एस0 नक्शों का निर्माण जिनका उपयोग किसी भी विभाग द्वारा अपने उपयोग के लिए किया जा सकता है।
  5. जी0आई0एस0 मानचित्रों का उपयोग करते हुए बेहतर गुणवत्ता वाली ग्राम पंचायत विकास योजना (जी0पी0डी0पी0) तैयार करने में सहयोग देना। 
  6. संपत्ति सम्बन्धी विवादों और कानूनी मामलों को कम करना। 

भारत सरकार की इस योजना में उत्तर प्रदेश राज्य के लगभग 1,08,648 ग्रामों की ग्रामीण आबादी का सर्वेक्षण कर स्वामित्व सम्बन्धी अभिलेख वितरित किये जाने हैं। भारत सरकार द्वारा प्रथम चरण (वर्ष 2020-21) में उत्तर प्रदेश राज्य के कुल 54,022 ग्रामों को चिन्हित किया गया है। इसके अन्तर्गत प्रदेश के 10 मण्डलों-आजमगढ़, वाराणसी, अयोध्या, गोरखपुर, प्रयागराज, मीरजापुर, बस्ती, देवीपाटन, झांसी एवं चित्रकूट के 37 जनपदों के कुल 50,294 ग्रामों की ग्रामीण आबादी का ड्रोन प्रौद्योगिकी के उपयोग से सर्वेक्षण एवं अभिलेख क्रिया प्रारम्भ की गयी है। शेष 3,728 ग्राम पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 08 मण्डलों से लिये गए हैं, जिसमें प्रत्येक जनपद के लगभग 100 ग्राम सम्मिलित हैं।

‘स्वामित्व योजना’ के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार के पास कोई नियमावली नहीं है। अतः योजना के कार्यान्वयन एवं इस क्रम में की जा रही कार्यवाहियों को विधिक संरक्षण प्रदान करने हेतु नियमावली बनाया जाना आवश्यक है। तत्क्रम में ‘उत्तर प्रदेश आबादी सर्वेक्षण और अभिलेख संक्रिया विनियमावली, 2020’ के प्रख्यापन का निर्णय लिया गया।

विनियमावली के द्वारा सर्वेक्षण कार्य, अभिलेखों की तैयारी, अभिलेखों का प्रकाशन एवं अन्तिमीकरण, अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण, अभिलेखों का अद्यतनीकरण की प्रक्रिया निर्धारित होगी। विनियमावली के द्वारा सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया हेतु अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कर्तव्य एवं दायित्वों का निर्धारण होगा।

जिला अभिलेख अधिकारी केवल सुलह समझौते के आधार पर निवारण करते हुए आपत्ति निस्तारित करेगा। सहायक अभिलेख अधिकारी, अन्तिम ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) तैयार करने की पुष्टि करेगा तथा जिला अभिलेख अधिकारी को सूचित करेगा। जिला अभिलेख अधिकारी सम्बन्धित ग्राम को आबादी सर्वेक्षण एवं अभिलेख संक्रिया से पृथक किये जाने से पूर्व ग्रामीण आवासीय अभिलेख (घरौनी) जिनका आबादी सर्वेक्षण पूर्ण हो गया हो, की प्रति सम्बन्धित को उपलब्ध करा सकते हैं।

इस योजना के अन्तर्गत 03 कार्यों यथा-सम्पत्ति की सीमाओं का चिन्हांकन, सर्वेक्षण के बारे में ग्राम के निवासियों में जागरूकता पैदा करना एवं क्षेत्र में ड्रोन उड़ने से पहले ग्राम पंचायत के साथ ग्रामीणों को सम्पत्ति कार्ड जारी करने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था करने पर आने वाला व्यय ग्राम पंचायत निधि के अन्तर्गत मनरेगा, 15वां वित्त आयोग अथवा आर0जी0एस0ए0 निधि से कवर किया जाएगा। शेष व्यय भार को वहन भू-लेख ‘खतौनी’ से प्राप्त होने वाली आय (प्रयोक्ता प्रभार) से किया जायेगा और भविष्य में ‘घरौनी’ से प्राप्त होने वाली आय से समायोजित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार से अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं होगी।


‘एक जनपद एक उत्पाद योजना के क्रियान्वयन 

हेतु रिटेल स्टोर्स के माध्यम से ‘एक जनपद एक उत्पाद’ 

उत्तर प्रदेश की ब्राण्डिंग योजना प्रारम्भ किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने ‘एक जनपद एक उत्पाद’ उ0प्र0 को ब्राण्ड के रूप में स्थापित किये जाने के उद्देश्य से रिटेल स्टोर्स के माध्यम से ‘एक जनपद एक उत्पाद उ0प्र0 की ब्राण्डिंग योजना’ के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह योजना निम्नानुसार प्रस्तावित की गयी है:-

1- खुदरा दुकानों ;त्मजंपस ैजवतमेद्ध में उपलब्ध स्थानों ;ैचंमध्ैीमसद्धि के माध्यम से ओ0डी0ओ0पी0 उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देना।

2- ओ0डी0ओ0पी0 ग्लो साइन बोर्ड, स्टेण्डीज ;ैजंदकममेद्ध एवं अन्य प्रचार-प्रसार के माध्यमों से इन खुदरा दुकानों को ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर्स के रूप में ब्राण्ड करना।

3- योजना उत्तर प्रदेश के साथ-साथ सम्पूर्ण भारत वर्ष (प्रदेश के बाहर एयरपोर्ट एवं रेलवे स्टेशन तक सीमित) में लागू होगी।

4- ओ0डी0ओ0पी0 उत्तर प्रदेश की ब्राण्डिंग योजना प्रारम्भ होने की तिथि से 03 वर्ष की अवधि तक लागू रहेगी।

 वित्तीय प्रोत्साहन सहायता:-

पंचायत क्षेत्र, नगर पालिका, नगर निगम हेतु वित्तीय सहायता (एयरपोर्ट एवं रेलवे स्टेशन के अतिरिक्त):

1- पंचायत क्षेत्र में स्थापित ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर्स हेतु: 40 हजार रुपये।

2- नगर पालिका क्षेत्र में स्थापित ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर्स हेतु: 60 हजार रुपये।

3- नगर निगम क्षेत्र में स्थापित ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर्स हेतु: 01 लाख रुपये।

 एयरपोर्ट एवं रेलवे स्टेशन हेतु वित्तीय सहायता निम्नानुसार दी जाएगी।

श्रेणी एयरपोर्ट एवं रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट हेतु वित्तीय प्रोत्साहन (किराए, विद्युत बिल एवं सजावट के भुगतान के सापेक्ष) (रु0 में) रेलवे स्टेशन हेतु वित्तीय प्रोत्साहन (किराए, विद्युत बिल एवं सजावट के भुगतान के सापेक्ष) (रु0 में)

1 2 3 4

अ दिल्ली, मुम्बई 5,00,000 2,00,000

ब लखनऊ, वाराणसी, पुणे, कोचीन व डोदरा, अमृतसर, इंदौर, नागपुर, मंगलौर, विशाखापत्तनम, तिरुपति, अन्य प्रदेश राजधानी में स्थापित 4,00,000 1,50,000

स श्रेणी-क एवं ख के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर स्थापित 3,00,000 75,000

चयन की प्रक्रिया:-

ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर्स का चयन निम्न प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

1- ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर्स का चयन कुल क्षेत्रफल के आधार पर किया जाएगा। प्राप्त आवेदन पत्रों को ओ0डी0ओ0पी0 के उत्पादों को अधिक डिस्प्ले स्थान प्रदान करने वाले स्टोर्स के आधार पर घटते क्रम में रखते हुए सूची उपायुक्त उद्योग द्वारा बनायी जाएगी। पात्रता की अन्य शर्तें पूर्ण करने पर ओ0डी0ओ0पी0 उत्पादों को अधिक डिस्प्ले क्षेत्रफल उपलब्ध कराने वाले स्टोर्स को चयन में प्राथमिकता प्रदान की जाएगी।

2- विभिन्न क्षेत्रों में लक्ष्यों का निर्धारण आयुक्त एवं निदेशक उद्योग स्तर से किया जा सकेगा।

ऽ प्राप्त आवेदन पत्रों के सापेक्ष चयन की कार्यवाही निम्नानुसार गठित समिति द्वारा की जाएगी (एयरपोर्ट एवं रेलवे स्टेशन को छोड़ते हुए):-

1- जिलाधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित मुख्य विकास अधिकारी (अध्यक्ष)

2- लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (एल0डी0एम0)

3- अधिशाषी अभियंता, विद्युत वितरण

4- उप श्रमायुक्त/सहायक श्रमायुक्त

5- उपायुक्त, जी0एस0टी0

6- उपायुक्त उद्योग (सदस्य/संयोजक)

7-आवेदनों के चयन में चयन समिति का निर्णय अन्तिम होगा।

8- एयरपोट्र्स एवं रेलवे स्टेशन हेतु चयन प्रथम आवत प्रथम पावत के आधार पर आयुक्त एवं निदेशक उद्योग (ओ0डी0ओ0पी0 प्रकोष्ठ) द्वारा किया जाएगा। प्रति एयरपोर्ट एवं प्रति रेलवे स्टेशन अधिकतम एक ओ0डी0ओ0पी0 स्टोर वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु पात्र होगा।


नवस्थापित चिकित्सा संस्थानों/विश्वविद्यालयों में 

राजकीय चिकित्सा शैक्षणिक संस्थाओं तथा आम्र्ड फोर्सेज मेडिकल 

सर्विसेज से सेवानिवृत्त चिकित्सा शिक्षकों को आचार्य के पद पर 

संविदा के आधार पर पुनर्नियोजित किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई, इटावा, सुपर स्पेशियलिटी बाल चिकित्सालय एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान, नोएडा, राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ग्रेटर नोएडा तथा उच्चस्तरीय कैंसर संस्थान एवं चिकित्सालय, लखनऊ में आचार्य के रिक्त नियमित पदों के सापेक्ष अन्य राजकीय मेडिकल काॅलेजों/चिकित्सा संस्थानों/चिकित्सा विश्वविद्यालयों तथा आम्र्ड फोर्सेज मेडिकल सर्विसेज से सेवानिवृत्त चिकित्सा शिक्षकों में से ऐसे आचार्य (प्रोफेसर), जो अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए हैं, को आचार्य (प्रोफेसर) (कंसल्टेन्ट) के रूप में निर्धारित शर्ताें एवं प्रतिबन्धों के आधार पर 2,20,000 रुपये प्रतिमाह के नियत पारिश्रमिक ;त्मउनदमतंजपवदद्ध पर पुनर्नियोजित किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया है कि उपर्युक्त आचार्य (प्रोफेसर) (कंसल्टेन्ट) को विज्ञापन प्रकाशित कर, सीधी भर्ती द्वारा सम्बन्धित चिकित्सा संस्थान/विश्वविद्यालय के निदेशक/कुलपति की अध्यक्षता में गठित चयन समिति की संस्तुतियों के आधार पर सम्बन्धित विश्वविद्यालय/संस्थान द्वारा पुनर्नियोजित किया जाएगा। सेवानिवृत्त आचार्य (प्रोफेसर) को संविदा के आधार पर आचार्य (प्रोफेसर) (कंसल्टेन्ट) के रूप में पुनर्नियोजित किये जाने विषयक शासनादेश संख्या-119/2018/2842/71-2-2018-33/2018 दिनांक 20 सितम्बर, 2018 में उल्लिखित व्यवस्था प्रचलित रहेगी।


समस्त जनपदों में आंगनबाड़ी/मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर 

अनुपूरक पुष्टाहार (टेकहोम राशन तथा माॅर्निंग स्नैक्स) की आपूर्ति हेतु अनुपूरक पोषाहार का उत्पादन एवं आपूर्ति राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 

के स्वयं सहायता समूहों द्वारा किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के समस्त जनपदों में आंगनबाड़ी/मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर अनुपूरक पुष्टाहार (टेकहोम राशन तथा माॅर्निंग स्नैक्स) की आपूर्ति हेतु अनुपूरक पोषाहार का उत्पादन एवं आपूर्ति राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों द्वारा किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके लिए बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग तथा उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मध्य एम0ओ0यू0 का निष्पादन कर तद्नुसार योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। अनुमोदन के समय से अन्तर्विभागीय समिति द्वारा एस0ओ0पी0 का निर्धारण कर 04 से 06 सप्ताह के भीतर संचालन प्रारम्भ कर दिया जाएगा।

इस प्रस्ताव पर प्रतिवर्ष कुल 4190.62 करोड़ रुपये का व्यय सम्भावित है। योजना के अन्तर्गत केन्द्र एवं राज्य सरकार का अंश 50ः50 प्रतिशत है। इस प्रकार प्रतिवर्ष राज्य सरकार पर कुल 2095.31 करोड़ रुपये का व्ययभार आएगा। इस निर्णय से योजना में आच्छादित लाभार्थी वर्ग यथा 06 माह से 06 वर्ष आयु के बच्चे, गर्भवती/धात्री महिलाएं एवं 11 से 14 वर्ष आयु की स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार होगा। प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से वितरित होने वाले अनुपूरक पोषाहार का उत्पादन एवं आपूर्ति स्वयं सहायता समूहों द्वारा किये जाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। इसके फलस्वरूप महिला सशक्तिकरण एवं स्वावलम्बन को बल मिलेगा तथा स्थानीय उत्पादों की खपत भी होगी।

निर्माणाधीन जिला कारागार इटावा के निर्माण कार्याें को पूर्ण 

कराये जाने हेतु पुनरीक्षित लागत की स्वीकृति एवं नवनिर्मित कारागार 

को केन्द्रीय कारागार इटावा घोषित करने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने निर्माणाधीन जिला कारागार इटावा के निर्माण कार्याें को पूर्ण कराये जाने हेतु पुनरीक्षित लागत 27231.30 लाख रुपये की स्वीकृति एवं नवनिर्मित कारागार को केन्द्रीय कारागार इटावा घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।
जनपद मुरादाबाद के अन्तर्गत बिलारी विकास खण्ड एवं जनपद सम्भल के अन्तर्गत बनियाखेड़ा विकास खण्ड के पुनर्गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद मुरादाबाद के अन्तर्गत बिलारी विकास खण्ड एवं जनपद सम्भल के अन्तर्गत बनियाखेड़ा विकास खण्ड के पुनर्गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके अन्तर्गत, विकास खण्ड बनियाखेड़ा की 45 ग्राम पंचायतों तथा विकास खण्ड बिलारी की 28 ग्राम पंचायतों, कुल 73 ग्राम पंचायतों को सम्मिलित करते हुए जनपद सम्भल के विकास खण्ड बनियाखेड़ा का पुनर्गठन किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है। इसके अलावा, विकास खण्ड बनियाखेड़ा की 40 ग्राम पंचायतों तथा विकास खण्ड बिलारी की 53 ग्राम पंचायतों, कुल 93 ग्राम पंचायतों को सम्मिलित करते हुए जनपद मुरादाबाद के अन्तर्गत विकास खण्ड बिलारी के पुनर्गठन प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया गया है।

ज्ञातव्य है कि विकास खण्ड बनियाखेड़ा का मुख्यालय जनपद सम्भल में है, लेकिन उसके ग्राम दोनों ही जनपद मुरादाबाद एवं सम्भल में पड़ते हैं। इसी प्रकार, बिलारी विकास खण्ड का मुख्यालय जनपद मुरादाबाद में है। परन्तु इसके अन्तर्गत आने वाली ग्राम पंचायतें दोनों जनपदों में पड़ती हैं। इस कारण प्रशासनिक कठिनाइयों के साथ-साथ एवं आम जनता को असुविधा होती थी। मंत्रिपरिषद ने प्रशासनिक दृष्टिकोण एवं आमजन की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए दोनों विकास खण्डों के पुनर्गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है।
जनपद गौतमबुद्धनगर के अन्तर्गत विकास खण्ड दनकौर को समाप्त कर विकास खण्ड बिसरख, दादरी एवं जेवर के पुनर्गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद गौतमबुद्धनगर के अन्तर्गत विकास खण्ड दनकौर को समाप्त कर विकास खण्ड बिसरख, दादरी एवं जेवर के पुनर्गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि वर्तमान में विकास खण्ड बिसरख में 06 ग्राम पंचायतें, विकास खण्ड दनकौर में 12 ग्राम पंचायतें, विकास खण्ड दादरी में 48 ग्राम पंचायतें एवं विकास खण्ड जेवर में 22 ग्राम पंचायतें अवस्थित हैं। पुनर्गठन के पश्चात विकास खण्ड दादरी में 30 ग्राम पंचायतें, जेवर में 34 तथा बिसरख में 24 ग्राम पंचायतें अवस्थित होंगी। विकास खण्डों के माध्यम से जनसाधारण तक विकास कार्याें का लाभ बेहतर ढंग से पहुंचाने तथा विकास खण्डों तक आमजन की पहुंच को सहज बनाने के उद्देश्य से मंत्रिपरिषद द्वारा विकास खण्ड दनकौर की समस्त पंचायतों को विकास खण्ड जेवर में शामिल करते हुए विकास खण्ड दादरी, जेवर एवं बिसरख के पुनर्गठन प्रस्ताव का निर्णय लिया गया है।
‘उ0प्र0 भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) संशोधन 

विधेयक, 2020’ का प्रारूप स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने ‘उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम, 2019’ में संशोधन किये जाने हेतु ‘उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020’ के प्रारूप तथा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन को यथाप्रक्रिया राज्य विधानमण्डल से पारित कराये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। 

ज्ञातव्य है कि प्रदेश सरकार भूजल प्रबन्धन एवं संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है। इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश की स्थानीय आवश्यकताओं एवं भूगर्भ जल परिस्थितियों के अनुरूप ‘उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम, 2019’ प्रख्यापित किया गया था। यह अधिनियम 02 अक्टूबर, 2019 से लागू है। अधिनियम के प्राविधानों के समुचित क्रियान्वयन हेतु विभिन्न स्तरों पर समितियों के गठन की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। अधिनियम को और स्पष्ट एवं जनसुलभ बनाने के लिए मंत्रिपरिषद द्वारा कतिपय संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।

उ0प्र0 भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) नियमावली, 2020 

में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) नियमावली, 2020 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। 

ज्ञातव्य है कि प्रदेश में भूजल संसाधनों की सुरक्षा, संरक्षण, प्रबन्धन और विनियमन हेतु उ0प्र0 भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) नियमावली, 2020 अधिसूचना दिनांक 25 फरवरी, 2020 द्वारा प्रख्यापित की गयी है। 

कोविड-19 के दृष्टिगत लगाये गये लाॅकडाउन के परिणामस्वरूप इस नियमावली में उल्लिखित विभिन्न प्राविधानों की निर्धारित समय-सीमा के समाप्त होने की सम्भावना को ध्यान में रखते हुए नियमावली के नियम 6(2), 6(3), 20(1), 24(1), 24(2), 25(2), 26(2) में संशोधन किये जाने का मंत्रिपरिषद द्वारा निर्णय लिया गया। इसके अलावा, वित्त विभाग के परामर्श के दृष्टिगत उ0प्र0 भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियमन) अधिनियम, 2019 की धारा-48 के प्राविधानों के अनुसार भूगर्भ जल निधि हेतु लोक लेखा के अन्तर्गत आवंटित लेखाशीर्ष का भी अंकन करने के लिए इस नियमावली के नियम-2 के उपखण्ड-1(ग) में संशोधन किये जाने के प्रस्ताव को भी मंत्रिपरिषद द्वारा सहमति प्रदान की गयी है।

देवबन्द-रुड़की रेल लाइन परियोजना एवं डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की जनपद सहारनपुर, मेरठ एवं गौतमबुद्धनगर की विभिन्न कुल 04 भूमि को रेल मंत्रालय भारत सरकार को हस्तांतरित किये जाने के सम्बन्ध में मंत्रिपरिषद ने देवबन्द-रुड़की रेल लाइन परियोजना एवं डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर के निर्माण के लिए सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश की जनपद सहारनपुर, मेरठ एवं गौतमबुद्धनगर की विभिन्न कुल 04 भूमि को रेल मंत्रालय भारत सरकार को हस्तांतरित किये जाने के सम्बन्ध में निर्णय लिये हैं।

देवबन्द-रुड़की रेल लाइन परियोजना के निर्माण के लिए ग्राम जटौल, विकास खण्ड नागल, तहसील देवबन्द, जनपद सहारनपुर के राजकीय नलकूप संख्या-117 डी0जी0 के कुल 0.114505 हेक्टेयर भूमि के कुल मूल्य वर्तमान प्रचलित सर्किल रेट 36 लाख प्रति हेक्टेयर के चार गुना अर्थात 144 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से 16 लाख 48 हजार 872 रुपये मात्र एवं नलकूप को अन्यत्र शिफ्ट कर पुनर्निर्माण कराये जाने की लागत 29 लाख 50 हजार 400 रुपये मात्र कुल धनराशि 45 लाख 99 हजार 272 रुपये मात्र का भुगतान सिंचाई विभाग को किये जाने के उपरान्त प्रस्तावित भूमि रेल मंत्रालय को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है।

डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर के निर्माण के लिए राजकीय नलकूप संख्या-61 डी0जी0 ग्राम खटौली, विकास खण्ड नांगल, तहसील देवबन्द, जिला सहारनपुर की कुल 0.07225 हेक्टेयर भूमि जिसका कुल वर्तमान प्रचलित सर्किल रेट 36 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का कुल चार गुना अर्थात 144 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के अनुसार आगणित धनराशि 10 लाख 40 हजार 400 रुपये मात्र एवं नलकूप की प्रतिस्थापना एवं पुनःनिर्माण की लागत 23 लाख 89 हजार रुपये मात्र, इस प्रकार कुल 34 लाख 29 हजार 400 रुपये मात्र का भुगतान सिंचाई विभाग को किये जाने के उपरान्त प्रस्तावित भूमि रेल मंत्रालय को हस्तांतरित कर दी जाए।

रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट काॅरिडोर के निर्माण के लिए राजकीय नलकूप संख्या-81 एम0जी0 ग्राम धसौली, विकास खण्ड रोहटा, जनपद मेरठ की 100 वर्गमीटर भूमि, मूल्य 05 लाख 40 हजार रुपये मात्र का भुगतान भूमि प्रबन्धन समिति ग्राम धसौली को किये जाने एवं राजकीय नलकूप संख्या 81 एम0जी0 को अन्यत्र स्थापित करने के कुल 31 लाख 41 हजार 100 रुपये मात्र का भुगतान सिंचाई विभाग को किये जाने, अर्थात कुल 36 लाख 81 हजार 100 रुपये मात्र का भुगतान किये जाने के उपरान्त प्रस्तावित भूमि रेल मंत्रालय को हस्तांतरित कर दी जाए।

जनपद गौतमबुद्धनगर के ग्राम गुलिस्तानपुर में स्थित सिंचाई विभाग की कुल 0.1160 हेक्टेयर भूमि का मूल्य वर्तमान प्रचलित सर्किल रेट के दो गुना 02 करोड़ 08 लाख 80 हजार रुपये मात्र का भुगतान सिंचाई विभाग को किये जाने के उपरान्त प्रस्तावित भूमि रेल मंत्रालय को हस्तांतरित कर दी जाए।

आई0टी0आर0 कं0लि0 बरेली के कर्मचारियों व अन्य 

लम्बित देयताओं के भुगतान के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने आई0टी0आर0 कं0लि0 बरेली के कर्मचारियों व अन्य लम्बित देयताओं के भुगतान हेतु कम्पनी की गाटा संख्या-307, बंगला नं0-11 में स्थित 18920 वर्ग मीटर भूमि (4.67 एकड़) को सर्किल दर 33,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से कुल 62.436 करोड़ रुपये में कर्मचारी राज्य बीमा निगम के पक्ष में अस्पताल निर्माण हेतु विक्रय किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके लिए स्टाम्प ड्यूटी एवं अन्य व्यय क्रेता कर्मचारी राज्य बीमा निगम द्वारा वहन किया जाएगा। उक्त भूमि के विक्रय के पश्चात प्राप्त धनराशि से कम्पनी के कर्मचारियों एवं अन्य लम्बित देयताओं के भुगतान के उपरान्त उसका विवरण एवं व्यय धनराशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र शासन को उपलब्ध कराया जाएगा। प्रस्तावित भूमि के विक्रय से प्राप्त धनराशि, कम्पनी की देयताओं से अधिक प्राप्त होती है एवं कम्पनी की कोई अन्य देयता नहीं है तो शेष धनराशि राज्य कोष में जमा की जाएगी। आयुक्त, बरेली मण्डल, बरेली/प्रबन्ध निदेशक, आई0टी0आर0 कं0लि0, बरेली द्वारा प्रश्नगत भूमि के राजस्व अभिलेखों की पुष्टि के उपरान्त अग्रेतर कार्यवाही की जाएगी।

राजभवन स्टाफ क्लब के विस्तारीकरण हेतु क्लब के 

बगल में स्थित असुरक्षित आवास के-2 के ध्वस्तीकरण एवं 05 लाख 64 हजार रु0 की धनराशि को बट्टे खाते में डाले जाने के सम्बन्ध में मंत्रिपरिषद ने राजभवन स्टाफ क्लब के विस्तारीकरण हेतु क्लब के बगल में स्थित असुरक्षित आवास के-2 के ध्वस्तीकरण एवं 05 लाख 64 हजार रुपये की धनराशि को बट्टे खाते में डाले जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि यह आवास मरम्मत योग्य न रह जाने एवं अध्यासन हेतु असुरक्षित होने के दृष्टिगत तत्काल प्रभाव से निष्प्रयोज्य घोषित किया गया है।