हरदोई में खुलेआम हो रही है कालाबाजारी

खाद पर मची मारामारी, दुकानों पर हो रही कालाबाजारी

संवाददाता संतोष कुमार सिंह हरदोई

हरदोई-माधोगंज/बिलग्राम और सुरसा समेत कई सरकारी खाद विक्रय केंद्रों पर यूरिया लेने के लिए किसानों को एक हफ्ते से मारामारी का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ पर किसान एक-एक बोरी यूरिया खाद के लिए मोहताज है। जरुरत के मुताबिक यूरिया खाद की पूर्ति नहीं हो पा रही है। कड़ी मशक्कत के बाद पूरा दिन बर्बाद करके किसानों एक से दो बोरी यूरिया लेकर अपने घरों को वापस लौटना पड़ता है। जबकि इस समय धान और मक्का की फसलों के लिए खाद की बहुत आवश्यकता है। अगर फसल में इस समय खाद नहीं दी गयी तो फसल चौपट हो जायेगी। वहीं सुरसा के सघन सहकारी समिति केन्द्र पर बीते कई दिनों से यूरिया लेने के लिए किसानों को सुबह 6 बजे से ही लंबी-लंबी कतारों में लगना पड़ता है। किसानों की इन कतारों में महिलाएं और बुजुर्ग लोग भी शामिल हैं। खाद विक्रय केंद्र पर न तो शोसल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है और न ही संक्रमण से बचाव के कोई पुख्ता इंतजाम किये जा रहे हैं। यहाँ के क्षेत्रीय किसानों का आरोप है कि खाद लेने के लिए उन्हें कड़ी मशक्कत के साथ पूरा दिन कतार में लगने के बाद सिर्फ एक या दो बोरी ही यूरिया मिल पा रही है। वहीं किसानों का आरोप है कि समिति के सचिव अपने जानने वाले लोगों को जितनी जरुरत हो उतनी समय न जाया किये तुरंत यूरिया खाद उपलब्ध करा देते हैं । हालांकि सरकार और किसान कल्याण विभाग के उपसंचालक जिले में खाद की कोई कमी न होने का दावा भी कर रहे हैं। लेकिन समितियों में किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है। किसानों की माने तो उन्हें एक एकड़ जमीन के नाम पर तीन से चार बोरी यूरिया की आवश्यकता होती है। लेकिन एक एकड़ का किसान हो या दस एकड़ का किसान, यूरिया के नाम पर सिर्फ एक या दो बोरी यूरिया ही दी जा रही है।
वहीं खाद की कमी के चलते दुकानों पर जमकर कालाबाजारी की जा रही है। किसानों ने बातचीत के माध्यम से बताया कि 45 किलो की बोरी 270 रुपए में मिलने वाली यूरिया खाद दुकानों पर तो 350 और कहीं-कहीं इससे भी अधिक दामों पर बाज़ार में दुकानों पर खुलकर बेची जा रही है।
किसानों को ज्यादा खाद की जरुरत होने पर मजबूर होकर महंगे रेट में यूरिया खरीदने को मजबूर हैं। किसान दुकानों पर महँगी खाद न खरीदें तो आखिर क्या करें। सरकारी दुकान से तो खाद जरुरत के अनुरूप मिलने से रही।