कोरोना के 339 नये मामले, योगी ने कहा प्रदेश वासी सावधानी बरतें, संक्रमण नहीं हुआ खत्म

ब्यूरो रिपोर्ट समाचार भारती

 

लखनऊ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कोविड संक्रमण से बचाव और उपचार की व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से जारी रखने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का प्रभाव कम हुआ है किन्तु इसका संक्रमण अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। इसलिए संक्रमण की रोकथाम के सम्बन्ध में निर्धारित गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ‘ट्रेस, टेस्ट एण्ड ट्रीट’ की नीति कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने में उपयोगी सिद्ध हुई है।
मुख्यमंत्री जी आज वर्चुअल माध्यम से आहूत एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि पिछले 24 घण्टों में प्रदेश में कोरोना संक्रमण के 339 नये मामले प्रकाश में आए हैं। इसी अवधि में 1,116 संक्रमित व्यक्तियों का सफल उपचार करके डिस्चार्ज किया गया है। प्रदेश में वर्तमान में कोरोना संक्रमण के एक्टिव मामलों की संख्या 8,111 है। कोरोना संक्रमण की रिकवरी दर 98.2 प्रतिशत है। राज्य में पिछले 24 घण्टों में 2,57,441 कोविड टेस्ट किये गये हैं। राज्य में अब तक कुल 05 करोड़, 36 लाख, 02 हजार, 870 कोरोना टेस्ट किए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए निगरानी समितियों द्वारा लक्षणयुक्त तथा संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों को मेडिसिन किट उपलब्ध कराई जा रही है। बच्चों में वायरल बुखार आदि के उपचार के लिए मेडिसिन किट तैयार की जा रही है। इनका वितरण भी निगरानी समितियों के माध्यम से कराया जाएगा। मुख्यमंत्री जी को यह भी अवगत कराया गया कि ब्लैक फंगस के रोगियों को भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई दवाओं के अतिरिक्त, विशेषज्ञों के परामर्श के अनुसार वैकल्पिक दवा भी उपलब्ध करायी जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्रों तथा हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर के सुदृढ़ीकरण कार्य को गुणवत्तापरक ढंग से निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराया जाए। इसके लिए कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर चिकित्सकों सहित अन्य चिकित्सा कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि स्वास्थ्य केन्द्रों के सुदृढ़ीकरण का कार्य तेज गति से संचालित है। मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि ए0एल0एस0, ‘108’ व ‘102’ एम्बुलेंस सेवाएं निरन्तर सुचारु ढंग से संचालित रहें।
मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि उनके निर्देशों के क्रम में राज्य में कोविड-19 की उपचार व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। विगत दिवस प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों तथा अस्पतालों में 50 कोविड बेड की बढ़ोतरी हुई है। इसमें आइसोलेशन के 30 बेड एवं आई0सी0यू0 के 20 बेड शामिल हैं। कोविड बेड की संख्या में वृद्धि के साथ ही, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से मानव संसाधन में भी बढ़ोतरी की जा रही है। पीडियाट्रिक आई0सी0यू0 (पीकू) तथा नियोनेटल आई0सी0यू0 (नीकू) के निर्माण का कार्य भी तेजी से संचालित है। इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है।
मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि राज्य में ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता है। राज्य में संक्रमण में कमी के साथ ही, ऑक्सीजन की डिमाण्ड सामान्य स्तर पर पहुंच रही है। अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों तथा रीफिलर्स के पास पर्याप्त बैकअप के साथ ऑक्सीजन उपलब्ध है। प्रदेश में ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना की कार्यवाही तेजी से चल रही है। इनकी जनपद एवं शासन स्तर पर नियमित समीक्षा भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि उनके निर्देशानुसार आज 14 जून, 2021 से स्ट्रीट वेण्डर्स यथा, सब्जी, फल, दूध आदि विक्रेताओं, बस चालकों, कण्डक्टर्स, रिक्शा, ई-रिक्शा, थ्री व्हीलर चालकों आदि के कोरोना वैक्सीनेशन का अभियान प्रारम्भ किया गया है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य की बड़ी जनसंख्या को देखते हुए कोरोना वैक्सीनेशन के कार्य की गति को बढ़ाए जाने की जरूरत है। आगामी जुलाई माह से इसे बढ़ाकर 10 से 12 लाख डोज प्रतिदिन किया जाना चाहिए। भविष्य में भी कोविड वैक्सीनेशन कार्य व्यवस्थित, सुचारु और प्रभावी ढंग से संचालित हो, इसके लिए तैयारी पहले से ही योजनाबद्ध ढंग से कर ली जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में कोरोना वैक्सीनेशन की गति बढ़ाने के लिए पर्याप्त संख्या में वैक्सीनेशन सेंटर की स्थापना के साथ ही, वैक्सीनेटर्स का प्रशिक्षण कराया जाए। नए स्थापित किए जाने वाले वैक्सीनेशन सेंटर पर वेटिंग एरिया तथा ऑब्जरवेशन एरिया की व्यवस्था हो, जिससे कोरोना वैक्सीनेशन के लिए आने वाले लोगों को अधिक समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और लाइन लगानी पड़े। वैक्सीनेशन सेंटर पर भीड़ एकत्र न होने पाए। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीनेशन के सम्बन्ध में जन जागरूकता कार्यक्रम संचालित किये जाएं।
प्रदेश में स्वच्छता, सैनिटाइजेशन एवं फॉगिंग की कार्यवाही को लगातार व्यापक स्तर पर जारी रखे जाने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्षा काल में विभिन्न संक्रामक बीमारियों यथा, इंसेफलाइटिस, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि का प्रकोप बढ़ता है। बरसात का मौसम प्रारम्भ हो गया है। इसके दृष्टिगत संक्रामक रोगों की प्रभावी रोकथाम के लिए कार्य योजना बनाकर पूरी तैयारी कर ली जाए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्मार्ट सिटी योजना तथा अमृत योजना के अन्तर्गत विभिन्न कार्यों के सम्बन्ध में शीघ्र निर्णय लेते हुए इन योजनाओं के अन्तर्गत कार्य की गति बढ़ाई जाए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऐसे निराश्रित बच्चों, जिनके माता-पिता अथवा विधिक अभिभावक का निधन कोरोना संक्रमण के कारण हो गया है, उनके पालन पोषण व शिक्षा-दीक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ लागू की गई है। इस योजना को पूरी गम्भीरता एवं संवेदनशीलता के साथ क्रियान्वित किया जाए। बाल संरक्षण गृहों की व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए विभागीय मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारीगण इन संरक्षण गृहों का निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि एम0एस0पी0 के तहत किसानों से गेहूं क्रय का कार्य 15 जून, 2021 के बाद भी जारी रखा जाए। किसानों से क्रय किए गए गेहूं को बारिश में भीगने से बचाने के लिए सुरक्षित भण्डारण की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। इस सम्बन्ध में कोई भी शिथिलता नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी को को अवगत कराया गया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के अन्तर्गत इस वर्ष गेहूं की रिकार्ड खरीद की गई है। अब तक 11 लाख 83 हजार से अधिक किसानों से 52 लाख 66 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की खरीद की गई है। गेहूं मूल्य के रूप में किसानों को अब तक 8,510 करोड़ रुपए से अधिक की धनराशि का भुगतान किया गया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत खाद्यान्न वितरण का कार्य ई-पॉस मशीनों के माध्यम से व्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराया जा रहा है। अब तक 3.2 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरण किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गो-आश्रय स्थलों को सुचारू एवं व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाए। सभी जनपदों में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को जिम्मेदार बनाकर इनकी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। गो-आश्रय स्थलों पर चारे, पेयजल, साफ-सफाई आदि की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खुले बोरवेल से मनुष्यों और पशुओं दोनों का जीवन संकट में पड़ जाता है। इसलिए अभियान चलाकर खुले बोरवेल को बन्द कराया जाए अथवा उन पर ढक्कन रखवाया जाए।