गोकशी से तो बची गाय, पर गोशालाओं में क्यों दम तोड़ रही हैं व्यवस्थाएँ?

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अमेठी-

जिले को घुमंतू पशुओं से मुक्त बनाने के लिए सरकार ने लाखों रुपये पानी की तरह बहा दिए मगर आज भी जिला घुमंतू पशुओं से मुक्त नहीं हो पाया है वहीं दूसरी ओर इन घूमन्तू पशुओं के लिए जिले के मुसाफिरखाना विकासखण्ड के नेवादा गाँव में बनाया गया वृहद गो संरक्षण केंद्र भी अब राम भरोसे ही चल रहा है.1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बनाया गया वृहद गो संरक्षण केंद्र धीरे धीरे अब कर्मी विहीन होने के कगार पर पहुँच रहा है जानकारी के मुताबिक गो संरक्षण केंद्र में काम कर रहे कर्मी भी तनख्वाह नहीं मिलने के कारण छोड़ रहे है।

नेवादा के ग्राम प्रधान घनश्याम पाण्डेय ने बताया कि 22 जून 2019 को गाँव मे वृहद गौ संरक्षण केंद्र का निर्माण हुआ था जिसमें वर्तमान में 207 गौवंश है इन गौवंशो की सेवा के लिए कुल 13 गो सेवक रखे गए थे जिसमें तनख्याह न मिलने से दो गोसेवक विश्राम पासी और दूधनाथ छोड़ गये और अब यहां 13 में से केवल 11 कर्मी ही बचे हैं,अब कई कर्मी नवम्बर माह के अंत तक गोशाला छोड़ने की बात भी कह रहे है

ग्राम प्रधान ने बताया कि कर्मियों की कमी के कारण गोवंशो की सेवा साफ सफाई आदि में असुविधा उत्पन हो रही है वही नन्दकुमार सभाराज आदि कर्मियों का कहना था कि वे सिर्फ ग्राम प्रधान के आश्वासन पर गोशाला में कार्य कर रहे हैं कर्मियों ने बताया कि बिगत में जिलाधिकारी अमेठी के गौशाला निरीक्षण के दौरान हम लोगों ने अपनी समस्याए रखी थी और डीएम के द्वारा समस्या हल होने का आश्वाशन भी दिया गया है लेकिन तनख्वाह की समस्या के हल न होने पर हम लोग भी यहाँ से चले जायेंगे ।

गोकशी रोकने के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गोवध पर सख्ती की और शराब से लेकर टोल तक अलग-अलग सेस लगा कर गोवंश के संरक्षण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं हैरानी इस बात को लेकर है कि सीएम योगी अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर जितने गम्भीर हैं, उतने ही बेपरवाह स्थानीय ज़िम्मेदार लिहाजा गोवंश कटने से तो बच जा रहे हैं लेकिन इन्हें संरक्षित करने के लिए बनाये गये गो-शालाओं में व्यवस्थाएँ दम तोड़ रही है.

वही जब इस मामले को लेकर डीएम अमेठी अरुण कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि नेवादा गौसंरक्षण केंद्र में पेमेंट्स को लेकर एक दो समस्याएं है जल्द ही बैठक कर समस्या का निस्तारण किया जाएगा.

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