बुंदेलखंड में कृत्रिम बारिश करवाने की योजना चढ़ी लापरवाही की भेंट..

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ब्यूरो रिपोर्ट समाचार भारती-

लखनऊ- उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृत्रिम बारिश कराये जाने की योजना सरकारी अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। बताया जाता है कि सिंचाई विभाग और आईआईटी कानपुर को यूपी के सीएम को कृत्रिम बारिश का प्रोजेक्ट दिखाना था, लेकिन सिंचाई विभाग की उदासीनता के चलते अभी तक इस प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं मिल सकी है।

5 जुलाई को यूपी के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने दावा किया था कि तमिलनाड़ु, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बाद उत्तर प्रदेश में भी सूखा प्रभावित क्षेत्रों में कृत्रिम बारिश कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बड़ी समस्या का समाधान आईआईटी कानपुर ने किया है। अधिकारियों का दावा है कि 5. 5 करोड़ रुपये में 1 हजार वर्ग किमी क्षेत्र में कृत्रिम बारिश कराई जा सकेगी। साथ ही इसकी शुरुआत बुंदेलखंड से की जाएगी।

बुंदेलखंड में कृत्रिम बारिश करवाने की योजना विभाग के मंत्री और जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई। दरअसल, सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ को इस प्रोजेक्ट पर अंतिम सहमति देनी थी, लेकिन सिंचाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री दफ्तर भेजकर भूल गए। सिंचाई विभाग के काबिल अफसरों को रोज 18 घंटों तक काम करने वाले मुख्यमंत्री को अब तक आधे घंटे का प्रेजेंटेशन देने की भी फुरसत नहीं मिली।

लिहाजा किसानों के लिए वारदान साबित होने वाला ये प्रोजेक्ट लापरवाह अफसरों की अनदेखी का शिकार हो गया। बुंदेलखंड में कित्रिम बारिश का प्रोजेक्ट को सिंचाई मंत्री सिंचाई विभाग और आईआईटी कानपुर ने मिलकर बनाया था। इतना ही नहीं कार्यक्रमों में खुद सिंचाई मंत्री इस प्रोजेक्ट के कसीदे पढ़ते नजर आते थे। सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने भी कई मौके पर इस प्रोजेक्ट का खूब बखान किया था। लापरवाही के चलते ठंडे बस्ते में चली गई ये योजना।

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