अब इनकम टैक्स विभाग को साझेदारी फर्म व कंपनियों से संबंध और निवेश भी बताना होगा

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नई दिल्ली। काले धन पर मोदी सरकार जिस तरह लगातार वार कर रही है उससे ऐसा लगता है कि वह देश में से न केवल काले धन को कम करना चाहती है बल्कि उस स्रोत को भी घेरना चाहती है जिसका रास्ता भ्रष्टाचार के घर में से निकलता है। मोदी सरकार अपने पहले शासन काल में यह समझ चुकी थी कि जितना काला धन व्यापारियों के पास है उससे कहीं अधिक भ्रष्‍ट राजनेताओं, सरकारी व निजी अफसरशाही और इनसे जुड़े दलालों के पास है और इन लोगो ने यह काला धन मुख्यत रियल एस्टेट सेक्टर, ऑटोमोबाइल्स और महँगी वस्तुओं आदि में लगाया है जैसे कृषि योग्य भूमि, मंहगे मकान, जमीनें, फ्लैट, दुकान या बड़े-बड़े फार्म हाउस या बेहद मंहगी कारें, विदेशी यात्राएं, सोने के बिस्कुट, हीरे जड़े आभूषण व विलासिता के बड़े खर्चे आदि में भी बड़ी मात्रा में काले धन का इस्तेमाल किया हुआ है जिसको पकड़ने के लिए मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के इनकम टैक्स रिटर्न के फॉर्म में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है।

इसके अंतर्गत अब आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले सभी व्यक्तियों को मुख्यत: नई 4 बातें और बतानी होगी –
  1. . प्रथम महत्वपूर्ण बात यह है कि अब हर व्यक्तिगत करदाता को अपनी इनकम टैक्स रिटर्न में यह बताना होगा कि उसके पास किस-किस अन लिस्टेड कंपनी के कितने शेयर हैं | साथ ही उसको यह भी बताना होगा कि यह शेयर उसने गत वर्ष के दौरान कब और कितने में खरीदे थे। यदि शेयर उसके पहले से ही उसके पास है तो उनकी संख्या भी इस साल में ओपनिंग बैलेंस की तरह बतानी होगी, यानि अगर आप बैलेंस शीट बनाते है तो उसमें ओपनिंग इन्वेस्टमेंट भी दिखानी चाहिए।
  2. . करदाता व्यक्ति कितनी कंपनियों में डायरेक्टर के पद पर है और उनके नाम क्या हैं।
  3. . करदाता को अपनी सभी पार्टनरशिप फर्म और LLP के बारे में बताना होगा जिसमें वह साझीदार है और ऐसे सभी फर्मों का परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) भी देना होगा।
  4. . अब कर निर्धारण के लिए अपनी वास्तविक आवासीय स्थिति की पूरी जानकारी देनी होगी। आपको गत वर्ष में और उससे पूर्व के चार वर्षों में देश से बाहर रहने के दिन बताने होंगे और साथ ही इस दौरान आप जिस देश में रह रहे थे उस देश का टैक्स पे आइडेंटिफिकेशन नंबर भी बताना होगा। कर बचाने के लिए अपनी झूठी आवासीय स्थिति को दर्शाने वाले, विदेशों में हुई इनकम पर टैक्स छुपाने वाले और अनिवासियों की देसी आय पर टैक्स वसूलने के लिए रिटर्न में यह महत्वपूर्ण बदलाव किया है। दरअसल काले धन के द्वारा संपत्तियों की खरीद फरोख्त को लोगों ने स्वयं अपने नाम न करके कंपनियां बनाकर उनमें खरीदा गया और इन कंपनियों के शेयर अपने नौकरों, परिचितों, रिश्तेदारों, और सहयोगियों आदि को दिखावटी तौर पर दे दिए गए। उन्हीं परिचितों को कंपनी का डायरेक्टर भी बना दिया गया और इस तरह क़ानूनी तौर पर यह लोग इन संपत्तियों के मालिक बन गए जबकि असल मालिकाना हक वस्तुत: काला धन के मालिकाना के पास ही था। इसी प्रकार ऐसी ही संपत्तियाें को पार्टनरशिप फर्म बनाकर उसमें खरीदा गया जिसके साझेदार उपरोक्त व्यक्ति बना दिये गए। अब तक देश के किसी भी कानून में ऐसी व्यवस्था नहीं थी कि किसी व्यक्ति को यह बताना पड़े कि उसके पास किस कंपनी के कितने शेयर है और वह कितनी फर्मों में सांझीदार है और उसका फर्म में कितने प्रतिशत हिस्सा है। लोगों ने इसका भरपूर लाभ उठाया और बेधड़क काले धन को ऐसी कंपनियों और फर्मों में डालकर सफ़ेद करते रहे।
कंपनी की बैलेंस शीट में 10% से अधिक शेयर धारकों के नाम डिस्क्लोज किए जाते हैं 

इनकम टैक्स रिटर्न में इस बदलाव से आयकर विभाग को पता चल जाएगा कि करदाता किस-किस कंपनी में डायरेक्टर है और किस कंपनी में कितनी शेयरधारिता है। साथ ही यह भी पता चल जायेगा कि वह कितनी फर्मों में पार्टनर बना हुआ है। जैसा कि हम जानते हैं कि कंपनी की बैलेंस शीट में 10% से अधिक शेयर धारकों के नाम डिस्क्लोज किए जाते हैं और अब नए BEN 1& 2 फॉर्म के तहत हर कंपनी को अपनी बेनिफिशियल शेयर होल्डिंग भी ROC में बतानी थी और अब नए इनकम टैक्स फॉर्म द्वारा डिपार्टमेंट के पास सभी व्यक्तियों की शेयर होल्डिंग का डाटा भी उपलब्ध है। अब ROC और इनकम टैक्स के सारे डाटा का मिलान एक ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर द्वारा किया जाएगा और बेमेल मामलों की छानबीन करने पर बेनामी और नकली शेयर होल्डिंग पकड़ी जाएगी और संबंधित कंपनी और शेयरधारकों को नोटिस भेजकर उनसे जानकारी ली जाएगी। इसके अतिरिक्त जिसके पास ऐसे फर्मों और कंपनियों की लीगल या बेनामी हिस्सेदारी या शेयरधारिता पाई जाएगी उसको नोटिस भेज कर इस धन के निवेश का स्रोत पूछा जायेगा और समुचित जवाब न मिलने पर उन पर भी कार्यवाईकी जाएगी। जिन कंपनियों और फर्मों में भारी मात्रा में काले धन का निवेश किया हुआ है उनसे काले धन के स्वामियों का सम्बन्ध ढूंढा जाएगा जिसका परिणाम यह होगा कि सभी कर चोर जांच के दायरे में सीधे-सीधे आ जाएंगे। यह भी संभव है कि इनकम टैक्स विभाग ऐसे लोगों की संपत्तियों के शेयर की कीमत और उनमें निहित सम्पतियों का बाजार मूल्य से मिलान कर के देख सकता है कि कहीं इसमें काला धन तो नहीं छुपा रखा।

अनजाने में की गई गलत फाइलिंग करदाता को भारी मुसीबत में डाल देगी

इनकम टैक्स / GST की चोरी के लिए, नकली माल को बेचने के लिए या भांति-भांति के अन्य गलत व्यापारिक काम करने के लिए जो बेईमान लोग फर्म या कंपनी का चेहरा ओढ़ लेते थे और GST/ इनकम टैक्स की रिटर्न फाइल नहीं करने वाले लोगों को जब ऐसी सभी पार्टनरशिप फर्मों और कंपनियों की जानकारी करदाता द्वारा आयकर विभाग को अब इस बदलाव की वजह से देनी पड़ेगी।

करदाताओं को सुझाव है कि अपनी इनकम टैक्स रिटर्न अत्यंत सावधानीपूर्वक भरे और कोई भी उलझन होने पर अपने कर सलाहकार से संपर्क करें। अनजाने में की गई गलत फाइलिंग करदाता को भारी मुसीबत में डाल देगी जिसमे धन और समय दोनों की बर्बादी होगी। – मनीष कुमार गुप्ता, सीए एवं टैक्स एक्सपर्ट

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