मोदी सरकार की नाकामियों को क्यों भूना नहीं पा रही कांग्रेस, मीटिंग में उठे सवाल

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी में राज्यसभा सांसदों की गुरुवार को बैठक हुई. लेकिन इस बैठक में कुछ वरिष्ठ नेताओं और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबियों के बीच तनाव की स्थिति देखने को मिली. सूत्रों ने बताया कि पार्टी के कुछ सीनियर नेता इस बात से नाराज थे कि तमाम मोर्चों, मसलन कोरोना और चीन के साथ सीमा विवाद जैसे मसलों पर मोदी सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रही है, लेकिन कांग्रेस पार्टी लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाई. सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि सांसदों के एक तबके ने एक बार फिर राहुल गांधी को पार्टी अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग उठाई.

असल में, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल मीटिंग में राज्यसभा के 34 सांसदों ने हिस्सा लिया. इस बैठक को वर्तमान राजनीतिक मुद्दों पर विचार-विमर्श और उस पर आगे की रणनीति तैयार करने के लिए बुलाया गया था. लेकिन जैसे ही पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने पार्टी के भीतर समन्वय की कमी का मुद्दा उठाया और कहा कि पार्टी को कुछ आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, यह बैठक कड़वाहट में बदल गई. यह सवाल एक नवनिर्वाचित सांसद से उठाया और 2014 के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन को लेकर यूपीए 2 सरकार का हिस्सा रहे वरिष्ठ नेताओं से सवाल किया. इस बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह भी उपस्थित थे.

एक और वरिष्ठ सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कई मोर्चों पर मोदी सरकार नाकाम है, लेकिन पार्टी लोकप्रियता हासिल करने में सक्षम नहीं है. पार्टी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने इसका काउंटर किया. उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के संकट और ईंधन की कीमतों में वृद्धि को लेकर पार्टी के किए गए कामों को गिनाया. केसी वेणुगोपाल ने चीन के मुद्दे पर पार्टी की तरफ से शुरू किए गए ऑनलाइन कैंपेन की सफलता के बारे में भी बताया. लेकिन बिहार के एक सांसद ने इन अभियानों की सफलता पर सवाल उठाया और कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में पार्टी का संगठन कमजोर था.

जमीन पर उतरने की जरूरत

पंजाब के एक सांसद ने कोरोना संकट के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से अध्यादेश पारित किए जाने के मसले को उठाया. सांसद का आरोप था कि कई अध्यादेश किसान विरोधी हैं. उन्होंने कहा कि इसके लिए जमीन पर लड़ाई लड़े जाने की जरूरत है. ऐसे मामलों में डिजिटल कैंपेन ज्यादा अपील नहीं करते हैं. पंजाब के एक अन्य सांसद ने पैरा ट्रूपिंग संस्कृति का मसला उठाया. उनका कहना था कि शीर्ष नेताओं को थोपने का जमीनी कार्यकर्ताओं में गलत संकेत जाता है.

राहुल को फिर कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग

वहीं असम के सांसद रिपुन बोरा ने मांग की कि राहुल गांधी को एक बार फिर पार्टी अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. इस मांग का मध्य प्रदेश के एक वरिष्ठ सांसद के साथ-साथ कई अन्य सांसदों ने भी समर्थन किया. हालांकि सोनिया गांधी ने इस मांग पर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की. इस महीने की शुरुआत में पार्टी के लोकसभा सांसदों की हुई बैठक में इसी तरह की मांग उठाई गई थी.