मध्यप्रदेश : दो महीने में एक दर्जन भ्रष्टों को पहुंचाया सलाखों के पीछे

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इंदौर. लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारियों पर ऐसा शिकंजा कसा कि कोई बच नहीं पाए। दो महीने में ही करीब एक दर्जन भ्रष्टों को सजा दिलवाई जा चुकी है। इनमें से कई मामले तो दो से तीन साल पुराने वाले भी थे।
इंदौर के कुछ बड़े भ्रष्टचारियों को भी जेल जाना पड़ा। सजा भी छोटी-मोटी नहीं, बल्कि तीन से सात साल तक की हुईं हैं। भ्रष्टाचारियों पर लगाम कसने के लिए धरपकड़ के अलावा लोकायुक्त पुलिस की इस कार्रवाई के बाद फटाफट चालान पेश करने और फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलने के कारण भ्रष्टों को सजा भी जल्दी-जल्दी होने लगी है। कई बड़े मामलों में तो अधिकारियों ने चालान पेश करने से रोकने के लिए अनेक जुगत भी लगाई, लेकिन दाल नहीं गली।

बचना मुमकिन ही नहीं

बल बढऩे के बाद चालान पेश करने की दिशा मेंं लोकायुक्त पुलिस काफी तेजी से काम कर रही है और उसी तेजी से आरोपियों को सजा भी हो रही है। लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी ने बताया कि रिश्वत के मामलों में पकड़े जाने के बाद सजा से कोई बच नहीं सकता। लोकायुक्त पुलिस केस ही इतना पुख्ता बनाती है कि उसके बचाव की गुंजाइश नहीं रहती।

केस-1
मनोज मिश्रा, निलंबित सहायक जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल इंदौर
भारत वर्मा, निलंबित जेल प्रहरी, उप-जेल देपालपुर

हत्या के प्रयास के मामले में जेल में बंद एक कैदी से उसके पिता की मुलाकात करवाने के लिए तीन हजार रुपए की रिश्वत मांगी। नवंबर, 2014 में रिश्वत लेते पकड़े गए। लोकायुक्त पुलिस ने दिसंबर, 2015 में चालान लगाया था। इसमें संदेह का लाभ देते हुए मिश्रा को बरी कर दिया गया, लेकिन वर्मा को तीन साल की सजा मिली।

केस-2
बाबूलाल पटेल, निलंबित सहायक लाइनमैन, कल्याखेड़ी सांवेर
धरमपुरी में तैनाती के दौरान किसान के खेत में बिजली का पोल लगवाने के एवज में 10 हजार रुपए रिश्वत मांगी। जून, 2016 में छह हजार रुपए लेते हुए पकड़ा गया। लोकायुक्त ने सितंबर, 2016 में चालान लगा दिया। विशेष न्यायालय ने तीन साल की सजा सुनाई।

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