सीडब्ल्यूसी की बैठक 10 अगस्त को, राहुल के इस्तीफे के 75 दिन बाद अध्यक्ष पर फैसला संभव

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नई दिल्ली। कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की अगली बैठक 10 अगस्त को होगी। पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर जानकारी दी। लोकसभा चुनाव में हार के बाद राहुल ने वर्किंग कमेटी की बैठक में 25 मई को अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने पार्टी में किसी गैर-गांधी को अध्यक्ष बनाए जाने का सुझाव दिया था। इस बैठक के करीब 75 दिन बाद होने वालीसीडब्ल्यूसी की अगली बैठक में पार्टी अध्यक्ष पद निर्णय लियासकताहै।

कुछ दिन पहले शशि थरूर ने कहा था कि प्रियंका का नाम अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों में रहेगा या नहीं, इसका फैसला गांधी परिवार ही करेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले पर प्रियंका ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने एक बैठक में कहा कि मेरा नाम अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों में ना गिना जाए।

कर्ण सिंह ने कहा-प्रियंका कैडर में जोश भर सकती हैं
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह ने कहा कि अगर प्रियंका पार्टी अध्यक्ष बनती हैं तो वे कैडर में अधिक जोश भर सकती हैं क्योंकि उनमें लोगों को एकजुट करने की ताकत है। उन्होंने कहा, “वह बहुत तेज युवा महिला हैं। उन्होंने सोनभद्र में पीड़िता से मिलने के मामले पर बहुत बढ़िया काम किया था। वह अच्छा बोलती हैं और खुद को बेहतर तरीके से पेश कर पाती हैं। अगर प्रियंका की इच्छा है तो उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालना चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह सच है कि नेतृत्व तय करने में देरी से पार्टी को नुकसान हुआ और ज्यादा विलंब से नुकसान बढ़ेगा।

कर्नाटक मामले की वजह से अध्यक्ष पद पर फैसले में देरी हुई

पिछले हफ्ते बुधवार को संसद सत्र के दौरान सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई थी, लेकिन उसमें अध्यक्ष पद पर कोई चर्चा नहीं हुई। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, संसद सत्र से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे पर दो बार वॉर रूम में बैठक की, लेकिन उसमें केवल कर्नाटक के मुद्दे पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि कर्नाटक का मामला खत्म होने के बाद अब वरिष्ठ नेता अध्यक्ष पद पर स्थिति स्पष्ट करेंगे।

अध्यक्ष चुनने का अधिकार सीडब्ल्यूसी के पास

कांग्रेस के संविधान के मुताबिक, अध्यक्ष के उत्तराधिकारी को चुनने का अधिकार सीडब्ल्यूसी के पास है, लेकिन अभी वरिष्ठ नेताओं को इसकी घोषणा करनी है। माना जा रहा है कि सीडब्ल्यूसी अब तक कर्नाटक का मसला सुलझने का इंतजार कर रही थी। वेणुगोपाल ने कर्नाटक की गठबंधन सरकार को बचाने के लिए बेंगलुरु में ही डेरा डाल रखा था, लेकिन वहां सरकार नहीं बच सकी। पार्टी सूत्रों की मानें तो सीडब्ल्यूसी की अगली बैठक में अध्यक्ष पद पर फैसला आ सकता है।

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