शीतकालीन सत्र में इस बार नागरिकता संशोधन बिल लाने की तैयारी में मोदी सरकार

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संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू हो रहा है. इस सत्र में सरकार कई अहम बिल पेश करेगी, जिसमें नागरिकता संशोधन बिल भी होगा. इस बिल का काफी विरोध होता रहा है. इस विधेयक के कानून बनने के बाद, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के मानने वाले अल्पसंख्यक समुदायों को 12 साल की बजाय महज छह साल भारत में गुजारने और बिना उचित दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता मिल सकेगी. पूर्वोत्तर के लोगों का विरोध है कि यदि यह बिल पास होता है तो इससे राज्यों की सांस्कृतिक, भाषाई और पारंपरिक विरासत के साथ खिलवाड़ होगा.

क्या है नागरिकता संशोधन बिल

नागरिकता संशोधन बिल हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी व ईसाइयों को जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश से बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत आए हैं, या जिनके वैध दस्तावेजों की समय सीमा हाल के सालों में खत्म हो गई है, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाता है. यह बिल बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के छह गैर मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकता हासिल करने में आ रही बाधाओं को दूर करने का प्रावधान करता है.

प्रस्तावित विधेयकों का ब्योरा

इस बिल के खिलाफ काफी विरोध प्रदर्शन हुए हैं. संसद के पिछले सत्र में विपक्षी पार्टियों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था. उत्तर-पूर्व के कई राज्य इस विधेयक के विरोध में हैं. इसे देखते हुए सरकार ने इसमें संशोधन का वादा किया है. शीत सत्र में संसद पटल पर इसे रखा जाएगा और सरकार इसे आसानी से पास करा लेने की उम्मीद में है.

नागरिकता बिल का विरोध

नागरिकता (संशोधन) बिल को जनवरी 2019 में लोकसभा में पास कर दिया गया था लेकिन राज्यसभा में यह पास नहीं हो सका था. इसके बाद लोकसभा भंग होने के साथ ही यह बिल रद्द हो गया. अब एक बार फिर मोदी सरकार इस बिल को ला रही है लेकिन जिस तरह विपक्षी दल इस बिल पर सवाल उठाते रहे हैं और पूर्वोत्तर के राज्यों में इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है, ऐसे में मोदी सरकार के सामने इस बिल को दोबारा दोनों सदनों से पास कराना चुनौतीपूर्ण होगा.

सरकार का आश्वासन

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पूर्वोत्तर के मूल निवासियों से कह चुके हैं कि वे प्रस्तावित नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर चिंतित न हों, क्योंकि इससे उनके अधिकार प्रभावित नहीं होंगे. उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के तीन मुख्यमंत्रियों ने नागरिकता संशोधन विधेयक मुद्दे को उठाया है और आशंका जाहिर की है कि प्रस्तावित कानून मूल लोगों के अधिकारों को कम कर सकता है. शाह ने कहा, नागरिकता संशोधन विधेयक के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है. यह उनके अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगा. विधेयक में बांग्लादेश सहित पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान है. 

ऐसा ही आश्वासन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दोहरा चुके हैं. उन्होंने कहा है कि केंद्र यह सुनश्चित करने के लिए इसमें कुछ बदलाव करेगा कि इससे कोई प्रभावित न हो.

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