कोरोना वायरसः मोदी सरकार ने ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं से वेंटिलेटर बनाने को कहा गया

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नई दिल्ली। (मनीष गुप्ता)। केंद्र सरकार कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं से अपनी फैक्टरियों में वेंटिलेटर का उत्पादन करने के लिए कहा है। सरकार ने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अगले हफ्ते से प्रति दिन 20,000 एन-95 मास्क बनाना शुरू कर देगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, देश के विभिन्न अस्पतालों में कोविड-19 के रोगियों के लिए 14,000 से अधिक मौजूदा वेंटिलेटर अलग रखे गए हैं, जबकि भंडार में 11.5 लाख एन-95 मास्क हैं। 

मंत्रालय ने कहा कि पिछले दो दिनों के दौरान पांच लाख मास्क वितरित किए गए और सोमवार को 1.40 लाख मास्क बांटे जाएंगे। मंत्रालय ने बताया कि 3.34 लाख निजी सुरक्षा उपकरण (पीपीई) वाले रक्षात्मक सूट देश के अस्पतालों में उपलब्ध हैं और चार अप्रैल तक तीन लाख ऐसे रक्षात्मक सूट विदेश से आ जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘ऑटोमोबाइल विनिर्माताओं से वेंटिलेटर बनाने को कहा गया और वे इस दिशा में काम कर रहे हैं।’’ 

इसी के साथ मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटिड (बीईएल) को स्थानीय विनिर्माताओं के साथ मिलकर अगले दो महीने में 30,000 वेंटिलेटर बनाने के लिए कहा है। मंत्रालय ने एक अन्य ट्वीट में बताया कि मंत्रालय ने नोएडा की निजी क्षेत्र की ‘एगवा हेल्थकेयर’ को एक महीने के अंदर 10,000 वेंटिलेटर बनाने का ऑर्डर दिया है। उनकी आपूर्ति अप्रैल के दूसरे हफ्ते से शुरू होने की उम्मीद है। 

इसमें कहा गया कि इस बीच हेमिल्टन, माइंड्रे और ड्रेगर जैसी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को वेंटिलेटर की आपूर्ति के लिए ऑर्डर दिये गए हैं। एक बयान में कहा गया कि विदेश मंत्रालय चीन के आपूर्तिकर्ताओं से भी 10 हजार वेंटिलेटर लेने के लिये संपर्क कर रहा है। कोविड-19 के मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत होती है क्योंकि उन्हें सांस संबंधी गंभीर परेशानी होती है। 

इसने कहा कि दो घरेलू निर्माता प्रतिदिन 50,000 एन-95 मास्क का उत्पादन कर रहे हैं। इनके अगले सप्ताह के भीतर यह उत्पादन एक लाख प्रति दिन तक जाने की उम्मीद है। स्थानीय निर्माताओं के साथ मिलकर डीआरडीओ ऐसे करीब 20 हजार मास्क रोजाना बनाएगा। बयान में कहा गया कि इनके एक हफ्ते में उपलब्ध होने की उम्मीद है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि पीपीई रक्षात्मक सूट के 11 घरेलू उत्पादक अब तक मापदंडों पर खरे उतरे हैं और उन्हें 21 लाख ऐसे सूट बनाने के लिए ऑर्डर दिए गए हैं। वे प्रति दिन 6-7 हजार सूट की आपूर्ति (सप्लाई) दे रहे हैं और उम्मीद है कि अप्रैल मध्य तक यह 15,000 सूट प्रतिदिन पहुंच जाएगा। 

इसने आगे कहा कि रेड क्रॉस ने 10,000 पीपीई रक्षात्मक सूट दान दिए हैं। ये प्राप्त हो गए हैं तथा सोमवार को वितरित किए जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, “व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किट चिकित्साकर्मियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जो वो पृथक क्षेत्रों गहन चिकित्सा ईकाई में खुद को संक्रमण से बचाने के लिये पहनते हैं। देश में इनका निर्माण नहीं हो रहा था।” मंत्रालय ने कहा, “फिलहाल कोविड-19 के 20 से भी कम मरीज वेंटिलेटर पर हैं। अभी देश भर के विभिन्न अस्पतालों में ऐसे मरीजों के लिये 14 हजार वेंटिलेटर निर्धारित करके रखे गए हैं।” 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हमारे सामने पहली चुनौती वेंटिलेटरों की संख्या बढ़ाने की है…हमें तैयार रहना होगा और ऐसे लोग भी चाहिए होंगे जो इन मशीनों को चला सकें।” उन्होंने कहा कि एम्स के डॉक्टरों द्वारा कोविड-19 के मरीजों के लिये वेंटिलेटर प्रबंधन के संदर्भ में जिला स्तर पर कई डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। 

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक पीपीई के विदेशी स्रोत भी दुनिया भर में उनकी भारी मांग का सामना कर रहे हैं और उनसे विदेश मंत्रालय के जरिये संपर्क किया जा रहा है। मंत्रालय ने ट्विटर पर बताया कि विदेश मंत्रालय के जरिए 10 लाख पीपीई किट का ऑर्डर सिंगापुर की एक कंपनी को दिया गया है और उनकी आपूर्ति जल्द होने की उम्मीद है। 

इसने यह भी बताया कि एक और घरेलू निर्माता सोमवार को मापदंडों पर खरा उतरा है और उसे पांच लाख पीपीई रक्षात्मक सूट का ऑर्डर दिया जा रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, देश में कोविड-19 के संक्रमण के मामलों की संख्या 1071 पहुंच गई है, जबकि मृतकों की संख्या 29 पहुंच गई है। 

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