देश में लंबे समय तक बनी रहने वाली है मंदी की समस्या, राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक सकती है सरकार

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नई दिल्ली। देश में  मंदी का दौर चल रहा है। जिसे लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे है। सरकार भी सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था की स्थिति पर नियंत्रण पाने की जद्दोजहद में लगी है। लेकिन अर्थव्यवस्था की इस हालत पर लगातार ऐसी खबरें आ रही है कि मंदी और देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चल रहे हालात जल्द सही नही होने वाले है बल्कि देश में ये मंदी का दौर लंबे समय तक रहने वाला है। दरअसल खबरो की माने तो मंदी के दौर में सरकार मौजूदा वित्त वर्ष में अपने राजकोषीय घाटे को काबू में रखने के लक्ष्य से चूक सकते है। ये देश के लिए बुरी खबर है।

गौरतलब है कि सलाहकारों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक अर्थव्यवस्था में आई नरमी की वजह से कर संग्रह में बड़ी गिरावट आई है। आरबीआई से सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपये मिलने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा के तय लक्ष्य के पूरा होने की संभावना नहीं है। अप्रैल से जून की तिमाही में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर पांच फीसदी हो गई है। यह छह साल में जीडीपी की सबसे कम वृद्धि दर है। सूत्रों के मुताबिक सरकार 2019 के अंत तक राजकोषीय घाटा के लक्ष्य को जीडीपी का 3.3 फीसदी से बढ़ाकर 3.5 कर सकती है।

आपको बता दें कि आर्थिक मंदी की वजह से सरकार की आमदनी में कमी आई है जिससे इस साल राजकोषीय घाटा के लक्ष्य को पूरा करना संभव नहीं है। कुछ अर्थशास्त्रियों ने चालू वित्त वर्ष 2019-20 में जीडीपी विकास दर का पिछले वित्त वर्ष की तुलना में एक फीसदी कम यानी 5.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। अधिकारियों के मुताबिक कर संग्रह में एक लाख करोड़ रुपये तक की गिरावट हो सकती है। यह इस साल के लक्ष्य 34,400 करोड़ का चार फीसदी है. जीएसटी और आयकर दोनों तरह के कर संग्रह में भारी गिरावट का ट्रेंड दिख रहा है।

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