अगले पांच साल में बदल जाएगा दिल्ली का ‘इतिहास’, संसद और राष्ट्रपति भवन से लेकर होगा सब कुछ नया

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नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी सरकार नई दिल्ली के ऐतिहासिक राजपथ के इलाके को दोबारा विकसित करने जा रही है। एडविन लुटियंस ने राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट तक को डिजायन किया था। अब चार स्कवॉयर किलोमीटर के दायरे वाले इस क्षेत्र में मौजूद इमारतों को लेकर नया प्लान तैयार किया जा रहा है। इस योजना के तहत मोदी सरकार के सभी मंत्रालय एक ही छत के नीचे दिखेंगे। खास बात यह होगी कि सभी मंत्रालय प्रधानमंत्री कार्यालय से लाइव जुड़े रहेंगे। दरअसल सरकार राजपथ, संसद भवन और सचिवालय को नए तरीके से बनाने जा रही है। सेंट्रल विस्टा के मास्टर प्लान में नए भारत के मूल्य और आकांक्षाओं की झलक दिखेगी।

फिर से बनेंगे नए बनेंगे संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने फिक्की के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को कहा कि संसद भवन और सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास की सरकार की मेगा योजना और विभिन्न मंत्रालयों के लिए एक समग्र परिसर का निर्माण कार्य अगले साल शुरू हो सकता है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर मंत्री की यह पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि अगले कुछ सालों में दिल्ली दुनिया की सबसे बेहतरीन राजधानी बन जाए और इस योजना पर काम शुरु कर दिया गया है। इस योजना के तहत संसद भवन, सेंट्रल विस्टा, राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक का भी पुनर्विकास किया जाएगा।
एक मंत्रालय से दूसरे मंत्रालय पैदल जा सकेंगे
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत नई बिल्डिंग को इस तरह बनाया जाएगा कि कर्मचारी पैदल चलकर ही एक दूसरे मंत्रालय में जा सकेंगे। रेल भवन, शास्त्री भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन, वायुसेना भवन, आर्मी मुख्यालय, नीति आयोग, चुनाव आयोग और कृषि भवन आदि मंत्रालयों की बिल्डिंगों को मिलाकर एक भव्य परिसर बनाया जाएगा। राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किमी के दायरे में मौजूद सेंट्रल विस्टा (केंद्रीय भूदृश्य) को पुनर्विकसित करने की मेगा योजना के तहत मोदी सरकार ने संसद भवन, एकीकृत केंद्रीय सचिवालय और सेंट्रल विस्टा के विकास या पुनर्विकास के लिए प्रस्ताव मांगा है।

2024 के चुनावों तक तैयार होगा संसद भवन
संसद भवन के स्थान और डिजायन के बारे में पूछे जाने पर पुरी ने कहा कि अभी सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि मध्य अक्टूबर तक हम टेंडर (डिजाइन के लिए) आमंत्रित किए जाएंगे और अगले साल तक निर्माण शुरू हो सकता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति भवन से तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले भवनों को इस परियोजना में शामिल किया जाए। इसके लिए दुनिया के बेहतरीन डिजाइनर्स और आर्किटेक्ट फर्मों की मदद ली जाएगी। कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट होने से विभिन्न मंत्रालयों का कामकाज आसान हो जाएगा। पुरी ने कहा कि अगले चुनाव के समय यानी 2024 में जब हम मिलेंगे, उम्मीद है कि नए संसद भवन में होंगे।

ग्रीन ब्लू नेटवर्क पर आधारित होगी बिल्डिंग

नए कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरियट की बिल्डिंग ग्रीन ब्लू नेटवर्क पर आधारित होगी। सोलर एनर्जी का अधिकतम इस्तेमाल होगा। मंत्रालयों के बीच ही एक पेडेस्ट्रियन एवं साइकिल नेटवर्क तैयार किया जाएगा। संसद भवन की मौजूदा बिल्डिंग के साथ ही एक नव-विकसित संसद भवन का निर्माण होगा या फिर भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए मौजूदा भवन का ही आधुनिकीकरण किया जाएगा। सेंट्रल विस्टा को अपग्रेड करके इसे प्रमुख पर्यटक आकर्षण स्थल बनाया जाएगा। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने कंपनियों और सलाहकारों से पूरे सेंट्रल विस्टा के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार करने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं।

दिल्ली की लैंड पूलिंग योजना भी इसी प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसके तहत 2027 तक लोगों को 17 लाख नए घर मिल जाएंगे। खास बात यह है कि डीडीए द्वारा इस पॉलिसी के तहत जो रिहायशी या कॉमर्शियल क्षेत्र विकसित किया जाएगा, वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट में शुमार होगा।

कई इमारतों का पूरा हो चुका है जीवन काल

योजना में बुनियादी सुविधाओं, साधन, पार्किंग और हरित क्षेत्र की जगह को अपग्रेड करना शामिल है। उन्होंने बताया कि लुटियन जोन की अधिकांश इमारतें अपना जीवन काल पूरा करने के करीब हैं और इन्हें फिर से बनाने की आवश्यकता है। यही वजह है कि मौजूदा सुविधाओं की मांग को पूरा करने के लिए इसका बुनियादी ढांचा अपर्याप्त है। मंत्री हरदीप सिंह पुरी का कहना था कि संसद भवन में सभी सांसदों को कार्यालय नहीं मिल पाता है। अगर भविष्य में परिसीमन के बाद संसद में सीटें बढ़ती हैं तो भी सांसदों के बैठने के लिए सीटों की संख्या में बढ़ोतरी करनी होगी। करीब 100 साल पहले निर्मित इमारतें जैसे कि उत्तर और दक्षिण ब्लॉक भूकंप से सुरक्षित नहीं हैं। काम करने की जगह, पार्किंग और दूसरी सुविधाओं के लिहाज से यहां जगह बहुत कम पड़ती है।

1911 और 1931 के बीच बनी थीं सभी इमारतें

ऐतिहासिक इमारतों राष्ट्रपति भवन, संसद भवन, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक का निर्माण 1911 और 1931 के बीच हुआ था। संसद भवन का निर्माण 1927 में पूरा हुआ था। आर्किटेक्ट एडविन लुटियंस और हरबर्ट बेकर ने सेंट्रल विस्टा की योजना बनाई थी। एक बार नया सचिवालय बन जाए तो सरकार नॉर्थ और साउथ ब्लॉक के कार्यालयों को इनमें शिफ्ट कर सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार इन इमारतों को म्यूजियम में तब्दील करने पर भी विचार कर रही है। इससे पहले यूपीए-2 के कार्यकाल के दौरान नए संसद भवन के निर्माण पर चर्चा शुरू हुई थी लेकिन बाद में यह मामला अधर में लटक गया।

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