सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जारी रहेगा किसान आंदोलन, राकेश टिकैत ने फैसले का स्वागत करते हुए किया ऐलान

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार के विवादित तीनों कृषि कानूनों के लागू होने पर रोक लगाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किसान नेताओं ने स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कहा कि वे तब तक विरोध स्थल नहीं छोड़ेंगे, जब तक कि तीनों कानूनों को रद्द नहीं कर दिया जाता। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि कोर्ट के फैसले का स्वागत है, लेकिन किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। सरकार तीनों कानूनों को निरस्त करे और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के लिए एक कानून भी बनाए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राकेश टिकैत ने कहा, “हमारा विरोध जारी रहेगा। हम मांग कर रहे हैं कि सरकार तीनों कानूनों को निरस्त करे और हमारी उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी के लिए एक कानून भी बनाए।” उन्होंने कहा कि किसानों का विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा, चाहे जितने दिन लगें। साथ ही टिकैत ने कहा कि वह दूसरे किसान नेताओं के साथ तीनों कृषि कानूनों को होल्ड पर रखने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चर्चा करेंगे।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह शीर्ष न्यायालय द्वारा गठित पैनल में भाग लेंगे, इस पर टिकैत ने कहा, हम किसानों की मुख्य समिति में इस मुद्दे पर पहले चर्चा करेंगे फिर कोई फैसला लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि हम 15 जनवरी को होने वाली सरकार के साथ बैठक के लिए भी जाएंगे। उन्होंने 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड निकालने की योजना पर कहा, “विरोध-प्रदर्शन जारी रहेगा, गणतंत्र दिवस की परेड योजना के अनुसार होगी।”

राकेश टिकैत की यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन कृषि कानूनों के कार्यान्वयन पर रोक लगाने के तुरंत बाद सामने आई है। इस मामले में शीर्ष अदालत ने एक चार सदस्यीय समिति बनाई है, जो कानूनों के खिलाफ किसान यूनियनों की शिकायतों को सुनेंगे। कोर्ट ने कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अनिल धनवंत और बी. एस. मान को समिति में शामिल किया है, जो नए कृषि कानूनों के संबंध में किसानों के मुद्दों को सुनेंगे। इस दौरान कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के आवेदन पर नोटिस भी जारी किया, जिसमें किसानों को दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली आयोजित करने से रोकने की मांग की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल एक किसान नेता जसप्रीत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा, हम इन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। किसान पिछले चार महीनों से आंदोलन कर रहे हैं, कम से कम 70 लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। हम पीछे हचने वाले नहीं हैं। सरकार को इन कानूनों को वापस लेना होगा।

बता दें कि पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसान पिछले 48 दिनों से केंद्र के तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी की गारंटी की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी की कई सीमाओं पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। इस मसले के हल के लिए सरकार के साथ किसानों की अब तक हुई आठ दौर की बातचीत अनिर्णायक रही है। अब सरकार और किसानों के बीच अगले दौर की वार्ता 15 जनवरी को होनी है।

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