‘देश आपके साथ खड़ा है’, चंद्रयान-2 पर राहुल ने की इसरो की तारीफ

Spread the love

नई दिल्ली। ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट जाने के बीच कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि देश इसरो के साथ खड़ा है और उसका प्रयास व्यर्थ नहीं जाएगा। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसरो वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मिशन पर बेहतरीन काम किया तथा कई और महत्वपूर्ण एवं महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशनों की नींव रखी है।

गांधी ने ट्वीट किया, ”इसरो को ‘चंद्रयान-2′ मिशन पर उसके बेहतरीन कार्य के लिए बधाई। आपका भाव और समर्पण हर भारतीय के लिए एक प्रेरणा है। आपका काम व्यर्थ नहीं जाएगा। इसने कई और महत्वपूर्ण तथा महत्वाकांक्षी भारतीय अंतरिक्ष मिशनों की नींव रखी है।’

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर कहा कि समूचा देश इस समय इसरो की टीम के साथ खड़ा है। अंतरिक्ष एजेंसी के कठिन परिश्रम और प्रतिबद्धता ने देश को गौरवान्वित किया है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल ने ट्वीट किया कि इसरो की टीम का समर्पण और कठिन परिश्रम ”हम सभी के लिए एक प्रेरणा है।”

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “चंद्रयान- 2 मिशन इस बात का प्रमाण है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में नए मार्ग प्रशस्त किए हैं और हर भारतीय को गौरवान्वित किया है।” उन्होंने कहा, “हम इस अवसर को आगे बड़ी संभावना और नयी ऊंचाइयों पर पहुंचने के तौर पर देखते हैं। भविष्य उज्ज्वल ही उज्ज्वल है।”

उल्ललेखनीय है कि 7 सितंबर की रात ‘चंद्रयान-2’ के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। सपंर्क तब टूटा जब लैंडर चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। ‘विक्रम’ ने ‘रफ ब्रेकिंग’ और ‘फाइन ब्रेकिंग’ चरणों को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया, लेकिन ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ से पहले इसका संपर्क धरती पर मौजूद स्टेशन से टूट गया। इसके साथ ही वैज्ञानिकों और देश के लोगों के चेहरे पर निराशा की लकीरें छा गईं।

इसरो अध्यक्ष के. सिवन इस दौरान कुछ वैज्ञानिकों से गहन चर्चा करते दिखे। उन्होंने घोषणा की कि ‘विक्रम लैंडर को चांद की सतह की तरफ लाने की प्रक्रिया योजना के अनुरूप और सामान्य देखी गई, लेकिन जब यह 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था तो तभी इसका जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। डेटा का अध्ययन किया जा रहा है।

वहीं, विभिन्न विशेषज्ञों ने कहा कि अभी इस मिशन को असफल नहीं कहा जा सकता। लैंडर से पुन: संपर्क स्थापित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर लैंडर विफल भी हो जाए तब भी ‘चंद्रयान-2’ का ऑर्बिटर एकदम सामान्य है और वह चांद की लगातार परिक्रमा कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *