स्वच्छता सर्वेक्षण 2019 : पूरे देश में भोपाल सबसे ज्यादा साफ राजधानी

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भोपाल शहर को स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 में देश के प्रदेशों की सबसे स्वच्छ राजधानी होने का गौरव प्राप्त हुआ है। नई दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 के घोषित किये गये परिणामों में राजधानी भोपाल को यह दर्जा प्राप्त हुआ है। महापौर आलोक शर्मा ने भोपाल को प्राप्त देश की सबसे स्वच्छ राजधानी का सम्मान भोपाल के नागरिकों का सम्मान निरूपित करते हुए शहर के नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया है।


नगर निगम, भोपाल द्वारा स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 के तहत निर्धारित मापदंडों अनुसार विभिन्न प्रक्रियाओं को अमल में लाने के साथ ही शहर में साफ-सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने हेतु लगातार प्रभावी ढंग से कार्यवाही की गई।
निगम द्वारा घर-घर से कचरा एकत्र करने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए समस्त 19 जोन के 85 वार्डों में 150 वाहनों एवं 1905 रेग पिकर्स के माध्यम से घर-घर से गीला एवं सुखा कचरा पृथक-पृथक एकत्र किया जा रहा है। घर-घर से कचरा एकत्र करने के साथ ही 53 बल्क कचरा उत्पादन स्थलों को चिन्हित कर विकेन्द्रीकृत कम्पोस्टींग के माध्यम से जैविक कचरे से खाद्य बनाने का कार्य किया जा रहा है साथ ही 20 हजार होम कम्पोजिट युनिट भी स्थापित कर स्थल पर ही कम्पोस्टींग की जा रही है।


शहर के 5 स्थानों पर बायोमीथेनाइजेशन एवं बायोगैस प्लांट भी स्थापित किये गये है ताकि शहर से निकलने वाले कचरे की मात्रा में कमी लाई जा सके। निगम द्वारा 4 एमआरएफ सेंटर भी स्थापित किये गये है। जिसमें विभिन्न प्रकार के कचरे का निपटान किया जा रहा है और प्लास्टिक अपशिष्ट निष्पादन के भोपाल माडल द्वारा प्लास्टिक कचरे को सीमेंट फैक्ट्रीयों में ईधन के रूप में, सड़क निर्माण एवं रिसाईकल कर पाईप आदि उत्पाद बनाने के उपयोग में लाया जा रहा है। भानपुर स्थित खंती को बंद करते हुए यहां एकत्र लगभग 7.5 लाख टन कचरे को बायोरिमेडीएशन पद्धति से कचरे का निष्पादन किया जा रहा है और कचरे से रिक्त हुई भूमि पर सुदंर पार्क विकसित करने की कार्यवाही प्रचलन में है। निगम द्वारा शहर में विद्यमान तालाबों/जल संरचनाओं की नियमित रूप से सफाई कराई जा रही है एवं नाला-नालियों की सफाई भी मशीनों एवं श्रमिकों के माध्यम से कराई जा रही है ताकि नालों में ठोस अपशिष्ठ जमा ना हो और नाला नालियों का बहाव निर्बाद्ध रूप से जारी रहे।


नागरिकों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन के दृष्टिगत् शहर के प्रमुख चैराहों के सौंदर्यीकरण एवं सड़कों के किनारे की दीवारों पर स्थानीय एवं ट्रायवल कलाकारों के माध्यम से आकर्षक पेंटिंग बनाई गई है साथ ही शहर के 35 चिन्हित कचरा एकत्रिकरण स्थलों का सौंदर्यीकरण कराया गया है और विभिन्न झुग्गी बस्तियों में भी सौंदर्यीकरण कार्य कराए गए है।


भोपाल शहर को खुले में शौच से मुक्त शहर का दर्जा पूर्व में ही प्राप्त हो चुका था। निगम द्वारा इसमें लगातार प्रयास किये गये और भोपाल नगर निगम सीमा अंतर्गत 41 हजार 9 सौ 85 व्यक्तिगत् शौचालयों के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए इनमें पानी की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई एवं शहर में स्थित समस्त 153 सार्वजनिक एवं 51 सामुदायिक शौचालयों को सर्वसुविधा युक्त बनाने के साथ ही जन साधारण को इनके उपयोग में सुविधा के दृष्टिगत् इन शौचालयों की साफ-सफाई व्यवस्थाओं को चुस्त दुरूस्त रखने हेतु निरंतर मानीटरींग की व्यवस्था भी गई और हमें ओडीएफ डबल प्लस का दर्जा भी प्राप्त हो गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2019 के एक महात्वपूर्ण घटक सिटीजन फीडबैक के लिए अधिक से अधिक नागरिकों युवाओं, छात्र/छात्राओं एवं समाज के सभी वर्गाें को जोड़ने का प्रयास किया गया और स्वच्छता जागरूकता की विभिन्न गतिविधियां सार्वजनिक, व्यवसायिक एवं पर्यटन स्थलों पर आयोजित की गई।


कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन सेवाओं की सतत् रूप से निगरानी अधिकारियों द्वारा की जा रही है साथ ही निगम के वाहनों पर वीटीएमएस सिस्टम के माध्यम से वाहनों की आन लाइन मानीटरींग की जा रही है। भोपाल नगर निगम ने कचरा संग्रहण वाहनों की गतिविधियों को पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के साथ ही मितव्ययता के दृष्टिगत् 700 वाहनों में वीटीएमएस स्थापित किया गया है। साथ ही टिव्न बिन्स में 230 आरएफआईडी सेंसर स्थापित किये गये है। नगर निगम द्वारा साफ-सफाई व्यवस्था को सृदृढ़ बनाने एवं स्वच्छता कार्य में संलग्न सफाई कर्मियों की सुरक्षा हेतु आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए है तथा निगम के अस्थाई सफाई मित्रों का एक लाख रूपये का बीमा भी कराया गया है एवं स्वच्छता कर्मियों के लिए नियमित रूप से निःशुल्क रूप से स्वास्थ परीक्षण भी आयोजित किये जा रहे है एवं उन्हें बेहतर उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है।

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