मध्यप्रदेश : सरकार ने अतिथि विद्वानों को जारी किया एक महीने का मानदेय, यह भी दिया अधूरा

भोपाल। प्रदेश सरकार ने आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए अतिथि विद्वानों का एक माह का मानदेय जारी िकया है। अतिथि विद्वानों का कहना है कि शासन को पांच माह का मानदेय देना था, लेिकन सिर्फ अगस्त माह का मानदेय जारी किया है। इसमें भी राशि अधूरी दी गई है। बताया जाता है कि कई अतिथि विद्वानों काे मानदेय के रूप में 30 से 35 हजार रुपए तक मिलते हैं। लेकिन किसी को भी 30 हजार रुपए से ज्यादा नहीं दिए गए। इस मामले में शासन का तर्क है कि उसके पास बजट की कमी है।

लेकिन परेशान शिक्षकों का कहना है कि अगर बजट की कमी है तो नियमित शिक्षकों का वेतन कैसे जारी किया जा रहा है? जबकि वह तो करोड़ों रुपए का है। सूत्रों की मानें तो शासन नियमित शिक्षकों का वेतन रोककर उन्हें नाराज नहीं करना चाहता। इसलिए अतिथि विद्वानों का वेतन रोका गया है। आगामी मार्च माह के प्रथम सप्ताह में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी। इससे पहले सरकार सभी को खुश करने के चक्कर में है। फिलहाल शासन ने एक माह का मानदेय जारी कर अतिथि शिक्षकों को खुश करने की काेशिश की है। लेकिन मानदेय पूरा नहीं मिलने से उनमें असंतोष व्याप्त है।

न नौकरी का ठिकाना, न वेतन का

अतिथि विद्वान और सरकार के बीच पिछले दो वर्षों से शीत युद्ध चल रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया ने सभी का मानदेय बढ़ाकर उम्मीद जगाई थी। लेकिन नई सरकार ने उसे धूमिल कर दिया है। अतिथि शिक्षकों की मानें तो न उनकी नौकरी का ठिकाना है, न ही वेतन का। सभी अतिथि वद्वानों का कहना है कि जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता, तब तक हम अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। 

जल्द जारी कर दिया जाएगा

अतिथि विद्वानों को कुछ मानदेय जारी कर दिया है, बाकी भी जल्द दे देंगे। सरकार उनकी समस्या समझती है, उनके हित के लिए हम काम कर रहे हैं-  जीतू पटवारी, उच्च शिक्षा मंत्री 


एक महीने का मानदेय दिया


पूरा सत्र बीतने के बाद अगस्त माह का मानदेय जारी किया है। सरकार का खजाना खाली है तो नियमित शिक्षकों का वेतन कहां से जारी किया जा रहा है?-  सुरजीत भदौरिया, अतिथि शिक्षक