योग दुनिया को भारत की देन है : प्रो. रामदेव भारद्वाज

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भोपाल । अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जिसमें शरीर मन और आत्मा को एक साथ जोड़कर स्वास्थ्य लाभ लिया जाता है। विश्वविद्यालय में योग दिवस पर कुलपति और कुलसचिव के साथ सभी शिक्षकों कर्मचारियों ने योगाभ्यास किया।
हिंदी विश्वविद्यालय में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा आयोजित इस आयोजन में जोड़ो को लचीला बनाने वाला सूक्ष्म व्यायाम के अलावा ताड़ासन, वृक्षासन, अर्ध चक्रासन का अभ्यास किया गया। इसके बाद बैठकर किए जाने वाले आसनों में दंडासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्ध उष्ट्रासन पूर्ण उष्ट्रासन शशांक आसन उत्तानपादासन और वक्रासन किया गया। वही पेट के बल लेटकर करने वाले आसन में मकरासन भुजंगासन शलभासन का अभ्यास किया गया। इसके बाद पीठ के बल लेटकर करने वाले आसनों में सेतुबंधासन अर्ध हलासन पवनमुक्तासन हुआ। आसनों के बाद शरीर को आराम देने वाले शवासन का अभ्यास किया गया। क्रिया में कपाल भारती प्राणायाम में नाड़ी शोधन शीतली और ब्राह्मी आसन किए गए ।

कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज ने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्मा शरीर रूपी घर में निवास करती है जिसे योग द्वारा स्वच्छ रखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि मन बुद्धि और आत्मा का संतुलन योग से ही संभव है। दुनिया में 173 से ज्यादा देश में योग किया जा रहा है योग दुनिया को भारत की अमूल्य देन है। कार्यक्रम में मौजूद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ बी भारती ने योग को शरीर मन आत्मा को जोड़ने और चेतना को प्रखर बनाने का सशक्त माध्यम बताया।इस मौके पर योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की अपील की ।

आयोजन के अंत में योग एवं चेतना विभाग के प्रभारी डॉ ज्ञान शंकर तिवारी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का सफल संचालन योग प्रशिक्षक राहुल शर्मा ने किया जबकि 2 मई से 20 जून तक तीन चरणों में 50 दिन तक चले योग शिविर की विस्तृत जानकारी और उपलब्धि डॉ भावना ठाकुर ने दी । कार्यक्रम के अंत में योग साधकों को अंकुरित आहार और छाछ का वितरण किया गया।

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