Independence Day 2020 : राष्ट्रनिर्माण में सबकी भागीदारी आवश्यक ! कुलपति प्रोफेसर रामदेव भारद्वाज

भोपाल। आज स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त 2020 से 73 वर्ष पूर्व सन 1947 में देश की आज़ादी के समय सिर्फ सात विश्वविद्यालय थे, लेकिन बहुत ही हर्ष की बात है कि देश में अब700 से अधिक विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं ! भारत की आज़ादी के समय देश की हालत काफी दयनीय थी, लेकिन  हमारे लिए गर्व की अनुभूति है कि  इतने कम समय में भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में अपने को विश्व में स्थापित किया है ! यह बातें अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय भोपाल प्रोफेसर रामदेव भरद्वाज ने कोलार रोड स्थित विवि प्रांगण में 74 वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर कही ! ।

अपने भाषण में प्रोफेसर भारद्वाज ने कहा कि हमारे महान स्वंत्रता सेनानियों ने भारत को सन 1947 में अँग्रेज़ों की चुंगल से आज़ाद कराया और तब से प्रत्येक भारतीय राष्ट्र के निर्माण में लगा हुआ है ! और उसी प्रयास का फल है कि हमने बिमारियों के इलाज करने पर विजय पाई, शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा प्रसार हुआ, विज्ञान और तकनिकी के क्षेत्र में आज हम विश्व से लोहा ले रहे हैं ! उदहारण के लिए अगर आप शिक्षा को ही देखें, जो किसी भी राष्ट्र के निर्माण के लिए सबसे आवश्यक एवं प्रथम शर्त है तो आप पाएंगे कि आज़ादी के समय केवल सात विश्वविद्यालय थे आज 700 से ऊपर हैं ! यही स्थिति प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और  माध्यमिक शिक्षा की है ! निसंदेह आज भारत सन 47 की तुलना में बहुत अधिक शिक्षित है ! हमारे राष्ट्रीय नेताओं और देश की सरकारों ने इस राष्ट्र के विकास एवं निर्माण के लिए योगदान दिया है ! संक्षेप में कहें तो आज भारत उस मक़ाम पर खड़ा है जहाँ सारा विश्व हमें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता ! हम विश्व की अग्रणी राष्ट्रों में अपनी स्थापना एवं महत्वता को सुनिश्चित करते हैं ! निश्चित रूप से आज पूरा विश्व भारत का लोहा मान रहा है चाहे वह कोई भी क्षेत्र हो, तकनिकी के क्षेत्र में हमारे वैज्ञानिकों ने यह साबित कर दिया है कि हम बहुत कुछ कर सकते हैं ! मंगलयान का एक ऐसा उदहारण है जिसने पुरे विश्व को चौंका दिया ! वास्तविकता की बात यह है क़ी आप किसी भी नेटवर्क की बात करें चाहे रेलवे का नेटवर्क हो, सुचना एवं तकनिकी का नेटवर्क हो, शिक्षा का नेटवर्क हो, हम विश्व में अग्रणी हैं ! ज़रूरत बस इस बात है की हम अपने सिस्टम (व्यवस्था) को और सशक्त बनाना है और नागरिकों को ज़िम्मेदार बनाना है ! अगर देशवासी अपशिष्टों (wastage)  जैसे बचा हुआ खाना, बिजली – पानी, समय की बर्बादी पर काबू पा लें तो भारत निसंदेह एक शक्तिशाली देश बनकर उभर सकता है ! सच कहें तो मुझे देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम का विज़न (Vision) 2020 का सपना साकार होता हुआ दिख रहा है ! 

अपने संबोधन के अंत में कुलपति ने समारोह स्थल पर मौजूद प्राध्यापकों, अधिकारीयों, कर्मचारियों एवं छात्रों के समक्ष स्वयं संकल्प लेते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्र की एक महत्वपूर्ण इकाई हैं ! अतः हम जो भी कार्य निष्पादित कर रहें है उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करें, राष्ट्र को ध्यान में रखकर करें और राष्ट के किसी भी संसाधन को नष्ट (बर्बाद) न करें ! हम 125 करोड़ भारतीय अगर राष्ट के संसाधनों की बर्बादी को रोकने के लिए संकल्प ले लें तो भारत अवश्य एक सशक्त एवं शक्तिशाली राष्ट बन सकता है ! 

प्रो. रामदेव भारद्वाज ने कहा कि यह राष्ट्रीय पर्व हम सब उच्चशिक्षा के विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए मना रहे हैं। विश्वविद्यालय में इस महामारी के दौर में जो यहां उपस्थित हुए हैं और जो नहीं हो पाए हैं, वह सब अपनी क्षमता के अनुसार इस राष्ट्रीय पर्व को मना रहे हैं। विश्वविद्यालय में सभी लोग अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार कार्य कर रहे हैं, लेकिन विश्वविद्यालय को आगे बढ़ाने के लिए इसमें और कसावट की आवश्यकता है। मैं सभी को इस राष्ट्रीय पर्व की शुभकामनाएं देता हूं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद् ज्ञापन अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय में कुलसचिव प्रो. विजय सिह ने प्रस्तुत किया।