ट्रंप ने ईरान को चेताया, शब्दों का ठीक तरह से करें इस्तेमाल, नहीं तो भुगतना होगा परिणाम

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नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी थमने का नाम नहीं ले रही है। कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद से ईरान अमेरिका को सबक सिखाने के लिए उसके कैंपों पर पहले हमला कर चुका है, उसके बाद अमेरिका ने ईरान को सख्त लहजे में संदेश दिया था कि यदि वो नहीं सुधरा या किसी तरह से सैनिक कैंपों पर हमला किया तो उसको गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को फिर से आड़े हाथों लिया। उन्होंने पहले उन्हें खामेनेई का “विदूषक” के रूप में मजाक उड़ाया। फिर एक ट्वीट में ट्रम्प ने कहा कि ईरान के नेताओं को “आतंक को छोड़ देना चाहिए और ईरान को फिर से महान बनाना चाहिए!” द ग्लोबल न्यूज वेबसाइट ने इस खबर को प्रमुखता से कैरी किया है।

ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा, “ईरान के तथाकथित ‘सुप्रीम लीडर’, जो हाल ही में सुप्रीम बना दिए गए हैं, उनके पास अमेरिका और यूरोप के बारे में कुछ गंदी बातें थीं।” “उनकी अर्थव्यवस्था दुर्घटनाग्रस्त हो रही है, और उनके लोग पीड़ित हैं। उन्हें अपने शब्दों से बहुत सावधान रहना चाहिए!” ट्रंप ने खामेनेई द्वारा उन्हें एक दुर्लभ सार्वजनिक संबोधन में “विदूषक” कहे जाने के कुछ घंटों बाद ट्वीट किया।

मालूम हो कि बीते 8 सालों के बाद खामनेई शुक्रवार को जनता के बीच उपस्थित हुए थे। इसी मौके पर उन्होंने वहां मौजूद लोगों से विमान में मारे गए युक्रेन के 180 लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया था और गलती के लिए माफी भी मांगी थी। खामनेई ने शुक्रवार को एक ट्वीट में कहा, “खलनायक अमेरिकी सरकार बार-बार कहती है कि वे ईरानी लोगों द्वारा खड़े हैं। वे झूठ बोलते हैं।” “यदि आप ईरानी लोगों के साथ खड़े हैं, तो यह उनके जहरीले खंजर से दिल में छुरा घोंपना है।”

एक अन्य ट्विटर पोस्ट में, ट्रम्प ने ईरानी नागरिकों के लिए एक संदेश भेजा, जिसमें उनके 2016 के अभियान के नारे पर एक दरार भी शामिल थी। “ईरान के महान लोग – जो अमेरिका से प्यार करते हैं – एक ऐसी सरकार के लायक हैं जो सम्मान की मांग के लिए उन्हें मारने से ज्यादा उनके सपनों को हासिल करने में मदद करने की अधिक इच्छुक है। उन्होंने कहा कि ईरान को बर्बादी की ओर ले जाने के बजाय, उसके नेताओं को आतंक का त्याग करना चाहिए और ईरान को फिर से महान बनाना चाहिए!”

वे युद्ध नहीं चाहते हैं’

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी एक सप्ताह के लिए वाशिंगटन गए हुए हैं, वहां उन्होंने कहा कि ईरान भी किसी तरह का तनाव और युद्ध नहीं चाहता है। उन्होंने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी को देखने के पांच दिन बाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ के साथ शुक्रवार को ईरान और अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया पर चर्चा की। 

कुरैशी ने कहा कि वो समझ गए थे कि ईरान किसी भी तरह से युद्ध नहीं चाहता है। यदि युद्ध हुआ तो दोनों देशों को किसी न किसी तरह से नुकसान होगा। इसी मौके पर कुरैशी ने कहा कि यदि ईरान और अमेरिका चाहेंगे तो पाकिस्तान किसी भी तरह से उनके बीच बातचीत करने के लिए तैयार रहेगा। दोनों देश जिस भी तरह से आपसी मतभेद को भुलाना चाहेंगे पाकिस्तान उसमें मदद करेगा। 

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