भारतीय विदेश मंत्री ने चीन को दिया कड़ा संदेश, गलवन में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित था

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नई दिल्ली। सीमा पर जारी तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बात की।  भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश गिया गया कि गलवन में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध कार्रवाई थी जो घटनाओं के अनुक्रम के लिए जिम्मेदार है। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि वह जितनी जल्दी संभव हो पीछे हटने और तनाव कम करने की कोशिश करेगा।

चीन ने भारत के साथ सीमा पर झड़प का मुद्दा निष्पक्ष तरीके सुलझाने पर सहमति जताई।पूर्वी लद्दाख के पैट्रोलिंग पॉइंट- 14 पर हुए खूनी झड़प के दो दिन बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत हुई। इस बातचीत में वांग ने इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों से उबरने के लिए दोनों पक्षों को मौजूदा तंत्रों के जरिए बातचीत और समन्वय का रास्ता और दुरुस्त करना चाहिए।

दोनों देशों की वार्ता के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि विदेश मंत्री एस जयशकंर ने चीनी विदेश मंत्री से बातचीत में इस बात पर जोर दिया कि अभूतपूर्व घटनाओं का द्विपक्षीय रिश्तों पर गंभीर असर होगा। चीनी पक्ष को अपनी कार्रवाई की समीक्षा करें और सुधारात्मक कदम उठाएं। दोनों पक्षों ईमानदारी और गंभीरता से 6 जून को कमांडरों की बैठक में हुए समझौते को लागू करना चाहिए। दोनों पक्षों के जवानों को द्विपक्षीय समझौतों और प्रटोकॉल का पालन करना चाहिए और LAC की सख्ती के साथ सम्मान करना चाहिए, किसी भी तरह की एकपक्षाय कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

बता दें कि इससे पहले पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ हिंसक झड़प में 20 भारतीय जवानों की शहादत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन को कड़ा संदेश दिया है। मोदी ने देश को आश्वस्त किया कि जवानों का बलिदान बेकार नहीं जाएगा। उन्होंने चीन को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत किसी को उकसाता नहीं है, लेकिन अगर कोई हमें उकसाएगा, तो वह भ्रम में न रहे। भारत के पास हर हाल में यथोचित जवाब देने की ताकत है।

भारत शांति चाहता है, लेकिन उकसावे पर चुप नहीं बैठेगा

पीएम नरेंद्र मोदी ने चीन का नाम लिए बगैर कहा कि भारत उसके साथ सहयोग और दोस्ताना रास्ते पर चला है। उन्होंने कहा कि भारत शांतिपूर्ण देश है। इतिहास भी इस बात का गवाह है कि हमने विश्व में शांति फैलाई। पड़ोसियों के साथ दोस्ताना तरीके से काम किया। मतभेद हुए भी को कोशिश की है कि विवाद न हो। हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं लेकिन अपने देश की अखंडता के साथ समझौता भी नहीं करते।

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