मोदी कैबिनेट: आधे से ज्यादा होंगे नए चेहरे, शपथ ग्रहण से 5 घंटे पहले मिलेगी सूचना!

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह का काउंट डाउन शुरू हो गया है। अभी तक जो जानकारी मिल रही है, उसमें यह बात निकलकर सामने आई है कि मोदी की नई कैबिनेट में आधे से ज्यादा नए चेहरे देखने को मिलेंगे। सहयोगी दलों को उनकी मांग के अनुरूप नहीं, बल्कि मोदी की इच्छा से मंत्री पद मिलेगा। जेडीयू और शिवसेना, दोनों को चार मंत्री पद मिलने की संभावना है। हालांकि इन दोनों पार्टियों की ओर से तीन-तीन मंत्री पद देने की मांग आई है। फिलहाल एनडीए के सभी सांसदों से कहा गया है कि वे 30 मई को लुटियन दिल्ली में रहें। शपथ ग्रहण समारोह से पांच घंटे पहले सांसदों को यह सूचना दी जाएगी कि उनका नाम मंत्रियों की सूची में शामिल है। एक चर्चा यह भी है कि मोदी इस बार कई विशेषज्ञों को अपने मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाएंगे। हालांकि अभी ये लोग संसद के किसी भी सदन में नहीं हैं, हो सकता है कि बाद में इन्हें राज्यसभा के जरिए संसद में लाया जाए।

बता दें कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मैराथन बैठक की है। चूंकि मोदी खुद यह बात कह चुके हैं कि एनडीए के सांसद कैबिनेट के गठन को लेकर मीडिया में दिखाई जा रही खबरों पर ध्यान न दें। मीडिया में पिछले कई दिनों से मोदी मंत्रिमंडल को लेकर खबरें चल रही हैं। भाजपा के एक बड़े नेता जो कि आरएसएस के करीबी माने जाते हैं, का कहना है कि इस बार मोदी कैबिनेट में बहुत कुछ नया होगा। यह जरूरी नहीं कि 40-50 फीसदी चेहरे नए होंगे, यह भी संभव है कि नए चेहरों की संख्या इससे कहीं ऊपर पहुंच जाए। जो सांसद पिछले पांच साल मंत्री रहे हैं, वे सभी इस बार भी होंगे, यह जरुरी नहीं। एक बात तय है कि मोदी अपने मंत्रिमंडल में युवा चेहरों को ज्यादा मौका देंगे। भाजपा में करीब आधा दर्जन बड़े नेताओं को छोड़ दें तो बाकी नेताओं के साथ मंत्री पद को लेकर बातचीत करने की आवश्यकता नहीं है।

अमित शाह की भूमिका को लेकर कयास जारी है…

पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वे मंत्री बनेंगे। इस बाबत भाजपा नेता का कहना था कि आरएसएस चाहता है कि शाह पार्टी ही संभालते रहें। वे पार्टी के भीतर और सहयोगियों के साथ अपनी बात को जिस सख्ती के साथ मनवा लेते हैं, वह खूबी किसी दूसरे नेता में नहीं दिखती। संगठन में शाह की मजबूत पकड़ को मोदी और आरएसएस, दोनों मानते हैं। निकट भविष्य में कई राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं, ऐसे में शाह ही पार्टी को जीत की राह पर ले जा सकते हैं। दूसरी ओर पार्टी में ऐसी चर्चाएं भी हैं कि अमित शाह वित्त मंत्रालय या गृह मंत्रालय संभालेंगे। अगर वे ऐसा करते हैं कि मोदी कैबिनेट में टॉप 5 सदस्यों का स्थान बदलना तय है। विदेश मंत्री सुष्मा स्वराज को लेकर भी पार्टी असमंजस में है। हालांकि यह बात कही जा रही है कि स्वराज चाहेंगी तो उनका मंत्रालय नियमित रहेगा। शाह के मंत्री बनने की स्थिति में पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण और राजनाथ सिंह के मंत्रालय भी बदल सकते हैं। अरुण जेटली ने पहले ही कह दिया है कि वे स्वास्थ्य कारणों से इस बार मंत्री पद संभालने की स्थिति में नहीं हैं।