मजीठिया वेज बोर्ड के मामले में मप्र के श्रम आयुक्त व उप श्रम आयुक्त के खिलाफ हाईकोर्ट ने जारी किए वारंट

मामला इस प्रकार है कि मध्यप्रदेश में मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रही ट्रेड यूनियन मध्य प्रदेश पत्रकार एवं गैर पत्रकार संगठन ने 28 दिसंबर 2017 को अपने सदस्यों के सी फॉर्म उप श्रम आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए थे। इन आवेदनों में से लगभग 50 आवेदन अब भी श्रम आयुक्त कार्यालय में लंबित है ,जबकि इस संबंध में संगठन की याचिका पर इंदौर उच्च न्यायालय ने 14 अगस्त 2018 को श्रम विभाग को निर्देश दिए थे कि वे इन आवेदनों को 15 दिन के भीतर श्रम न्यायालय रेफर करें। लेकिन इसके बावजूद श्रम अधिकारियों ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई और यह आवेदन अब तक लंबित ही हैं। इसके बाद संगठन ने इंदौर उच्च न्यायालय में अधिवक्ता प्रखर करपे के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की थी।  जिसके बाद माननीय न्यायालय ने श्रम विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे , श्रम आयुक्त राजेश बहुगुणा तथा उप श्रमायुक्त एलपी पाठक व एसएस दीक्षित को नोटिस जारी किए थे। लेकिन इनमें से कोई भी अधिकारी या उनका कोई प्रतिनिधि 2 अप्रैल को न्यायाधीश विवेक रूसिया की कोर्ट में हुई सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते माननीय न्यायाधीश ने प्रमुख सचिव को छोड़कर शेष तीनों अधिकारियों के खिलाफ ₹10000 के जमानती वारंट जारी किए हैं और उन्हें 30 अप्रैल को न्यायालय में पेश होने को कहा है।

संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष सुचेन्द्र मिश्रा और महासचिव तरुण भागवत ने बताया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 6 माह की समय सीमा में मजीठिया वेज बोर्ड के बकाए का निर्धारण करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन श्रम विभाग ने इस संबंध में आवेदन दिए जाने के  16 महीने बाद भी अब तक कई कर्मचारियों के सी फॉर्म श्रम न्यायालय रेफर नहीं किए हैं। इस संबंध में संगठन के प्रतिनिधियों ने समय-समय पर श्रम अधिकारियों से अनुरोध भी किया लेकिन उसका नतीजा नतीजा कुछ नहीं निकला। इसके बाद संगठन को मजबूर होकर यह याचिका लगानी पड़ी थी। इसके अलावा माननीय उच्च न्यायालय ने मजीठिया वेज बोर्ड की मांग करने के परिणाम स्वरुप समाचार पत्र के कर्मचारियों को दूरस्थ स्थानों पर ट्रांसफर करने तथा उनकी सेवा समाप्त करने के मामले में आपराधिक अभियोजन की अनुमति के आवेदनों का निपटारा करने के लिए भी 60 दिन की समय सीमा तय की थी लेकिन बावजूद इसके श्रम अधिकारियों ने इस मामले में भी अब तक सुनवाई प्रारंभ नहीं की है। इस ढील पोल के चलते समाचार पत्र प्रबंधन बिना रोक-टोक मजीठिया वेज बोर्ड का अधिकार मांगने वाले पत्रकारों व कर्मचारियों का स्थानांतरण व सेवा समाप्ति कर रहा है।