Madhya Pradesh : पहली बार जन्मस्थल ग्राम कुचवाड़ा में नहीं मना ओशो का जन्म दिन

भोपाल/रायसेन। अध्यात्मिक गुरु आचार्य रजनीश ओशो की जन्मस्थली कुचवाड़ा में पहली बार उनका जन्म दिन नहीं मनाया गया। कोरोना संक्रमण के कारण विदेशों से एक भी भक्त कुचवाड़ा नहीं आया। उनके प्रमुख शिष्य और कुचवाड़ा ओशोधाम के प्रबंधक सत्यतीर्थ भारती का 8 माह पूर्व निधन हो गया है। भारती की धर्मपत्नी जापान में रहती हैं। वे यहां नहीं आ सकीं हैं। कोविड-19 के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं इसलिए कुचवाड़ा में ओशो फाउंडेशन से जुड़े कोई भी विदेशी भक्त यहां नहीं आए हैं।

ओशोधाम कुचवाड़ा के कर्मचारी नेतराम लोधी ने बताया कि पिछले साल ओशो के 88वे जन्म दिन पर बड़ी संख्या में अनुयायी आए थे। इस बार कोई नहीं आया है। इस बार कोई कार्यक्रम नहीं होगा। जापान की महिला अनुयायी यहां आश्रम में पिछले 8 माह से रह रही हैं। उन्होंने कोरोना संक्रमण के कारण ओशो का जन्मोत्सव नहीं मनाने की बात कही है। देश के अन्य किसी स्थान से भी यहां भक्तों के आने की कोई सूचना नहीं है।

गौरतलब है कि रायसेन जिला मुख्यालय से 72 किमी दूर ग्राम कुचवाड़ा में 11 दिसंबर 1931 को ओशो का जन्म हुआ था। प्राथमिक शिक्षा के बाद ओशो अपने माता-पिता के साथ ननिहाल गाडरवाड़ा चले गए। उन्होंने जबलपुर और सागर में उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में अंतरराष्ट्रीय दार्शनिक के रूप में ख्याति प्राप्त की। ओशो के देश-विदेश में 80 के दशक में लाखों अनुयायी थे।

19 जनवरी 1990 में ओशो के निधन के बाद उनके अनुयायियों ने कई बड़े कार्यक्रम आयोजित कर ओशो के संदेश का प्रचार-प्रसार किया। फिल्म अभिनेता विनोद खन्नाा भी ओशो के शिष्य बन गए थे। अटलबिहारी सरकार में विनोद खन्नाा मंत्री रहते हुए कुचवाड़ा ओशो का जन्म दिन मनाने के लिए आए थे। कुचवाड़ा में ओशो फाउंडेशन की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर का व्यापक ओशोधाम बनाने की योजना थी। लेकिन योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी।