यूपी में आज से हाथ में प्लास्टिक पॉलीबैग मिलने पर छह महीने जेल या एक लाख रुपया जुर्माना

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लखनऊ। पर्यावरण को बेहद ही दूषित करने वाले प्लास्टिक और उससे बने सामान पर प्रतिबंध लगाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश में आज यानी एक सितंबर से प्लास्टिक और उससे बने सामान पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके इस्तेमाल करने पर एक लाख रुपया जुर्माना और छह महीने जेल की सजा का प्रावधान है।

प्रदेश के शहरों में पॉलीथिन, प्लास्टिक व थर्मोकोल के खिलाफ रविवार से बड़ा अभियान चलेगा। जिलों में गठित टास्क फोर्स इस पर निगाह रखेंगी। पॉलीथिन के साथ ही प्लास्टिक व थर्मोकोल के बर्तनों का इस्तेमाल करना या इसे सड़क पर इधर-उधर फेंकने वालों के खिलाफ भी अभियान चलेगा। ऐसा करते पकड़े जाने पर तुरंत ही मौके पर जुर्माना भरना होगा। इसके लिए डीएम की सीधी जवाबदेही होगी। जिलाधिकारियों को इसका कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि 50 माइक्रोन से पतली पॉलीथिन प्रतिबंधित है। इसके साथ ही एक बार इस्तेमाल होने वाले थर्मोकोल के कप, गिलास, प्लेट व चम्मचों की बिक्री व इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि टास्क फोर्स बनाकर रविवार से इस पर कड़ाई से प्रतिबंध लगाया जाए। जहां टास्क फोर्स नहीं है वहां पर तत्काल इसे बनवाया जाए। जिससे कि प्रतिबंध कारगर हो।

उत्तर प्रदेश सरकार की इस सख्ती के बाद भी अगर कोई 50 माइक्रॉन से पतली प्लास्टिक से कम के उत्पादों का इस्तेमाल करते पाया गया तो उसको बेहद कड़ी सजा मिलेगी। अगर कोई पॉलीबैग के साथ पकड़ा गया तो एक लाख रूपये तक जुर्माना और छह महीने जेल की सजा होगी।

इतना ही नहीं, इसी बिक्री पर भी बेहद सख्ती की गई है। अब कहीं भी प्रतिबंधित प्लास्टिक बिकता पाया गया तो संबंधित क्षेत्र के थानेदार व नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

नियम का उल्लंघन हुआ तो इन लोगों पर होगी कार्रवाई

गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने साफ कहा कि अगर उत्तर प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक बेचे जाने की खबर मिली तो सम्बन्धित थानाध्यक्ष, नगर निगम के क्षेत्रीय अधिकारी, वाणिज्य कर के क्षेत्रीय अफसर और सम्बन्धित क्षेत्र के मजिस्ट्रेट एवं क्षेत्राधिकारी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिये कि वे सम्बन्धित मजिस्ट्रेट/क्षेत्राधिकारी से उनके क्षेत्र में पॉलीथीन की बिक्री रोकने के लिये समुचित कार्रवाई करने और बिक्री को पूरी तरह रोकने के बारे में तीन दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट दें।

प्रमुख सचिव ने कहा था कि व्यापार मण्डल को लिखित रूप से प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बारे में बताकर उनसे सहमति ले ली जाए। इसके अलावा, सम्बन्धित जन प्रतिनिधि को भी इस बारे में अवगत कराया जाए। उन्होंने कहा था कि वह खुद इन क्षेत्रों में जाकर देखेंगे कि पाबंदी का पालन किया जा रहा है या नहीं।

उत्तर प्रदेश सरकार के प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाये जाने और ऐसा न होने पर अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बाद लखनऊ पुलिस ने हेल्पलाइन नंबर जारी करते हुये लोगों से कहा है कि प्लास्टिक की बिक्री और निर्माण करने वालो के बारे में इस नंबर पर सूचित करें। लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने कहा कि शहर के लोग आगे आये और शहर में प्लास्टिक निर्माण और बिक्री के बारे में एंटी क्राइम हेल्पलाइन नंबर 7839861314 पर सूचित करें। सूचना देने वालो की पहचान गुप्त रखी जायेगी।

विधान भवन परिसर भी प्लास्टिक मुक्त

यूपी विधान सभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने संसद की तर्ज पर यूपी विधानसभा के विधानभवन परिसर को पूर्ण रूप से प्लास्टिक मुक्त बनाने के निर्देश दिए हैं। दीक्षित ने बताया कि यह निर्देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्लास्टिक के इस्तेमाल को पूरी तरह से बंद करने के सुझाव पर दिए गए हैं।

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