जयंत सोनवलकर के कुलपति बनने के बाद से भोज विवि के बिगड़े हालात, यूजीसी ने विवि को नहीं दी कोर्स चलाने की मान्यता

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भोपाल। (मनीष गुप्ता)। विवादित कुलपति जयंत सोनवलकर के कार्यभार ग्रहण करने के बाद से ही भोज मुक्त विश्वविद्यालय के हालात लगातार खराब होते जा रहे है। अब भोज विश्वविद्यालय को यूजीसी ने बड़ा झटका दिया है। यूजीसी ने सत्र 2020-21 के लिए कोर्स संचालन की मान्यता देने से मना कर दिया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने भोज मुक्त विश्वविद्यालय को एमए, एमएससी, एमकॉम, एमबीए (एमएम) समेत 26 पाठ्यक्रमों को नए सत्र में चलाने की मान्यता नहीं दी है। ऐसे में नए शिक्षा सत्र में भोज मुक्त विश्वविद्यालय में इन पाठ्यक्रमों में दाखिले नहीं हो सकेंगे। यूजीसी ने केवल बीए,  बीसीए, बीएड और बीकॉम पाठ्यक्रमों को ही तय मानदंडों के अधीन चलाने की अनुमति दी है।  

जनवरी 2019 में ही यूजीसी ने 26 कोर्स की मान्यता कर दी थी रद्द

शिक्षकों की कमी के कारण यूजीसी ने जनवरी 2019 में भोज मुक्त विश्वविद्यालय के 26 कोर्स की मान्यता रद्द कर दी थी। जिसके करण कुलसचिव एच. एस. त्रिपाठी ने रद्द कोर्स में एडमिशन लेने वाले सभी स्टूडेंट की फीस वापस करने का आदेश जारी किया था। इन्हीं कोर्स की मान्यता के लिए जनवरी 2020 में अतिथि विद्वानों को तीन वर्ष के लिए नियुक्त कर पीजी कोर्स की मान्यता के लिए पुनः यूजीसी को आवेदन के साथ अतिथि विद्वानों के दस्तावेज भेजे गए थे। परंतु अतिथि विद्वानों को 5 महीने बाद ही 03 जून 2020 को बिना पूर्व सूचना के अवैध रूप से नियुक्ति निरस्त कर निकाल दिया गया। नियुक्ति निरस्त करने की सूचना मिलते ही यूजीसी नें भोज विश्वविद्यालय को मानदंडों को पूरा न करने का हवाला देकर संबंधित कोर्स की मान्यता देने से इंकार कर दिया।

मान्यता के लिए गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति फिर अवैध रूप से नियुक्ति निरस्त

भोज मुक्त विश्वविद्यालय पिछले तीन वर्षों से यूजीसी की मान्यता के लिए गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति करता रहा है। जब भी विश्वविद्यालय को कोर्स के संचालन के मान्यता की आवश्यकता होती वह अतिथि विद्वानों की नियुक्ति करता और मान्यता प्राप्त हो जाने के बाद बिना पूर्व सूचना के गेस्ट फैकल्टी की सेवाएं समाप्त कर दी जाती है। इस बात की सूचना विश्वविद्यालय प्रशासन यूजीसी को नहीं देता जबकि यूजीसी इस धोखे में रहती है कि जिन गेस्ट फैकल्टी के दस्तावेज मान्यता के लिए यूजीसी को भेजे गए है वही फैकल्टी शैक्षणिक कार्य में लगे है।

यूजीसी में शिकायत, यूजी कोर्स की मान्यता भी खतरे में

भोज मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा बीए, बीएससी और बीकॉम कोर्स के संचालन में यूजीसी रेगुलेशन 2017 में तय मानदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। यूजीसी के नियमानुसार किसी भी विषय के संचालन के लिए उस विषय से संबंधित 3 फैकल्टी की नियुक्ति अनिवार्य है। लेकिन भोज विश्वविद्यालय में संबंधित विषयों की तीन फैकल्टी की अनिवार्यता के मानदंड के बिना ही कोर्स संचालित है।  जिसके कारण इन कोर्सेज की मान्यता पर भी खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में इससे संबंधित शिकायत यूजीसी में की गई है, यदि यूजीसी विवि के विरुद्ध एक्शन लेता है तो यूजी डिग्री को पढ़ाने की मंजूरी भी वापस ले ली जाएगी। यूजीसी के नए नियम के अनुसार ऐसा आये जाने पर विश्वविद्यालय प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारी व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। इसके अलावा दोषी पाए जाने पर इन अधिकारियों को सीपीसी के तहत तीन साल या उससे अधिक की सजा भी हो सकती है। 

पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स फर्जी तरीके से संचालित

विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों के बारे में भ्रमित करने वाले विज्ञापन जारी कर रहा हैं। जनवरी 2020 में प्रवेश के लिए  विज्ञापन जारी कर 33 पीजी डिप्लोमा और 6 डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लिए गए थे। इन कोर्सेज के संचालन की मान्यता यूजीसी से न होने के बावजूद इसमे प्रवेश लिए गए।   प्रवेश के समय विद्यार्थियों नें कोर्स संचालन की मान्यता के बारे में विश्वविद्यालय से जानकारी मांगी गई, तो विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने यह भ्रमित जानकारी दी कि पीजी डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स के संचालन के लिए भोज विश्वविद्यालय को यूजीसी मान्यता की जरूरत है।

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