अब कोई भी स्टेट विवि नहीं बनेगा सेंट्रल यूनिवर्सिटी

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नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लिया है कि अब किसी भी राज्य विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय नहीं बनाया जा सकेगा। इसका आधार उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सेंट्रल यूनिवर्सिटी को बनाया गया है। मंत्रालय ने माना है कि यहां दस साल बाद भी इनकी हालत नहीं सुधरी, यहां कर्मचारियों समेत अन्य समस्याएं वैसी ही हैं।देश में दस साल पहले अन्य यूनिवर्सिटी के साथ छत्तीसगढ़ में गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी, मध्यप्रदेश में सागर और उत्तराखंड की गढ़वाल यूनिवर्सिटी को भी अपग्रेड कर सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाया गया था। सेंट्रल यूनिवर्सिटी अपडेट होने के बाद उम्मीद थी कि यहां देश की अन्य बड़ी यूनिवर्सिटी के समान सुविधाएं होंगी। उच्च शिक्षा का लेवल अन्य प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के समान होगा। ऐसा कुछ नहीं हुआ। तीनों यूनिवर्सिटी की हालत देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने किसी भी राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा नहीं देने का निर्णय लिया है। कई राज्यों ने अपने विश्वविद्यालयों को सेंट्रल यूनिवर्सिटी बनाने की मांग की थी, जिसके कारण मंत्रालय ने यह निर्णय लिया है।

उत्तराखंड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की यूनिवर्सिटी ने नहीं पेश किया आदर्श

उत्तराखंड और मध्यप्रदेश की सागर यूनिवर्सिटी से जो उम्मीदें थी, पूरी नहीं हुई। सागर यूनिवर्सिटी में हालात तो और भी ज्यादा खराब रहे। यहां सेंट्रल यूनिवर्सिटी अपग्रेड होने के बाद हुई नियुक्ति को लेकर सीबीआई जांच तक हुई। पूर्व कुलपति गजभिए को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। वहीं गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में सीबीआई पूर्व कुलपति लक्ष्मण चतुर्वेदी के कार्यकाल में विभिन्न पदों पर आयोग्य लोगों की नियुक्ति की जांच कर रही है। अपग्रेड होने के बाद इन विश्वविद्यालयों में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के समान उच्च शिक्षा का स्तर देखने को भी नहीं मिला।

सरकार ने यूजीसी को इन यूनिवर्सिटीज की अकादमिक और शोध गुणवत्ता के ऑडिट का दिया आदेश

शिक्षा मंत्रालय ने डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय और गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी समेत 11 ऐसी यूनिवर्सिटीज चिह्नित की हैं, जिनका प्रदर्शन औसत से भी नीचे है। सरकार ने यूजीसी को इन यूनिवर्सिटीज की अकादमिक और शोध गुणवत्ता के ऑडिट का आदेश दिया है।

एक अधिकारी ने बताया, ‘ऑडिट के लिए यूजीसी को सूची सौंप दी गई है। अभी तक कोई समयसीमा निर्धारित नहीं की गई है। पहले यूजीसी ऑडिट का क्राइटेरिया सेट करेगी, फिर काम शुरू करेगी। ऑडिट का मुख्य उद्देश्य अकादमिक गुणवत्ता, शोध, गतिविधियां, रिसर्च आउटपुट के बारे में जानकारी जुटाना होगा।’

यूजीसी के सूत्रों के मुताबिक, इस टीम में 3 सदस्य होंगे। यह टीम छात्रों के परिणाम व उनके प्लेसमेंट रेकॉर्ड का भी डेटा खंगालेगी। टीम इस क्राइटेरिया पर काम शुरू कर मिनिस्ट्री को रिपोर्ट से अवगत करवाएगी।

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