सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाई समिति के सामने पेश नहीं होंगे किसान: किसान संगठनों का ऐलान

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नई दिल्ली। कृषि कानून को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सुप्रीम कोर्ट की किसी भी समिति के सामने पेश होने से मना कर दिया है. किसान संगठनों का कहना है ना ही वो सामूहिक तौर पर ना ही अकेले सुप्रीम कोर्ट की किसी भी समिति के सामने पेश होंगे. उन्होंने इसके पीछे केंद्र सरकार का किसानों के प्रति लापरवाही और आक्रामक रवैये की दलील दी है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार के ऐसे बर्ताव की वजह से उन्होंने ऐसा करने का फैसला लिया है.

किसान संगठनों ने SC के सुझाव पर कमेटी के समक्ष पेश होने के सुझाव को मना कर दिया है और फैसले के लिए मामलों की सूची बनाने को लेकर नाराजगी जाहिर की है. इससे पहले अदालत में सरकार की ओर से कहा गया कि अदालत सरकार के हाथ बांध रही है, हमें ये भरोसा मिलना चाहिए कि किसान कमेटी के सामने बातचीत करने आएंगे.

किसान संगठन की ओर से दुष्यंत दवे ने कहा कि हमारे 400 संगठन हैं. ऐसे में कमेटी के सामने जाना है या नहीं, हमें ये फैसला करना होगा. जिसपर अदालत ने कहा कि ऐसा माहौल ना बनाएं कि आप सरकार के पास जाएंगे और कमेटी के पास नहीं. सरकार की ओर से कहा गया है कि किसानों को कमेटी में आने का भरोसा देना चाहिए. कोर्ट ने इससे पहले कहा था कि एक विशेषज्ञों की समिति बनाई जाएगी जिसकी अध्यक्षता भूतपूर्व सीजेआई करेंगे जिसका चुनाव किसानों के मत से ही होगा.

उधर, दिल्ली की सरहद पर पिछले 47 दिनों से जमे प्रदर्शनकारी किसानों द्वारा 26 जनवरी को ट्रेक्टर रैली निकालने की मंशा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने अर्जी दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में केंद्र सरकार ने कहा कि 26 जनवरी को किसानों के द्वारा ट्रैक्टर रैली न निकालने का आदेश सुप्रीम कोर्ट जारी करे. सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को केंद्र की इस अर्जी पर सुनवाई कर सकता है.

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