Lockdown-3: शराब का खेल, धंधेबाज पास, शासन फेल

Spread the love

लखनऊ। समाचार भारती के लिए लखनऊ के समूह संपादक मनीष गुप्ता लॉक डाउन 2 की अपार सफलता के बाद,लॉक डाउन 3 की बिंदास शुरुआत , कोरोना महामारी के खिलाफ एक बड़े युद्ध का आगाज l जी हां ,उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बहुत तल्लीनता के साथ काम कर रही है, चाहे कोटा के छात्रों के लाने की बात हो या प्रवासी मजदूरों को राहत दिलाने की बात lसब कुछ योगी जी बड़ी तल्लीनता के साथ कर रहे हैं l लेकिन लॉक डाउन 2 के दौरान लखनऊ सहित उत्तर प्रदेश के तमाम कोनों में शराब का धंधा खूब फला फूला lब्लैक मार्केटिंग भी हुई और रकम के चार गुना वसूली भी ,कहने को यह रहा कि “लॉक डाउन” के दौरान कोई भी शराब की दुकान नहीं खुलेगी, फिर क्या था शराब व्यवसायियों को बड़ा झटका लगा l उसके बाद खेल शुरू हुआ ब्लैक मार्केटिंग का l जी हां बंद दुकानों से शराब निकाली गई ,या नहीं निकाली गई ,यह तो “समाचार भारती” नहीं जानता लेकिन शहर के कोने-कोने में चार गुनी कीमत में बिक रही शराब, गांव के किसी भट्टी में बन रही हो ,यह निवाला भी निगल पाना हैरत की बात होगा l

मतलब साफ है ,बंद दुकानों से माल निकाला गया ,शहर की गली, नुक्कड़ ,गांव की डगर और कस्बों की गुमटी के पीछे से लगातार, शराब की बिक्री जारी रही lखबर तो यहां तक आ रही है, कि इस बीच शराब की दुकानों में ताबड़तोड़ चोरियां हुई l”समाचार भारती” आपके सामने कुछ सवाल रख रहा है, जरा जवाब खोजिए और हमें बताइए l सवाल नंबर एक अचानक लॉक डॉन के बाद बंद पड़ी शराब की दुकानों से माल बाहर कैसे आया? क्या पुलिस की मिलीभगत से यह माल बाहर निकाला गया? या फिर आबकारी विभाग की आंख में धूल झोंक कर रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई? कहीं ऐसा तो नहीं यह सब कुछ आबकारी विभाग जान रहा था ?लेकिन “लॉक डाउन” में उनकी जेब कैसे भरे उसके विकल्प भी तलाश रहा था lयह सब सवाल तो ऐसे हैं जिनका जवाब जानने में हमें टाइम लगेगा ,लेकिन जरा आज की एक खबर जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है उसके बारे में भी हम आपको बता दें की आबकारी विभाग ने शराब व्यवसायियों से “लॉक डाउन” के पहले के माल का ब्यौरा मांगा है, ऐसा तो नहीं जितना माल बाजार में बिका, करोड़ों का हेरफेर हुआ ,उससे आबकारी विभाग अपने को बचा रहा हो l

दरअसल इन सब के पीछे की सच्चाई कुछ हद तक “समाचार भारती”आपके सामने लाने की कोशिश कर रहा है lहमने लखनऊ के कई गांवों में और शहरी सीमाओं के अंदर दलालों को रेड जोन में बेबाकी से शराब बेचते देखा lयहां तक कि देसी शराब के क्वार्टर में स्टीकर भी नहीं चिपका था ,कहीं ऐसा तो नहीं कि जो माल बाजार में अप्रैल माह में निकाला जाना था ,वही माल “ब्लैक मार्केटिंग” के जरिए ” लॉक डाउन टू” के दौरान बेचा गया lएक डर यह भी था कि व्यापारियों का यह मानना था लॉक डाउन खुलते ही उन्हें पुराने स्टॉक को तुरंत ठिकाने लगाना होगा, और नए एलॉटमेंट के बाद नई शराब में नई एमआरपी के साथ उसे बेचना होगा l ऐसे में उनको वही रेट मिलता जो शराब का असली रेट था, तो भला व्यापारी लॉक डाउन के दौरान हुए घाटे की भरपाई कैसे करते ?लिहाजा व्यापारियों ने स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से दुकानों में चोरी की रिपोर्ट लिखवाई ,ताकि पुलिसिया दस्तावेजों में यह आ जाए के फला दुकान में इतने की चोरी हुई ,दरअसल यह चोरी नहीं थी l

यह माल की ब्लैक मार्केटिंग थी ,अगर यह मान भी लिया जाए कि यह चोरी थी ,तो लॉक डाउन के दौरान सभी चोरों के कंधे हिले हुए हैं, तो ऐसे में भला पुलिस की नाक के नीचे से शराब की दुकान में चोरी करने वाले चोरों का कलेजा इतना बड़ा कैसे गया? हम क्या बताएं ,खुद समझ लीजिए, हम क्या कहना चाह रहे हैं? अब जब आबकारी विभाग पर उंगलियां उठने लगी है, तो “लॉक डाउन- 3” में आबकारी विभाग ने अपने को बचाने के लिए पूरा ठीकरा व्यापारियों के सिर मढ़ दिया है l व्यापारियों को पुराने माल का ब्यौरा देना पड़ेगा ,व्यापारियों के पेशानी पर बल पड़ रहा है ,वह सोच रहे हैं कि जब माल पार हो चुका है और 4 गुना में बेचा जा चुका है, बंदरबांट भी हो चुका है, तो ऐसे में पुराना माल कहां से दिखाएंगे l

आबकारी और पुलिस विभाग व्यापारियों को कटघरे में लाकर खड़ा कर चुका है , अब अगर ऐसे में चोरी की हकीकत खुलती है और वह शासन स्तर पर जांच का विषय बनता है ,तो कहीं ना कहीं व्यापारियों पुलिस और आबकारी विभाग की तिकड़ी का कुछ ना कुछ खुलासा होना लाजमी है l ऐसे में कोई दो राय नहीं की पुराने माल का ब्यौरा ,अब शराब व्यापारियों के लिए गले की हड्डी बने और अगर व्यापारी अपने माल का ब्यौरा नहीं दिखा पाए ,तो कार्रवाई का डंडा सिर्फ उन्हीं के सिर पर पड़ेगा और आबकारी और पुलिस विभाग अपने को पाक साफ बता कर सफेद कॉलर बने रहेंगे, दरअसल हम आबकारी और पुलिस विभाग पर आरोप नहीं लगा रहे, हम तो सिर्फ यह सवाल उठा रहे हैं कि जब इतने मोटे पैमाने पर चोरियां हुई तो कैसे हुई ?जब कहीं चोरी नहीं हुई, तो क्या चोरों की मनपसंद जगह सिर्फ यह शराब के ठिकाने थे और पुलिस पर इसलिए सवाल उठाना लाजमी है की रेड जोन में इतनी गहन तलाशी के बावजूद भी शराब कैसे गांव ,कस्बों, तहसील और शहर के कोने-कोने में बिकी है या यूं कहें “लॉक डाउन 2” की अपार सफलता के बाद अब “लॉक डाउन-3” में शराब की बिक्री कितनी जाएगी? लॉक डाउन 3 में भी ऐसे ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर “समाचार भारती” की ताबड़तोड़ पड़ताल लगातार जारी रहेगी वह भी विद प्रूफ l

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *