मध्यप्रदेश : ऑडिट से रुकेगी विश्वविद्यालयों में वित्तीय गड़बड़ी

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भोपाल। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में छात्रों से ली गई फीस का उपयोग कहां किया? किस मद में कितने पैसे जमा कराए गए? शासन ने जो बजट जारी किया, उसका उपयोग कहां किया गया? इन सबकी सटीक जानकारी विश्वविद्यालय और कॉलेज के आला अधिकारियों को उच्च शिक्षा विभाग को भेजनी होगी। विभाग इसका ऑडिट कराएगा। अगर ऑडिट में अनियमितता मिली तो संबंधित विवि के कुलसचिव और कॉलेज प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई होगी। आदेश का पालन कराने की जिम्मेदारी अतिरिक्त क्षेत्रीय संचालकों को सौंपी गई है। इस अभियान की शुरुआत खेल निधि से की गई है। इसके बाद प्रत्येक मद का हिसाब लिया जाएगा। इसके लिए अफसरों को भी मदवार जानकारी मुहैया कराना होगी।

शासकीय, अशासकीय और शासकीय अनुदान प्राप्त और गैर अनुदान प्राप्त कॉलेजों द्वारा छात्र-छात्राओं से खेलों के लिए पैसा लिया जाता है। साथ ही शासन से भी खेलों के लिए निधि दी जाती है। मगर धनराशि का उपयोग खेलों की जगह अन्य कार्यों में कर दिया जाता है। इसे लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेज और विवि को हर महीने खेल का ऑडिट करने के निर्देश दिए हैं।

किस मद में गया पता चल जाएगा

छात्रों द्वारा दिए गए शुल्क का सदुपयोग हो, इसके लिए विवि और कॉलेजों में ऑडिट कराने का निर्णय लिया गया है। इससे पता चल जाएगा कि छात्रों का पैसा किस मद में गया और खर्च कहां किया गया है। – जीतू पटवारी, मंत्री, उच्च शिक्षा मप्र 

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