इंदौर : मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ए प्लस ग्रेड पाने वाली पहली यूनिवर्सिटी बनी डीएवीवी

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इंदौर देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी अब ए प्लस हो गई है। नेक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल) ने डीएवीवी को 4 में से 3.30 अंकों के साथ ए प्लस ग्रेड दी है। 21 से 23 नवंबर तक हुए नेक टीम के निरीक्षण के आधार पर यह ग्रेड मिली है। हालांकि 70 फीसदी अंक एसएस (सेल्फ स्टडी) रिपोर्ट के आधार पर मिले हैं, जबकि 30 फीसदी अंकों का निर्धारण निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर हुआ। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में ए प्लस ग्रेड पाने वाली डीएवीवी पहली यूनिवर्सिटी बन गई है।

पांच साल पहले 2014 में 3.09 अंकों के साथ इसे ए ग्रेड मिला था। ए प्लस ग्रेड की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी के दोनों कैंपस में जश्न मना। आतिशबाजी हुई और मिठाई बंटी। प्रभारी कुलपति प्रो. अशोक शर्मा पहले तक्षशिला कैंपस में प्रोफेसरों के साथ जश्न में शामिल हुए। फिर दोपहर बाद नालंदा कैंपस में भी जश्न मना।


डीएवीवी के दौरे में नेक की टीम ने कुलपति प्रोफेसर रेणु जैन और प्रमुख अफसर-प्रोफेसरों के साथ विश्वविद्यायल की खामियों और खासियतों पर चर्चा की गई थी। भविष्य में यूनिवर्सिटी में क्या कुछ होने वाला है इस संबंध में कुलपति ने टीम को बताया था। इसके बाद टीम ने निरीक्षण के दौरान सभी सातों बिंदु पर अपने ऑब्जर्वेशन, कमजाेरी, खासियत और सुझाव के साथ तैयार रिपोर्ट सौंपी थी। ए-प्लस ग्रेड मिलने के बाद मंगलवार दोपहर विश्विद्यालय परिसर में छात्रों और प्रोफेसरों ने एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी का इजहार किया।

15 बड़े बदलावों के बूते पाई उपलब्धि

पिछले पांच सालों में हुए 15 बड़े बदलावों और उपलब्धियों के बूते देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने यह उपलब्धि हालिस की है। नेक की टीम के समक्ष कुलपति ने प्रेजेंटेशन में कहा था कि हम लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। 2014 तक तीन विभागों का सैप अब 7 विभागों तक पहुंच गया है। 2014 में डीएवीवी के टीचिंग विभागों में 165 कोर्स थे। यह संख्या अब 215 पर पहुंच गई है।

पिछले पांच सालों में बीए और बीएससी ऑनर्स  जैसे अहम कोर्स के साथ 8 नए एमबीए कोर्स भी शुरू हुए। तब महज दो विभागों तक सिमित च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम अब सभी 29 विभागों में लागू हो गया है। पांच साल में छात्र संख्या 8380 से 11 हजार 500 पहुंच गई है। सभी टीचिंग विभागाें में औसत प्लेसमेंट 54 से 71 फीसदी पर पहुंच गया है। 24 मेसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स शुरू किए गए हैं। 212 प्रोफेसरों के 2 हजार से रिसर्च पेपर पब्लिश हुए। इनमें से 80 फीसदी मान्य जनरल्स में हुए।

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