भोज विश्वविद्यालय के कुलपति जयंत सोनवलकर पर धारा 33 के तहत हो सकती है कार्रवाई

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वित्तीय अनियमितता और अधिकारों के दुरुपयोग का मामला पहुँचा राजभवन

भोपाल। म.प्र. भोज मुक्त विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल पटरी पर आने की बजाय विवादों का पिटारा हर रोज खुल रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति जयंत सोनवलकर पर जांच का संकट मंडरा रहा है।आर्थिक व प्रशासनिक अनियमितताओं के लिए चर्चित भोज विश्वविद्यालय की गड़बड़ी राजभवन कार्यालय के राडार पर आ गई है। कुलपति सोनवलकर पर पाठ्य सामग्री मुद्रण, डिग्री मुद्रण, ईस्कूल गुरु से नियम विरुद्ध अनुबंध, परीक्षाफल बनाने के कार्य अवैध रूप से आवंटित करने, बिना खुली निविदा के करोड़ो की खरीददारी, नियुक्तियों में मनमानी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। बार-बार मिल रही शिकायतों के बाद राजभवन ने कुलपति जयंत सोनवलकर की कार्यशैली एवं उन पर लगे आरोपों की जांच कराने का निर्णय लिया है। सोनवलकर के खिलाफ राजभवन को 50 से अधिक बिंदुओं पर अलग-अलग शिकायतें मिली हैं।

ये हैं आरोप

भोज मुक्त विश्वविद्यालय में बतौर कुलपति जयंत सोनवलकर पर पदस्थापना से लेकर शिकायत होने तक आर्थिक अनियमितता, भ्रष्टाचार, पद और अधिकारों के दुरुपयोग एवं लोकनिधि के व्यापक भ्रष्टाचार जैसे संगीन आरोप लगाए गए हैं। बताया गया है कि विश्वविद्यालय में क्रमशः सलाहकार के पद पर कमल किशोर एवं सीए के पद पर अर्पित पालीवाल को गलत तरीके से नियुक्ति देकर विश्वविद्यालय को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है। इसके अलावा स्मार्ट बोर्ड, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम, कम्प्यूटर, चेयर एवं अन्य सामग्री खरीदी में लाखों रुपए का घपला किया गया है। यही नहीं अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में मापदण्ड के विपरीत चहेतों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। इन वित्तीय अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट ईओडब्लू ने भी राजभवन को भेज दी है।

कुलपति नें अपने अधिकारों का किया दुरुपयोग

राजभवन में की गई शिकायत में कहा गया है कि जब से जयंत सोनवलकर भोज विश्वविद्यालय के कुलपति बने है वे अपने अधिकारों का दुरुपयोग कर गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार में लिप्त है। इसके साथ ही सोनवलकर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध तरीके से विश्वविद्यालय की राशि को अपने व अपने परिवार पर ख़र्च किया। लूट में खलल न पड़े इसलिए कुलपति लगातार सरकारी आदेश और नियमों की भी अवहेलना करते आ रहे है। कार्यपरिषद सदस्य भी कुलपति की मनमानी के विरुद्ध खुलकर सामने आ गए हैं। एक कार्यपरिषद सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुलपति यूजीसी के नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से कोर्स का संचालन कर रहे है। कई कोर्स तो ऐसे है जिन्हें यूजीसी से संचालित करने की अनुमति नहीं मिली है परंतु प्रवेश ले लिए गये है। इतना ही नहीं कुलपति के कहने पर विवि के अधिकारियों नें यूजीसी को इस बात का झूठा हलफनामा भी भेज दिया गया है कि प्रत्येक कोर्स के लिए विवि के पास नियमित फैकल्टी है और विश्वविद्यालय यूजीसी के सभी मानदंडों का पालन कर रहा है।

विश्वविद्यालय की साख में कमी

ई-स्कूल गुरु और भोज विश्वविद्यालय द्वारा किये गए अवैध अनुबंध के बाद से छात्रों में विश्वविद्यालय के प्रति नकारात्मक भाव उत्पन्न हुए है। ईस्कूल गुरु और भोज विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वाधान में संचालित कोर्स में फीस अधिक होनें से भी विद्यार्थियों में विवि को लेकर अरुचि उत्पन्न हो गई है। कुलपति जयंत सोनवलकर के क्रियाकलापों में कुप्रशासन, अव्यवस्था, शिक्षकों के साथ समन्वय की कमी और कर्मचारियों से आंतरिक विवाद के कारण विवि में स्वस्थ शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण खत्म हो गया है यही वजह है कि जनसाधारण और छात्रों के बीच विवि की छवि खराब हुई है। शिकायत, सी एम हेल्पलाइन, सूचना का अधिकार एवं लोकसेवा गारंटी जैसी शासन की सेवाओं का कार्य तय समय सीमा में पूर्ण नही किया जा रहा है। इन्हीं कारणों से पिछले एक वर्ष से विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या घटी है। जो कि विश्वविद्यालय के इतिहास में सबसे कम है।

जयंत सोनवालकर के पूर्व कुलपतियों को भी धारा 33 लगाकर हटाया गया था

जयंत सोनवलकर से पहले भी इसी प्रकार की अनियमितताओं और मनमानी को लेकर राज्य शासन ने भोज मुक्त विश्वविद्यालय में धारा 33 लगाकर दो पूर्व कुलपतियों डॉ. कान्हेरे और तारिक जफर को कार्यकाल पूरा होने के पूर्व हटा दिया था। यह धारा विवि में प्रशासनिक विफलता व आर्थिक स्तर पर गड़बड़ी होने पर लगाई जाती है। 

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