अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय को मिलेगा विशेष दर्जा: टंडन

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भोपाल। मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि महान हिन्दी सेवी अटल बिहारी वाजपेयी के नाम धारी हिन्दी विश्वविद्यालय को विशेष दर्जा दिया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय में अल्प वेतन पर सेवाएं दे रहे शिक्षकों से ही उनके पदों की पूर्ति की जाना चाहिये।


श्री टंडन ने यह बात हिन्दी दिवस पर कल अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय के प्रशासन अकादमी में आयोजित सत्रारम्भ कार्यक्रम के दौरान कही। इस अवसर पर उपस्थित उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने मंच पर ही राज्यपाल की बातों का अक्षरश: पालन करने की घोषणा की। कार्यक्रम में जनसम्पर्क एवं विधि विधायी मंत्री पी.सी.शर्मा भी मौजूद थे।

राज्यपाल ने कहा कि हिन्दी में देश की धरती में जन्मी हर भाषा और बोली को अपने में समाहित करने की क्षमता है। स्थानीय बोली और भाषा के प्रति लगाव को हिन्दी का विरोध नहीं मानना चाहिए। आवश्यकता उसे स्वाभिमान से जोड़ने की है। हिन्दी में अंग्रेजी की चाशनी जोड़ने की प्रवृत्ति को छोड़ने की है। उन्होंने कहा कि हिन्दी स्वतंत्रता आन्दोलन की भाषा थी। गुजराती भाषी महात्मा गांधी उसके सबसे बड़े समर्थक थे।

श्री टंडन कहा कि हिन्दी, संस्कृत की हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति की विरासत लिये हुए है। सारी दुनिया उस ज्ञान के लिए हिन्दी की ओर देख रही है। जरूरत हिन्दी के प्रति समर्पण और सेवा की है। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री ने जब संयुक्त राष्ट्र संघ में हिन्दी में उद्बोधन देने का निर्णय किया तब बताया गया कि उसकी व्यवस्थाओं में होने वाला व्यय राष्ट्र संघ को देना होगा जो काफी अधिक था।
उन्होंने कहा कि हिन्दी के सम्मान से बढ़कर कुछ नहीं है। साहित्यकार श्रीनाथ चतुर्वेदी ने हिन्दी के लिए तात्कालीन समय की बड़ी राशि एक लाख रूपये का सम्मान त्याग दिया था। उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुये समाज ने वह राशि प्रदान की थी। उन्होंने कहा कि हिन्दी विश्व की भाषा बनेगी। उसे कोई रोक नहीं सकता। हिन्दी को चिकित्सा, तकनीकी ज्ञान और अन्य भाषाओं के साहित्य का अधिक से अधिक अनुवाद कर समृद्ध बनाया जाए।


कार्यक्रम में जनसम्पर्क एवं विधि विधायी मंत्री पी.सी.शर्मा ने कहा कि हिन्दी का जिस तेजी से विस्तार हो रहा है इससे वह सारी दुनिया की भाषा बनेगी। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रसार में भारतीय चित्रपट, सेना, धार्मिक स्थल, रेल ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि हिन्दी में अहिन्दी भाषाओं के शब्दों को खुल कर शामिल किया जाये। चिकित्सक, वैज्ञानिक, इंजीनियरिंग के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्राप्त करने वालों को चाहिए कि वे पुस्तकों की रचना हिन्दी में करें।


उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि हिन्दी हमारी सांसों में रची बसी है। हर दृष्टि से हमें यह गर्व होना चाहिए कि हिन्दी राष्ट्र की मातृभाषा है। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व में जिस तरह सभी शामिल हो जाते हैं उसी तरह हिन्दी भी सबको समाहित कर लेती है। हिन्दी भाईचारे और अपनत्व का पाठ पढ़ाती है। उन्होंने कहा कि ‘सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा’ का भाव हर भारतीय के मन में है। चाहे वह भारत भूमि में रहता है अथवा विदेशों में।

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