यहां कमल नही सिर्फ कमलनाथ की चर्चा, 2019 के रण में क्यों चर्चित बनी छिंदवाड़ा सीट

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मध्य प्रदेश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट में से एक है छिंदवाड़ा.ये न कमल ना कांग्रेस सिर्फ कमलनाथ का गढ़ मानी जाती है. कमलनाथ यहां से नौ बार जीत दर्ज कर बीजेपी के लिए नो एंट्री ज़ोन कर रखा है. सिर्फ एक बार का चुनाव छोड़ दें तो यहां पर सिर्फ और सिर्फ कमलनाथ का ही डंका बज रहा है. इस सीट से इस बार कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ चुनाव मैदान में हैं. नकुल का मुकाबला बीजेपी के आदिवासी नेता नत्थन शाह से है.लेकिन जूनियर कमलनाथ की इस सीट पर मजबूत दावेदारी के पीछे बड़ा चेहरा सीनियर कमलनाथ का ही है.

छिंदवाड़ा लोकसभा ये सीट यूं तो प्रदेश में विकास मॉडल के तौर पर पहचानी जाती है. इस पहचान की मुख्य वजह हैं कमलनाथ..कमलनाथ छिंदवाड़ा का वो चेहरा हैं जो किसी भी पार्टी से सबसे ऊपर हैं.इस सीट पर यदि किसी का दबदबा है तो सिर्फ कमलनाथ का. यही कारण है कि बीते 40 साल से कमलनाछ छिंदवाड़ा पर कब्जा जमाए हैं.सिर्फ एक बार के चुनाव को छोड़ दें तो कमलनाथ यहां से हर चुनाव में जीत दर्ज कर रहे हैं.

इस बार इस सीट का मिजाज़ थो़ड़ा बदला है.छिंदवाड़ा सीट पर इस बार कमलनाथ नहीं बल्कि जूनियर कमलनाथ किस्मत आजमा रहे हैं.वो पहली बार सक्रिय राजनीति में दिखाई दे रहे हालांकि इस बार सियासी दंगल में नये नज़र नहीं आ रहे है.विरासत में मिली राजनीति के बूते नकुल नाथ ने अपने अंदाज़ में वोटरों के बीच पहुंचकर वोट मांगे.यहां नकुलनाथ का मुकाबला बीजेपी के पूर्व विधायक और आदिवासी नेता नत्थन शाह से है.

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