शिवराज सरकार के दौरान हुए ई-टेंडरिंग घोटाले में 5 विभागों और अफसरों पर FIR

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भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के दौरान हुए ई-टेंडरिंग घोटाले में 5 विभागों के अधिकारियों और तत्कालीन ज़िम्मेदार नेताओं के खिलाफ भोपाल में एफ आई आर दर्ज करा दी गयी है. जल निगम, लोकनिर्माण विभाग, पीआईयू, रोड डेवलेपमेंट और जल संसाधन विभाग पर टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. इन मामलों में 7 कंपनियों पर फर्जीवाड़ा कर टेंडर लेने का आरोप है.

भोपाल में जो एफआईआर दर्ज करायी गयी है उसमें लिखा है “अज्ञात नौकरशाह और राजनेता के खिलाफ हैं आरोप”. आज की इस कार्रवाई को हाल ही में सीएम के करीबियों पर पड़े आयकर के छापों का एमपी सरकार की तरफ से दिया गया जवाब समझा जा रहा है.

आयकर छापे के बाद कमलनाथ सरकार भाजपा पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी में थी.वो भाजपा सरकार के समय हुए घोटालों की फाइल खोल रही थी.आय़कर छापे के बाद शिवराज सरकार के समय हुए घोटालों के मामलों के दस्तावेज खंगाले जा रहे थे.ईओडब्ल्यू में ई-टेंडरिंग, माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में गड़बड़ी,सांसद निधि के उपयोग में गड़बड़ी के मामलों की जांच चल रही है. जनजातीय कार्य विभाग, वन्या प्रकाशन सहित अन्य योजनाओं में घपलों के दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है.

आयकर छापे के बाद प्रदेश में कांग्रेस सरकार और बीजेपी के बीच तनाव बढ़ गया है. ई-टेंडरिंग घोटालों की जांच में एक रिपोर्ट का इंतज़ार कमलनाथ सरकार कर रही थी. सीईआरटी की जांच रिपोर्ट के आते ही एफआईआर कराने की तैयारी थी.

ई-टेंडर घोटाला करीब तीन हजार करोड़ का है. पीएचई,पीडब्ल्यूडी में टेंडर खऱीदने में गड़ब़ड़ी सामने आयी थी. इस पूरे मामले की जांच भी चल रही है.ई-टेंडरिंग घोटाले के साथ ही व्यापम घोटाला,एमसीयू में गड़ब़ड़ी का मामला,सांसद निधि के उपयोग में गड़बड़ी के मामलों की जांच चल रही है.इन मामलों में कार्रवाई को लेकर कांग्रेस अब आक्रामक रुख अपना रही है.एक तरह से लोकसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में घोटालों और जांच की राजनीति शुरू हो गई है.

कमलनाथ सरकार के करीबियों पर छापे कें बाद निगाहें अब जनसंपर्क में अधिकारियों द्वारा किए गए घोटालों और उसके द्वारा अधिकारियों द्वारा अर्जित की गई अकूत संपत्ति पर टिक गई है।

शिवराज सरकार का विज्ञापन घोटाला पर भी जांच एजेंसियों की नजर

इवेंट मैनेजमेंट, चैनलों ,अखबारों को करोड़ों की बंदरबांट के बदले अर्जित की गई राशि से ऐसे आला अधिकारी जांच एजेंसियों की नजर में बने हैं। मध्यप्रदेश माध्यम को टूल बना भ्रष्टाचार में फसे कई अधिकारी आय व्यय के पूरे मामले पर अब घिरते नजर आ रहे है। भाजपा शासनकाल की ७५ करोड़ की विज्ञापन अनुमोदन पसंदीदा कम्पनियों को करोड़ों की बंदरबांट भाजपा शासनकाल से कांग्रेस शासनकाल में अब तक जारी है। आने वाले समय में बिना लाइसेंस के चैनलों और अखबारों को की गई बंदरबांट की फाइलें खुलने से कई आला अधिकारी जांच के घेरे में है।

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