मध्‍य प्रदेश पर दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज, दो हजार करोड़ रुपये और ल‍िए

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भोपाल। कोरोना संकट के कारण प्रभावित अर्थव्यवस्था और विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए शिवराज सरकार ने एक बार फिर दो हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया है। इसे मिलाकर प्रदेश सरकार अब तक दो लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का ऋण ले चुकी है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण के कारण पैदा हुए हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रदेश को 14 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने की अनुमति दी थी। बताया जा रहा है कि नए वित्तीय वर्ष से पहले (मार्च 2021) तक वित्त विभाग तीन बार और ऋण लेगा।

सूत्रों के मुताबिक, वित्त विभाग ने इस बार वर्ष 2040 तक के लिए दो हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया है। इसके लिए 6.76 फीसद ब्याज सालाना दो किस्तों में चुकाना होगा। इसके पहले 18 नवंबर को एक हजार करोड़ रुपये का ऋण लिया था।

दरअसल, इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से देश और प्रदेश में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित रही हैं। न तो केंद्र सरकार से पर्याप्त आर्थिक सहायता मिल पाई और न ही राज्य के करों से आय हुई। वहीं, राज्य सरकार के खर्चे बढ़ गए। इससे देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति मांगी थी, जिसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सशर्त मंजूरी दी थी।

इसमें एक राशन कार्ड से देश और प्रदेश में कहीं भी राशन लेने की सुविधा, नगरीय क्षेत्रों में संपत्तिकर को प्रापर्टी की गाइडलाइन से जोड़ने, बिजली व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए काम करना था। वन नेशन-वन राशन कार्ड की तैयारी लगभग पूरी हो गई है तो नगरीय क्षेत्रों में संपत्तिकर को प्रापर्टी की गाइडलाइन से जोड़ने की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। बिजली व्यवस्था में भी सुधार की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है। इसके आधार पर कुछ ऋण ले लिया है तो कुछ लिया जाना है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद आय और व्यय में सामंजस्य बनाने की रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत ही ऋण लेने का कार्यक्रम भी बनाया गया है। आगामी महीनों में भी जरूरत के हिसाब से ऋण लिया लाएगा। 31 मार्च 2020 की स्थिति में जो ऋण लिया गया है, वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के अनुसार ही है।

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