मध्यप्रदेश : 20 साल बाद फिर पार्षद चुनेंगे महापौर और अध्यक्ष, कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव की दी मंजूरी

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भोपाल। अगले साल (2020) में वाले नगरीय निकाय चुनाव में महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे नहीं होगा। चुनाव में जीतकर आए पार्षद अब महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष का चुनेंगे। कैबिनेट ने नगरीय निकाय एक्ट में इस बदलाव पर मुहर लगा दी है। सरकार के नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।

इससे पहले तक जनता सीधे महापौर और नगरपालिका अध्यक्ष को चुनती थी। कैबिनेट की बैठक के बाद जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने बताया कि परिसीमन का काम चुनाव से दो महीने पहले पूरा हो जाएगा। इसके अलावा आपराधिक छवि वाले पार्षदों की अब खैर नहीं। दोषी पाए जाने पर 6 महीने की सजा के साथ ही 25 हजार के जुर्माने का प्रावधान को भी कैबिनेट ने मंजूर किया है।

कैबिनेट में हुए निर्णय

  • बैठक में खनिज पदार्थों पर परिवहन अनुज्ञा पत्र के शुल्क में वृद्धि की गई। उद्योगों को सस्ती बिजली देने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। 
  • महू से इंदौर (मनमाड रेल लाइन) 400 करोड़ की लागत रेलवे लाइन बिछाई जाएगी। जवाहरलाल नेहरू बन्दरगाह ट्रस्ट के तहत बिछाई जाएगी रेलवे लाइन।
  • मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में 650 सौ पदों को खत्म किया जा रहा है। भविष्य में जो भी कंपनी बनेगी उनमें इन्हीं लोगो में से लिया जाएगा। आउटसोर्स या फिर संविदा से पदों को नहीं भरा जाएगा। 
  • 3 माह से 6 माह के बच्चों के लिए टेक होम राशन की व्यवस्था आजीविका मिशन की तहत की जाएगी। 
  • मोटर परिवहन एक्ट में हेलमेट, बीमा और दूसरे कागजों के चलते जो जुर्माना बढ़ाया गया, विचार के बाद ही उसे लागू किया जाएगा।
  • पत्रकार बीमा प्रीमियम में पत्रकारों को पिछले वर्ष के बराबर प्रीमियम रहेगा, बढ़ा हुआ प्रीमियम पत्रकारों को नहीं देना होगा।

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