साइबर क्राइम के शिकंजे में ‘एमपी’, हर रोज 110 लोग हो रहे इसका शिकार

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भोपाल। मध्यप्रदेश अब एक ऐसे क्राइम की गिरफ्त में आ गया है, जिससे निपटना अब पुलिस के लिए मुश्किल होता जा रहा है. प्रदेश में होने वाले हर सामान्य अपराध में भी अब साइबर क्राइम की दखल है. इसका दायरा साल दर साल बढ़ता जा रहा है और सरकार इससे बेखबर है. पुलिस विभाग टेंशन में है और इससे निपटने के लिये नये-नये रास्ते तलाशे जा रहे हैं.

हर महीने बदल रहा साइबर क्राइम का ट्रेंड

साइबर क्राइम एमपी में अपनी जड़ों को मजबूत कर रहा है. सरकार का इस तरफ ध्यान नहीं है और जिससे पुलिस विभागपरेशान है. मध्यप्रदेश में 2012 में राज्य साइबर सेल की स्थापना हुई. हैरत की बात है कि जिस स्पीड से इस सेल को अपडेट करना था, उस स्पीड से काम नहीं हो पाया और हर महीने बदलते साइबर क्राइम के ट्रेंड ने प्रदेश में भी अपना कब्जा जमा लिया.

साइबर अपराधी हुए हाईटैक

साइबर पुलिस के वर्चस्व में आने के बाद पिछले सात सालों में अपराधी तो हाईटैक हो गए, लेकिन साइबर सेल और उससे जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों को लेकर ज्यादा कुछ नहीं किया गया, जिसके चलते अब जब साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है।

प्रदेश में साइबर कोर्स को किया विस्तार

बता दें कि अभी साइबर सेल में 293 का स्टॉफ है, ऐसे में साइबर पुलिस को मजबूत करने के लिए पुलिस संस्थानों में साइबर कोर्स को विस्तार रूप से शामिल करने के साथ जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत प्रदेश के हर थाने में साइबर सेल से जुड़ी ट्रेनिंग व्यवस्था की जा रही है.

हर सामान्य अपराध में छुपा है साइबर क्राइम

प्रदेश में पुलिस प्रत्येक जिले में नोडल थाने के अलावा हर जिले में 50 स्पेशल टीम की मौजूदगी, सीएसपी स्तर पर साइबर इंवेस्टिगेशन इकाई, जोन स्तर के अलावा हर जिले में साइबर लैब, राज्य स्तर पर भोपाल में साइबर कमांड एंड कॉर्डिनेशन सेंटर, रिसर्च सेंटर को लेकर काम किया जा रहा है.

डंडे की दम पर हो रही साइबर अपराधों की जांच

इसके अलावा साइबर मुख्यालय ने साइबर पुलिस का अलग कैडर बनाने की मांग गृह विभाग से की गई  है. अलग कैडर के जरिए तकनीकी स्टाफ की भर्ती के साथ क्राइम की जांच में स्वतंत्र अधिकारी मिल सकेंगे. फिलहाल अभी डंडे के दम पर ही पुलिस साइबर अपराधों की जांच कर रही है.

अपराधियों के सामने फेल नजर आई पुलिस

वहीं अपराधियों और उससे जुड़ी गैंग को पकड़ने में पुलिस फिसड्डी साबित हो रही है. मौजूदा संसाधन इन शातिर अपराधियों के सामने फेल होते नजर आ रहे हैं. बता दें कि एमपी में बैठकर अपराधी अमेरिका में साइबर क्राइम को अंजाम दे रहे हैं, ऐसे में आम जनता को जागरूक रहने की जरूरत तो है, लेकिन सरकार को साइबर सिस्टम को भी समय रहते मजबूत करना चाहिए.

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