छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव 2019: ‘कमलनाथ’ फैक्टर ने बेटे नकुलनाथ को जिताया

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भोपाल। इस बार के लोकसभा चुनाव में कई बड़े नेताओं की साख दांव पर थी. इन्हीं बड़े चेहरों में से एक नाम कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ का भी है. छिंदवाड़ा की जनता ने नाथ परिवार पर एक बार फिर भरोसा जताया है और नकुलनाथ को जीत दिलाई है. नकुलनाथ ने 38,000 मतों से छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर जीत हासिल की है. नकुलनाथ ने भले ही पहली बार लोकसभा का चुनाव लड़ा हो. लेकिन उनके पिता कमलनाथ लगातार नौ बार छिंदवाड़ा से सांसद रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ ने छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से जीत दर्ज की है. साथ ही पिता की विरासत को भी आगे बढ़ाया है.

जीत का कारण

– छिंदवाड़ा से नकुलनाथ की जीत का श्रेय काफी हद तक उनके पिता कमलनाथ को ही जाता है. क्योंकि पिछले कई दशकों से कमलनाथ यहां से सांसद रहे हैं और उन्होंने इस क्षेत्र के लिए काफी काम भी किया है. पिता के काम का फायदा बेटे को 2019 के लोकसभा चुनाव में मिला है.

– इसके अलावा कमलनाथ ने अपने बेटे के लिए जमकर चुनाव प्रचार भी किया था. प्रचार अभियान के दौरान तो उन्होंने ये तक कह डाला था कि मुझ पर प्रदेश की जिम्मेदारी है. मैंने अब जिम्मेदारी नकुल को सौंप दी है. इनको पकड़कर रखिएगा, काम करवाइएगा और अगर वो काम कर के ना दे, तो उनके कपड़े तक फाड़िएगा. कमलनाथ के इस तरह का प्रचार का जनता पर खूब असर भी पड़ा और लोगों ने अपने पूर्व सांसद के बेटे को जीत भी दिलाई.

– नकुलनाथ को मिली सफलता का एक पहलू ये भी है कि भले ही वो पहली बार चुनाव लड़ रहे हों, लेकिन छिंदवाड़ा की जनता के लिए उनका नाम अनसुना नहीं था. नकुलनाथ ने पहले अपने पिता के लिए भी काफी प्रचार किया है, जिसका फायदा उन्हें अपने प्रचार में भी मिला.

– बीजेपी ने नकुलनाथ के खिलाफ मैदान में नत्थन शाह को उतारा था. शाह छिंदवाड़ा लोकसभा की जुन्नारदेव विधानसभा सीट से 2013 में चुनाव जीते थे. शाह को आरएसएस का खूब साथ भी मिला. लेकिन आरएसएस के कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से देखे जाने वाले शाह नकुलनाथ के खिलाफ चुनाव नहीं जीत सके. छिंदवाड़ा महाराष्ट्र बॉर्डर के पास है और नागपुर से करीब 125 किलोमीटर दूर है. जैसा की आप जानते हैं नागपुर आरएसएस का गढ़ है. ऐसे में छिंदवाड़ा में जीत पाना आसान नहीं था. क्योंकि बीजेपी और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने शाह को जिताने के लिए भी कड़ी मेहनत की थी.

– छिंदवाड़ा आदिवासी बाहुल्य इलाका है. कमलनाथ ने यहां पहली बार 1980 में चुनाव जीता और धीरे-धीरे छिंदवाड़ा की तस्वीर बदल दी. उन्होंने यहां स्कूल, कॉलेज, आईटी पार्क बनवाए और हिंदुस्तान यूनिलिवर जैसी बड़ी कंपनियों को छिंदवाड़ा में स्थापित कराया. इससे यहां के लोगों को रोजगार मिला. साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र की जनता को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रेनिंग सेंटर भी खुलवाए. पिता के इस कार्यों का आर्शिवाद छिंदवाड़ा की जनता ने नकुलनाथ को दिया और उन्हें अपना सांसद चुना.

– एक चीज और थी, जिसने नकुलनाथ की जीत को आसान बनाया और वो थी ‘छिंदवाड़ा मॉडल’. 2014 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह मोदी का ‘गुजरात मॉडल’ छाया रहा था, वैसे ही मध्यप्रदेश के 2018 के अंत में हुए मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ का ‘छिंदवाड़ा मॉडल’ छाया रहा था. छिंदवाड़ा के विकास का मॉडल का नकुलनाथ को भी काफी फायदा मिला. लेकिन अब छिंदवाड़ा से जीतने के बाद उन पर इस मॉडल को और बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी भी है.

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