रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में गुपचुप नियुक्तियां, अतिथि व्याख्याता संघ ने उठाए सवाल

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जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद गेस्ट फेकल्टी की नई भर्ती का मामला उजागर हुआ है। कोर्ट ने अतिथि शिक्षकों की नई नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने नियमित असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के बाद ही पढ़ा रहे गेस्ट फेकल्टी को हटाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें हटा कर गुपचुप तरीके से नए गेस्ट फेकल्टी को भर्ती कर लिया।

वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालयीन अतिथि व्याख्याता संघ ने गुपचुप तरीके से हुई नियुक्ति पर आश्चर्य जताया है। संघ के अध्यक्ष डॉ.देवेन्द्र जाटव और सचिव रींझन झारिया ने का कहना है कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार सूची प्रकाशित किए बिना आवेदकों को नियुक्ति-पत्र जारी कर दिए गए। इस रवैये के खिलाफ पूर्व में कुलपति व कुलसचिव को ज्ञापन तक सौंपे गए थे। इसके बावजूद मनमानी जारी है। संघ द्वारा आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है। पहले से कार्यरत अतिथि विद्वानों को घर बैठाकर पसंदीदा अतिथि विद्वानों की नियुक्ति चिंताजनक है।

भर्ती में भारी अनियमितता

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में अतिथि विद्वनों की नियुक्ति में भारी अनियमितता उजागर हुई है। अतिथि विद्वान पद के लिए आवेदन करने वाले कई अभ्यर्थियों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा न तो दावा-आपत्ति मंगाई गई और न ही किसी प्रकार की मेरिट लिस्ट जारी की गई। मनमानी को छिपाने सीधे चयन सूची ही जारी कर दी गई है। विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। जिस पारदर्शिता से यह नियुक्ति की जानी थी उसका अभाव आवेदनों की स्क्रूटनी से लेकर चयन सूची जारी करने तक हर चरण में बना रहा। मनमानी को छिपाने ऐसा किया गया है।

यहां उल्लेखनीय है कि शासन के प्रत्येक विभाग में जहां मेरिट सूची जारी कर अभ्यर्थियों से दावा-आपत्ति आमंत्रित किए जाते हैं वहीं विश्वविद्यालय ने अध्यापन जैसे अहम कार्य के लिए इस प्रक्रिया को तिलांजलि देकर सीधे चयन सूची ही जारी कर दी है। जिन लोगों का चयन किया गया है वे वंचितों से कितने ज्यादा क्वालीफाइड हैं, इस पर सवाल उठ रहे हैं। यह बात इसलिए उठ रही है क्योंकि साक्षात्कार सूची में केवल आवेदकों के नाम दिए गए थें, इनकी शैक्षणिक योग्यताओं का ब्योरा नहीं जारी किया गया था।

 

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