संविधान के दायरे में रहकर बढ़ाई आरक्षण की सीमा : भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति का आरक्षण बढ़ाकर हमने उनके प्रति कोई एहसान नहीं किया है बल्कि उन्हें उनका संविधान प्रदत्त अधिकार देने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी समूहों को मिलाकर छत्तीसगढ़ में आरक्षण अब 82 प्रतिशत हो गया है। देश में सबसे ज्यादा आरक्षण प्रदान करने वाला पहला राज्य हो गया है। इससे वंचित समाज मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण बढ़ाकर हमारी सरकार ने बाबा साहब अम्बेडकर और बीपी मण्डल के सपनों को साकार किया है। बघेल आज जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में 102 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण-भूमिपजून करने के बाद आयोजित अभिनंदन एवं आभार समारोह को मुख्य अतिथि की आसंदी से सम्बोधित कर रहे थे। आरक्षण की सीमा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत और अनुसूचित जाति का 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 13 प्रतिशत करने पर छत्तीसगढिय़ा सर्व समाज महासंघ द्वारा मुख्यमंत्री का सम्मान एवं आभार प्रकट किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 की जनगणना में अनुसूचित जाति की जितनी प्रतिशत जनसंख्या होगी, उतना आरक्षण दिया जाएगा। फिलहाल वर्ष 2011 की जनगणना में 13 प्रतिशत आबादी उनकी है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुरूप काम करते हुए हमने 10 प्रतिशत आरक्षण गरीब सवर्ण को भी दिए हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री टीएस सिंहदेव, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव डहरिया, विधायक शकुन्तला साहू, विधायक चन्द्रदेव राय, विधायक प्रमोद शर्मा, नगरपालिका अध्यक्ष विक्रम पटेल, पूर्व सांसद सोहन पोटाई, पूर्व विधायक जनकराम वर्मा सहित बड़ी संख्या में सर्व छत्तीसगढिय़ा समाज के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आमसभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि आज छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी समस्या नक्सली नहीं बल्कि कुपोषण है। आज 37.5 प्रतिशत बच्चे कुपोषित और 41.5 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी से ग्रसित हैं। इसे दूर करने के लिए हमने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर से सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान चलाने का फैसला लिया है। उन्होंने किसानों को समझाया कि यह सरकार आपकी है। इसलिए अपने पट्टे में केवल अपना धान ही बेचें। कोई कोचिया अथवा अन्य व्यक्ति को न दें। उन्होंने कहा कि हमने आदिवासियों की खरीदी गई जमीन का इस्तेमाल नहीं किये जाने के कारण उन्हें फिर से वापस कर दिया। इस तरह एक बार खरीदने के बाद पुन: जमीन वापस करने वाली देश-विदेश की पहली सरकार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति के अभिन्न अंग हैं। गौपालन हमारे ग्रामीण जीवन में रचा-बसा है। इसे किसी से प्रशिक्षण लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे गांव के हर खेत को घेरने के बदले हम गौठान का घेराव करें। गौठान में गांव के पूरे गाय-बैल रहेंगे। उनके खाने-पीने की व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्माण के बाद यह पहली सरकार है जिसमें हर छत्तीसगढिय़ा महसूस कर रहा है कि उनकी अपनी सरकार है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के महान संत बाबा गुरु  घासीदास एवं कबीर के संदेश का प्रभाव है कि हमारा प्रदेश शांति का टापू बना हुआ है। समारोह को पूर्व सांसद सोहन पोटाई एवं पूर्व विधायक जनकराम वर्मा ने भी सम्बोधित किया। सभा के पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने राज्य की विकास यात्रा को दिखाती हुई प्रदर्शनी स्टॉल का अवलोकन किया। विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को सामग्री एवं चेक वितरित किये। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग की महिला समूहों द्वारा छत्तीसगढ़ी व्यंजन प्रतियोगिता के विजेता समूहों को पुरस्कार भी वितरित किया। इस अवसर पर कलेक्टर कार्तिकेया गोयल, एसपी नीतु कमल सहित सर्व छत्तीसगढ़ समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे।

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