जबलपुर : अजाक्स ने कुलपति कपिल देव मिश्रा को सौंपा ज्ञापन, कहा अतिथि विद्वानों की निरंतरता जारी रखें

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जबलपुर। अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने मंगलवार को रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कपिल देव मिश्र को ज्ञापन सौंपकर पूर्व से कार्यरत अतिथि विद्वानों की निरंतरता जारी रखने की मांग की है। साथ ही कर्मचारी संघ ने कुलपति से यह अनुरोध किया है कि सत्र 2018-19 में कार्यरत अतिथि विद्वानों को शासन द्वारा निर्धारित निश्चित मानदेय पर सेवा में रखा जाए।


यह ज्ञापन संघ के अध्यक्ष अजय झारिया के नेतृत्व में सौंपा गया। अजाक्स ने अपने ज्ञापन में बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा 18 जून 2019 को अतिथि विद्वानों की नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन में मध्यप्रदेश शासन के पत्रों तथा कार्यपरिषद के निर्णयों की अवमानना हुई है। साथ ही पूर्व से कार्यरत अतिथि विद्वानों की निरंतरता प्रभावित हुई है, जिससे आरक्षित के साथ अनारक्षित वर्ग को भी नुकसान हुआ है।

मध्यप्रदेश शासन के यह है निर्देश 

मध्यप्रदेश शासन द्वारा अतिथि विद्वानों के संबंध में जारी किए गए आदेश में अतिथि विद्वानों के चयन के संबंध में निर्देश हैं। आदेश में कहा गया है कि, उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों के अनुपालन में किसी भी अतिथि विद्वान को दूसरे अतिथि विद्वान से विस्थापित नहीं किया जाए।

यदि विगत वर्ष का अतिथि विद्वान आमंत्रण स्वीकार नहीं करे या नवीन आवश्यकता हो, केवल ऐसी ही स्थिति में नियमानुसार कार्यवाही करते हुए किसी नए अतिथि विद्वान के लिए आमंत्रण पत्र जारी करने हेतु आवश्यक प्रक्रिया की जाए।

इस संबंध में न्यायालयीन आदेशों एवं इसके अनुक्रम में इस कार्यालय द्वारा जारी विभिन्न निर्देशों का पालन करना प्राचार्य की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी तथा इसका समुचित पालन नहीं करने पर संबंधित प्राचार्य के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।

हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत हो रही अतिथि विद्वानों की नवीन नियुक्ति

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालयीन अतिथि व्याख्याता संघ के अध्यक्ष डॉ.देवेन्द्र जाटव व सचिव डॉ. रीझन झारिया ने बताया कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया था कि मौजूदा अतिथि विद्वानों के स्थान पर नए अतिथि विद्वानों की नियुक्ति न की जाए। नियमित नियुक्तियां न होने तक वर्तमान में कार्यरत अतिथि विद्वानों की सेवा बहाल रखने की व्यवस्था के बावजूद रादुविवि ने मनमाने तरीके से नवीन अतिथि विद्वान नियुक्त करने संबंधी विज्ञापन प्रकाशित करा दिया है। चूंकि यह रवैया हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की परिधि में आता है, अतः हमें माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। कार्यरत अतिथि विद्वानों को 12 माह की कार्य अभिवृद्धि के बाद भी रादुविवि प्रशासन का यह व्यवहार आहत करने वाला है।

विज्ञापन में आरक्षण रोस्टर का नहीं जिक्र 

विश्वविद्यालय द्वारा 18 जून को गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति के लिए जो विज्ञापन जारी किया गया है उसमें आरक्षण रोस्टर का कोई जिक्र ही नहीं है। अतिथि विद्वनों ने इस मामले में विवि व राज्य शासन के स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न करने पर हाईकोर्ट जाने की बात कही है। ज्ञात हो कि यूजीसी काउंसिल की 10 दिसंबर 2018 को हुई 537 वीं बैठक में गेस्ट फैकल्टी के मानदेय में संशोधन का फैसला किया गया था। साथ ही नियुक्ति में आरक्षण रोस्टर के अनुपालन के निर्देश देश के सभी विश्वविद्यालयों एवं राज्य के उच्च शिक्षा विभाग को दिए गए थे।

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